सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित 15 करोड़ के भूखंड को हड़पने के लिए कॉलोनाइजर खेल रहा ग्रीड शिफ्टिंग का खेल ,MPEB की भूमिका पर गंभीर सवाल
मामला बिजलपुर स्थित ट्रेज़र टाउन से सम्बंधित , बिल्डर को साफ निर्देश – “मामला स्पष्ट होने तक एक इंच भी शिफ्टिंग नहीं”,लेकिन म.प्र विधुत मंडल ने CM हेल्पलाइन को अब किया गुमराह और बिल्डर को ग्रिड शिफ्ट करने के दी गुपचुप इज़ाज़त ,बिल्डर द्वारा 15 करोड़ के सार्वजानिक उपयोग हेतु आरक्षित भूखंड को हड़पने के लिए रचा जा रहा चक्रव्यूह ,उच्च न्यायलय में जवाब दिया ग्रिड का हैंडओवर MPEB को दिया वर्ष 2022 में कॉलोनी का रहवासी संघ को 2023 में ,2024 में बिना अधिकार बिल्डर ने ग्रिड शिफ्टिंग का दिया आवेदन और विभाग ने किया स्वीकृत ,पहले दी अनुमति फिर शिकायत के बाद लगाई रोक ,अब गुपचुप तरीके से उसी रुके आदेश का हवाला देकर गुपचुप अनुमति ,एक्सपोज़ लाइव पहले ही कर चूका था आगाह ,अभी हाल ही में "ट्रेज़र प्राइम" में भी रहवासियों ने बिल्डर की खिलाफ खोला था मोर्चा
द एक्सपोज़ लाइव न्यूज़ नेटवर्क
इंदौर। शहर के बिजलपुर क्षेत्र स्थित ट्रेजर टाउन में प्रस्तावित 33/11 के.वी. ग्रिड शिफ्टिंग को लेकर अब मामला और गर्मा गया है। जिस मुद्दे को लेकर हमारे समाचार पत्र ने पहले ही “MPEB में बड़े घोटाले की तैयारी” शीर्षक से खुलासा किया था, उसी संदर्भ में म.प्र.प.क्षे.वि.वि.कं.लि., इंदौर (दक्षिण शहर संभाग) के कार्यालय से जनवरी 2025 में बिल्डर को स्पष्ट चेतावनी जारी कर दी गई थी और शिफ्टिंग तथ्यों के निराकरण तक काम रुकवाने का आदेश भी दिया था ,अभी तक तथ्यों का निराकरण किये बिना अब बिल्डर को गुपचुप शिफ्टिंग की अनुमति दे दी गयी ,जब शिकायत CM हेल्पलाइन पर पहुंची ,अधिकारीयों ने वहां भी कर दिया गुमराह और पुरानी ( 2024 ) स्वीकृति के अनुरूप कार्य किये जाने का दे दिया हवाला ।
पत्र क्रमांक और संदर्भ क्या कहते हैं?


