इंदौर में एक और दो रुपए में ठंडा पानी देने का वादा, पर दो साल से लटकी है वाटर एटीएम योजना

देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर इस बार अपनी एक बुनियादी जरूरत – ठंडे और शुद्ध पेयजल की सुविधा – से वंचित है। नगर निगम की लापरवाही और बार-बार टेंडर निरस्त किए जाने के कारण वाटर एटीएम योजना पिछले दो साल से अधर में लटकी हुई है। नतीजा यह है कि दो गर्मियां बीत चुकीं, लेकिन अब तक लोगों को एक या दो रुपए में ठंडा पानी मिलने की सुविधा शुरू नहीं हो सकी।

इंदौर में एक और दो रुपए में ठंडा पानी देने का वादा, पर दो साल से लटकी है वाटर एटीएम योजना
Water ATM Demo Picture

नगर निगम इंदौर की शुद्ध ठंडा पानी देने की महती योजना फाइलों में दबी

सार्वजनिक स्थानों पर पानी के लिए आमजन आज भी महंगी बोतलबंद पानी पर निर्भर

द एक्सपोज लाइव न्यूज नेटवर्क, इंदौर।

नगर निगम इंदौर (imc indore) ने शहर में विभिन्न स्थानों पर वाटर एटीएम (water atm) और आरओ प्लांट लगाने के लिए 10 साल की अवधि का प्रोजेक्ट तैयार किया था। इसके तहत निगम को एक एजेंसी का चयन करना था जो इन मशीनों का निर्माण, इंस्टॉलेशन, संचालन और रखरखाव करेगी। परंतु निगम ने अब तक यह तय नहीं किया कि काम किसे सौंपा जाए। 

इसकी कहानी शुरू हुई थी पिछले साल यानी 2024 से। नगर निगम इंदौर (imc indore) ने 2024 में शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों—बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पार्क और बाजारों—पर वाटर एटीएम (water atm) और आरओ प्लांट लगाने की योजना बनाई थी। इसके लिए निगम को ऐसी एजेंसी का चयन करना था जो निर्माण, इंस्टॉलेशन, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभाले। योजना के तहत आम नागरिकों को केवल एक रुपए में एक लीटर और दो रुपए में दो लीटर ठंडा व शुद्ध पानी उपलब्ध कराया जाना था। लेकिन यह योजना कागजों से आगे नहीं बढ़ पाई। 

बार-बार रद्द हो रहे हैं टेंडर

निगम ने पिछले साल अप्रैल-मई 2024 में टेंडर निकाला। पांच एजेंसियां बोली प्रक्रिया में शामिल हुईं, पर अगस्त आते-आते बिना कोई कारण बताए निगम ने टेंडर निरस्त कर दिया।

पिछली गलती से सबक लेने की बजाय, निगम ने इस साल फिर वही गलती दोहराई। मई और जून 2025 में दो बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन दोनों बार केवल एक-एक एजेंसी ने आवेदन किया। इन एजेंसियों ने वाजिब दरें दीं — ₹1 प्रति लीटर, ₹2 प्रति दो लीटर और ₹20 प्रति 20 लीटर बोतल भरने की सुविधा।

इसके बावजूद, निगम ने दोनों बार टेंडर निरस्त कर दिए, और आज तक यह स्पष्ट नहीं किया कि ऐसा क्यों किया गया। अब तीसरी बार टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई है, एजेंसी चयन और काम शुरू की तो गई है। निगम का दावा है कि इसी महीने टेंडर खुल जाएंगे। यदि सब कुछ सही भी रहा, तो भी नवंबर में काम शुरू होगा और अगले छह महीने लगेंगे एटीएम स्थापित होने में और तब तक अगले साल की गर्मियां आ जाएंगी। ऐसे में सवाल यही है कि क्या अगली गर्मियों के पहले ये सुविधा लोगों को मिल पाएगी। 

क्या किसी ‘पसंदीदा एजेंसी’ को देने की कोशिश?

बिना कारण बताए बार-बार टेंडर रद्द होना इस पूरे मामले पर सवाल खड़ा करता है। शहर में चर्चा यह भी है कि कहीं निगम किसी “अपनी पसंद की एजेंसी” को मौका देने की कोशिश तो नहीं कर रहा। पहले जिन एजेंसियों ने वाजिब दरें दीं, उनके प्रस्ताव खारिज कर दिए गए। यदि ऐसा है, तो यह न केवल पारदर्शिता पर सवाल है, बल्कि जनहित की अनदेखी भी।

लापरवाही का खामियाजा भुगत रही जनता

यदि यह योजना समय पर लागू हो जाती, तो इंदौरवासी इस साल की झुलसती गर्मी में राहत पा सकते थे। वाटर एटीएम (water atm) लगने से मजदूर, रिक्शा चालक, ठेले वाले, छात्र और राहगीर मात्र कुछ रुपए में ठंडा पानी भर सकते थे। लेकिन टेंडर प्रक्रिया की धीमी चाल और निगम की “मनमानी” के कारण अब तक एक भी एटीएम धरातल पर नहीं उतर सका।

नतीजा यह है कि लोग आज भी महंगे बोतलबंद पानी पर निर्भर हैं या फिर अस्वच्छ पानी पीने को मजबूर। वहीं, सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था न होने से गर्मी और निर्जलीकरण की स्थिति तक बन रही है।

शुद्ध पानी की बढ़ती जरूरत

इंदौर में गर्मियों के दौरान तापमान अक्सर 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर वाटर एटीएम (water atm) जैसी सुविधा बेहद जरूरी है। ये मशीनें आरओ तकनीक से लैस होती हैं, जो शुद्ध और ठंडा पेयजल प्रदान करती हैं। इससे न केवल आम जनता को राहत मिलती है, बल्कि प्लास्टिक बोतलों की खपत घटने से पर्यावरण को भी लाभ होता है।

जनहित से ज्यादा राजनीति पर फोकस

शहर के सामाजिक संगठनों का कहना है कि निगम की प्राथमिकताओं में जनता की प्यास नहीं, बल्कि प्रक्रिया और राजनीति पहले है। दो साल से यह सस्ती और उपयोगी सुविधा केवल इसलिए अटकी हुई है क्योंकि फैसले नहीं हो पा रहे। 

इंदौर स्वच्छता में लगातार देश का नंबर वन शहर रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या “सफाई के साथ जनता की प्यास बुझाने” की जिम्मेदारी भी निगम लेगा या नहीं।