इंदौर जल संकट के बीच बड़ा सवाल ,❝ ट्रेजर टाउनशिप की 5 लाख लीटर जल संरचना आखिर बंद क्यों...? ❞

एक तरफ पूरा इंदौर भीषण जल संकट से जूझ रहा है।शहर के हजारों बोरिंग सूख चुके हैं, कई क्षेत्रों में टैंकरों से पानी सप्लाई हो रही है, नगर निगम लगातार आपात बैठकें कर रहा है तथा जनप्रतिनिधि स्वयं जल संकट पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

इंदौर जल संकट के बीच बड़ा सवाल ,❝ ट्रेजर टाउनशिप की 5 लाख लीटर जल संरचना आखिर बंद क्यों...? ❞

द एक्सपोज़ लाइव न्यूज़ नेटवर्क इंदौर 

नीरज द्विवेदी (9993949000)

लेकिन दूसरी तरफ ट्रेजर टाउनशिप से जुड़े गंभीर आरोप विभागीय कार्यप्रणाली एवं बिल्डर की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।

रहवासियों के अनुसार करोड़ों रुपये लेकर विकसित की गई इस टाउनशिप में मूलभूत पेयजल संरचना तक सुरक्षित नहीं रखी गई। आरोप है कि लगभग 5 लाख लीटर क्षमता का सम्पवेल / विशाल जल स्टोरेज सिस्टम, जो स्वीकृत डेवलपमेंट परमिशन एवं जारी कंप्लीशन सर्टिफिकेट के अनुसार कॉलोनी की भूमि पर निर्मित किया जाना था, उसे नियमविरुद्ध तरीके से अन्य खसरे की भूमि पर निर्मित कर दिया गया तथा वास्तविक स्थिति का समुचित स्थल सत्यापन किए बिना ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया।

बंद पड़ा सम्प वेल 

बताया जा रहा है कि शिकायतों के बाद कार्यवाही प्रारंभ हुई, परंतु इसके बावजूद उसी अन्य खसरे की भूमि पर कथित रूप से झूठे शपथ पत्र के आधार पर नई कॉलोनी का नक्शा भी स्वीकृत करवा लिया गया। रहवासियों का आरोप है कि आपत्तियों एवं वास्तविक तथ्यों को दरकिनार करते हुए अनुमति प्रदान की गई।

स्थिति और भी चिंताजनक तब हो गई जब नई कॉलोनी के हित में सुनियोजित तरीके से उक्त 5 लाख लीटर की मूलभूत जल संरचना / सम्पवेल को बंद कर दिया गया। जिस संरचना से हजारों लोगों को राहत मिल सकती थी, वह आज निष्क्रिय पड़ी है जबकि रहवासी गंभीर जल संकट झेल रहे हैं।

आज हालात यह हैं कि :

  • टाउनशिप के कई बोरिंग सूख चुके हैं
  • रहवासी महंगे निजी टैंकर खरीदने को मजबूर हैं
  • नर्मदा कनेक्शन एवं सुविधाओं के नाम पर करोड़ों रुपये लिए जाने के बावजूद पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं हो पा रहा

विभागीय अधिकारियों से संयुक्त स्थल निरीक्षण की लगातार मांग के बावजूद अब तक प्रभावी निरीक्षण नहीं हुआ

सबसे बड़ा सवाल :

जब नगर निगम द्वारा उक्त जल संरचना / टंकी को पुनः व्यवस्थित अथवा निर्मित करने के आदेश दिए जा चुके हैं, तो आज दिनांक तक उनका पालन क्यों नहीं हुआ...?

आदेश केवल कागजों तक सीमित क्यों हैं...?

बिल्डर पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई...?

हजारों रहवासियों को उनका मूलभूत जल अधिकार कब मिलेगा...?

माननीय सर्वोच्च न्यायालय विभिन्न निर्णयों में स्पष्ट कर चुका है कि —

“पानी जीवन हेतु मूलभूत आवश्यकता है तथा यह संविधान के अनुच्छेद 21 अंतर्गत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है।”

इसी प्रकार National Green Tribunal एवं विभिन्न उच्च न्यायालय यह सिद्धांत स्थापित कर चुके हैं कि जल संरचनाएँ एवं जल संसाधन “Public Trust” हैं, जिन्हें समाप्त, बाधित अथवा निजी लाभ हेतु निष्क्रिय नहीं किया जा सकता।

ऐसी स्थिति में स्वीकृत जल संरचना को बंद किया जाना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि रहवासियों के स्वास्थ्य, जीवन एवं मौलिक अधिकारों से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय बन जाता है।

यदि भविष्य में पानी के अभाव के कारण कोई गंभीर स्वास्थ्य, सुरक्षा अथवा जनसंकट उत्पन्न होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा...?

“एक तरफ पूरा शहर पानी बचाने की अपील कर रहा है,

दूसरी तरफ तैयार मूलभूत जल संरचना को ही बंद रखा गया है। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि हजारों रहवासियों के साथ गंभीर अन्याय है।”

हम लगातार वहां के रहवासियों की समस्या को प्रकाशित कर रहे हैं और जल्द ही बिल्डर पर कार्यवाही के बात भी अब सामने आने लगी हे।