पूर्व पत्र जिसके तहत ग्रिड शिफ्ट करने का आदेश दिया गया था और उसी आदेश पर शिकायत की गयी जिसमे कहा गया की ग्रिड सही जगह बनी हे और इसका प्रमाण नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा स्वीकृत नक्शा हे अतः ग्रिड शिफ्टिंग के पीछे 15 करोड़ के भूखंड में गोलमल की मंशा हे ,इसके बाद 2025 में नया आदेश निकाला गया : (कार्यपालन यंत्री कार्यालय पत्र क्रमांक 3929 दिनांक 19/11/2024, ई.आर.पी. प्राक्कलन क्रमांक 415663 दिनांक 23/09/2024 एवं कार्यादेश क्रमांक 1163 दिनांक 14/11/2024) जिसमे :
विभाग ने बिल्डर को निर्देशित किया है कि—
- प्रस्तावित स्थल के स्वीकृत नक्शे एवं वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं।
- स्पष्ट किया जाए कि वर्तमान में ग्रिड किस खसरे पर स्थापित है और प्रस्तावित स्थल की वैधानिक स्थिति क्या है।
- अगली कार्रवाई तक किसी भी प्रकार की शिफ्टिंग गतिविधि न की जाए, अन्यथा न्यायोचित कार्यवाही की जाएगी।
यह आदेश सीधे तौर पर उस आशंका को बल देता है, जिसे लेकर पहले से सवाल उठ रहे थे कि लगभग 15 करोड़ की सार्वजानिक पार्किंग की जमीन को निजी लाभ के लिए उपयोग में लाने की तैयारी की जा रही है।
सहायक यंत्री (द.श.सं.) कार्यालय से जारी पत्र क्रमांक 596/उ.ता.सु/द.श.सं./इंदौर/2024-25, दिनांक 01/01/2025 में साफ शब्दों में कहा गया है कि 33/11 के.वी. सबस्टेशन स्थल से 33 के.वी. वी.सी.बी. शिफ्ट करने के संबंध में,पत्र में उल्लेख है कि शिकायतकर्ता (ट्रेजर टाउन, बिजलपुर) द्वारा लगातार शिकायतें दर्ज कराई गई हैं कि जिस भूमि पर ग्रिड स्थानांतरित किया जाना प्रस्तावित है, वह भूमि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा अन्य उपयोग हेतु चिन्हित है,अतः मामले का निराकरण न होने तक कोई भी कार्य नहीं किया जाए अन्यथा कानूनी कार्यवाही की जाएगी ।
पहले उठे थे ये सवाल
हमारे पूर्व प्रकाशित समाचार में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था कि—
क्या सार्वजानिक पार्किंग की ज़मीन बिल्डर को सौंपने की तैयारी थी?
क्या विभागीय मिलीभगत से ग्रिड शिफ्टिंग का खेल रचा जा रहा था?
लोकायुक्त जांच की मांग क्यों उठी?
अब विभागीय पत्र और CM हेल्पलाइन में दिए गए स्पष्टीकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मामला गंभीर है और शिकायतों को आधार मानकर कार्रवाई पहले रोकी गई और अब गुपचुप तरीके से पुनः शिफ्टिंग का आदेश दे दिए गए ।
बिल्डर पर बढ़ा दबाव
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित स्थल पर निर्माण गतिविधियां पहले से ही जारी थीं और ग्रिड शिफ्टिंग के बाद बहुमंजिला निर्माण का रास्ता साफ होने की संभावना थी।
अब आगे क्या?
- क्या इस मामले की जांच लोकायुक्त तक जाएगी?
- क्या 15 करोड़ की जमीन का वास्तविक उपयोग सार्वजनिक हित में होगा?
- या फिर दबाव में मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
फिलहाल इतना तय है कि विभाग के आधिकारिक पत्र और CM हेल्पलाइन में तथ्यों के विपरीत जवाब ने पूरे मामले में नया मोड़ ला दिया है।
अब नजर इस बात पर है कि बिल्डर दस्तावेज प्रस्तुत करता है या विभाग सख्त कार्रवाई करता है , और क्या ग्रिड गैरकानूनी तरीके से शिफ्ट कर 15 करोड़ का अनुचित लाभ बिल्डर कमाने में कामयाब हो जाता हे ।
क्या कहना हे ज़िम्मेदारों का :
" वर्ष 2024 में यह कार्य स्वीकृत था लेकिन बाद में शिकायतों के बाद इस पर रोक लगा दी गयी थी जो यथावत हे.जहाँ तक ग्रिड शिफ्टिंग कार्य शुरू होने के बात हे ,इसकी अनुमति विभाग द्वारा नहीं दी गयी हे और न ही किसी अधिकृत व्यक्ति द्वारा हमसे मांगी गयी हे ,अगर कोई अवैधानिक निर्माण बिना अनुमति के किया जा रहा हे तो वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। " राकेश जोहर ( कार्यपालन यंत्री -म.प्र विधुत मंडल छावनी -इंदौर )
