सिंहस्थ 2028 के लिए भूमि अधिग्रहण पर चिंतामणि मालवीय का विरोध: किसानों के हित में उठाई आवाज

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। इस बीच, आलोट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक चिंतामणि मालवीय ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इस भूमि अधिग्रहण को 'किसान विरोधी' करार दिया है। वहीँ अधिकारीयों पर ऐसी सलाह देने को भी आड़े हाथों लिया ,उन्होंने विधानसभा में अधिकारीयों को अपरिपक्व भी करार दिया ,उनका कहना था सिंहस्त साधु संतों का पर्व हे जो दुनियादारी का त्याग कर भगवान की उपासना में अपना जीवन व्यतीत करते हैं ,उनकी सुरक्षा और सुविधा हमारा धर्म हे ,उनका पूरा जीवन जगलों और कच्चे आश्रमों में ही वे व्यतीत करते हैं ,ऐसे में बिना उनकी मांग के पक्के निर्माण करना वो भी लिए उचित नहीं हे ,सिंहस्थ के बाद इसी भूमि का उपयोग भूमाफियों द्वारा किया जायेगा और किसानों से उनका रोज़गार भी छीन लिया जायेगा

सिंहस्थ 2028 के लिए भूमि अधिग्रहण पर चिंतामणि मालवीय का विरोध: किसानों के हित में उठाई आवाज

द एक्सपोज़ लाइव न्यूज़ नेटवर्क इंदौर 

विधायक मालवीय का कहना है कि सिंहस्थ जैसे आयोजनों के लिए अस्थायी भूमि अधिग्रहण पर्याप्त है, लेकिन सरकार स्थायी अधिग्रहण की योजना बना रही है, जो किसानों के हित में नहीं है। उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। 

वहीँ किसानों का मानना है कि भूमि अधिग्रहण से उनकी आजीविका पर संकट आ जाएगा। वे अपनी जमीन स्थायी रूप से नहीं देना चाहते, क्योंकि इससे उनकी रोजी-रोटी प्रभावित होगी। पहले भी किसानों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं और शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी किया है,इस पुरे प्रकरण से कहीं न कहीं अंतर्द्वंद की कहानी भी बहार निकल कर आ रही हे । 

प्रशासन सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी सुविधाएं, जैसे सड़क, बिजली, पानी और नालियां विकसित करना चाहता है, ताकि भविष्य में आयोजनों के दौरान सुविधाएं बेहतर हों। उनका कहना है कि भूमि अधिग्रहण के बाद बची हुई जमीन किसानों को वापस कर दी जाएगी, जिससे उनकी असुविधा न हो। 

साधु-संतों का भी अधूरा समर्थन:

साधु-संतों ने प्रशासन की इस योजना का समर्थन तो किया है। उनका मानना है कि स्थायी सुविधाओं से सिंहस्थ का आयोजन हरिद्वार कुंभ की तरह भव्य और सुरक्षित होगा। साथ ही उन्होंने किसानों की चिंताओं का समाधान करने की भी अपील की है। 

प्रदेश के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय ने नसीहत देते हुए अपने आपको इस विवाद से लगभग अलग ही रख लिया हे ,उन्होंने यह कहा की मामला उज्जैन का हे और मुख्यमंत्री भी उज्जैन के हैं ,सही होगा सभी पक्ष आपस में बात कर मामले का समाधान निकालें !  

विधायक चिंतामणि मालवीय का यह कदम किसानों के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार को चाहिए कि वह किसानों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए  स्थाई भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया  को अस्थाई और परंपरागत पद्धति से करें जो वर्षों पूर्व से सिंहस्थ के लिए की जा रहीं हैं क ताकि उनकी आजीविका सुरक्षित रहे, और बाबा महाकाल के आस पास की प्राकृतिक व्यवस्था अपने मूल स्वरूप में बनी रहे,और सिंहस्थ 2028 का आयोजन भी सफलतापूर्वक हो सके।