इंदौर के पूर्व विधायक अश्विनी जोशी का निधन, राजनीतिक जगत में शोक की लहर
इंदौर की राजनीति के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक Ashwini Joshi का शुक्रवार सुबह हार्ट अटैक से निधन हो गया। 66 वर्षीय जोशी तीन बार विधायक रहे और अपनी बेबाक राजनीति व जनता से सीधे जुड़ाव के लिए पहचाने जाते थे। जल संकट के दौरान टैंकरों से पानी बंटवाने के कारण उन्हें ‘पानी वाले बाबा’ के नाम से लोकप्रियता मिली थी। उनके निधन से इंदौर के राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर फैल गई है।
तीन बार विधायक रहे कांग्रेस नेता ने 66 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक से ली अंतिम सांस, ‘पानी वाले बाबा’ के नाम से थी खास पहचान
इंदौर।
इंदौर की राजनीति के दिग्गज और कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे पूर्व विधायक अश्विनी जोशी का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। वह 66 वर्ष के थे। हार्ट अटैक के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की खबर से शहर के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है।
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, अश्विनी जोशी पिछले कुछ समय से सांस लेने में तकलीफ और पैरों की बीमारी से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। आज सुबह करीब 8 बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा। परिजन तुरंत उन्हें शेल्बी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉ. अजय पारिख की टीम ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनका हृदय पुनः क्रियाशील नहीं हो पाया और उन्होंने दम तोड़ दिया।
बताया जा रहा है कि अश्विनी जोशी का बेटा इस समय विदेश में है। परिवार ने फैसला किया है कि उसके इंदौर आने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा। इससे पहले पार्थिव शरीर को उनके निवास पर रखा जाएगा, जहां राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों की हस्तियां श्रद्धांजलि देने पहुंचेंगी।
छात्र राजनीति से शुरू किया सफर
अश्विनी जोशी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। उन्होंने छात्र संघ चुनाव लड़ा और वहीं से सक्रिय राजनीति में कदम रखा। वह इंदौर की विधानसभा सीट क्रमांक-3 से तीन बार विधायक रहे। अपने कार्यकाल के दौरान वह अपनी बेबाक कार्यशैली और जनता के बीच सक्रियता के लिए जाने जाते थे।
वह पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाते थे। दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में उन्हें 'शैडो सीएम' के रूप में भी जाना जाता था। अश्विनी जोशी पूर्व मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता महेश जोशी के भतीजे थे। जोशी परिवार का इंदौर की राजनीति में दशकों से बड़ा प्रभाव रहा है।
पांच चुनाव लड़े, तीन बार बने विधायक
अश्विनी जोशी ने अपने राजनीतिक करियर में इंदौर विधानसभा क्रमांक-3 से कुल 5 चुनाव लड़े, जिनमें से 3 में जीत और 2 में हार का सामना करना पड़ा। उनकी चुनावी यात्रा इस प्रकार रही:
- 1998 – पहली बार कांग्रेस से टिकट मिला। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज नेता गोपीकृष्ण नेमा को 3,130 वोटों से हराया।
- 2003 – 4,962 वोटों से जीत दर्ज की। इस बार उन्होंने दिग्गज नेता विष्णु प्रसाद शुक्ला के बेटे राजेंद्र शुक्ला को पराजित किया।
- 2008 – एक बार फिर भाजपा के गोपीकृष्ण नेमा को मात्र 402 वोटों से हराकर हैट्रिक लगाई।
- 2013 – इस चुनाव में उन्हें उषा ठाकुर (भाजपा) ने 13,318 वोटों से हराया।
- 2018 – आकाश विजयवर्गीय (भाजपा) ने उन्हें 5,751 वोटों से शिकस्त दी।
भाजपा की लहर में अकेले दम पर जीता चुनाव
अश्विनी जोशी ने वर्ष 1998 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा। उस साल पूरे देश में भाजपा की लहर थी, लेकिन जोशी ने इंदौर विधानसभा क्रमांक-3 से भाजपा के दिग्गज उम्मीदवार गोपीकृष्ण नेमा को 3,130 वोटों से हराकर करिश्माई जीत दर्ज की। इसके बाद वे लगातार तीन बार (1998, 2003, 2008) कांग्रेस के विधायक रहे।
'पानी वाले बाबा' के नाम से मशहूर, टैंकरों से बंटवाते थे पानी
अश्विनी जोशी अपने विधानसभा क्षेत्र में 'पानी वाले बाबा' के नाम से मशहूर थे। दरअसल, तीन नंबर विधानसभा क्षेत्र में उस समय गंभीर जल संकट रहता था। जोशी टैंकरों के माध्यम से वार्डों में पानी बंटवाते थे, जिससे उनकी यह पहचान बनी। इसके अलावा, 15 अगस्त को राजवाड़ा पर स्वतंत्रता दिवस के जश्न को धूमधाम से मनाने की शुरुआत भी उन्होंने ही की थी।
पार्षद गोलीकांड में बने आरोपी, पर हो गए बरी
कांग्रेस के पूर्व पार्षद मुन्ना अंसारी और अश्विनी जोशी के बीच लंबे समय से राजनीतिक रंजिश रही थी। वर्ष 2006 में सुयश अस्पताल के पास अंसारी गोली लगने से घायल हो गए थे। उन्होंने तब पूर्व विधायक जोशी पर गोली चलाने का आरोप लगाया था। हालांकि, पुलिस यह साबित नहीं कर पाई कि उन्होंने गोली चलाई थी। उनके पास से कोई हथियार भी जब्त नहीं हुआ था। इस मामले में 50 से अधिक पेज के फैसले में अदालत ने 18 साल बाद 2024 में अश्विनी जोशी को हत्या के प्रयास के आरोप से बरी कर दिया था। मामले में जोशी सहित चार आरोपी थे, और बरी होने का मुख्य आधार हथियार व गोली जब्त न होना था।