मूलभूत सुविधाओं की मार, फिर भी मुस्कान बरकरार: महालक्ष्मी नगर में धैर्य की पतंगों के साथ मकर संक्रांति का जश्न
भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले महालक्ष्मी नगर की हकीकत आज किसी से छुपी नहीं है। एक ओर यह इलाका शहर के नामचीन बिल्डरों और व्यावसायिक निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है,
द एक्सपोज़ लाइव न्यूज नेटवर्क | इंदौर
वहीं दूसरी ओर यहां के स्थायी निवासी बिजली, पानी, सड़क और यातायात जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। विडंबना यह है कि समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता लगातार घटती दिखाई दे रही है। इसके बावजूद, महालक्ष्मी नगर के लोगों ने धैर्य, एकजुटता और सकारात्मक सोच की ऐसी मिसाल पेश की, जो आज पूरे शहर के लिए संदेश बन गई।
रविवार को महालक्ष्मी नगर के सेक्टर MR-5—जो अब भी पूरी तरह रिहायशी क्षेत्र के रूप में बचा हुआ है—के रहवासियों ने तमाम परेशानियों को एक ओर रखकर मकर संक्रांति का पारंपरिक उल्लास के साथ आयोजन किया। गंदा पानी, टूटी सड़कें, बार-बार बिजली गुल होना, वोल्टेज फ्लक्चुएशन, ट्रैफिक जाम और अवैध पार्किंग जैसी रोजमर्रा की मुसीबतों के बीच बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में ऐसा जोश दिखा, मानो यह उत्सव सिर्फ पर्व नहीं बल्कि प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ एक शांत लेकिन सशक्त संदेश हो।
उत्सव के दौरान सितोलिया ,रेस, चेयर रेस, अंताक्षरी और पारंपरिक खेलों ने माहौल को जीवंत कर दिया। खेल के दौरान कुछ लोग गिरे, कुछ को हल्की खरोंच भी आई, लेकिन किसी के चेहरे से मुस्कान नहीं हटी। एक बुजुर्ग रहवासी ने व्यंग्य करते हुए कहा, “जब रोज़ हम मूलभूत सुविधाओं की कमी से गिरते-पड़ते हैं, तो खेल में लगी खरोंच से क्या फर्क पड़ता है?” यह कथन महालक्ष्मी नगर के लोगों के धैर्य और जुझारूपन को बखूबी बयान करता है।
दरअसल, इस कॉलोनी की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि इसे पूरी तरह व्यावसायिक प्रयोगशाला बना दिया गया है ,इतना ही नहीं बहार से आये युवक युवतियों की पहली पसंद और अवैध कैफे के जाल ने यहाँ का सांस्कृतिक माहौल भी ध्वस्त कर रखा हे ,आधुनिक नशे से घिरे ये नौजवान अश्लील कपड़ों में अश्लील हरकतें खुलेआम करते अक्सर दीख जाया करते हैं । रिहायशी क्षेत्र में अवैध हॉस्टल और होटल तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनके कारण जल संकट, पार्किंग अव्यवस्था और ट्रैफिक जाम आम बात हो चुकी है। आउटर सर्विस रोड पर अवैध पार्किंग और अनधिकृत बैठकों ने हालात और बदतर कर दिए हैं। रहवासियों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो पुलिस प्रशासन और न ही जिला प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से हर स्तर पर शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन प्रशासन तब तक आंखें मूंदे रहता है जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए। भागीरथपुरा जैसे हादसों से सबक लेने के बजाय, यहां “सब ठीक है” का भ्रम बनाए रखा गया है। सौभाग्यवश अब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन क्या प्रशासन किसी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
मकर संक्रांति का यह आयोजन सिर्फ एक पर्व नहीं था, बल्कि यह बताने का प्रयास था कि महालक्ष्मी नगर के लोग समस्याओं से हार मानने वाले नहीं हैं। उन्होंने यह जता दिया कि अगर व्यवस्था बीमार हो जाए और इलाज न मिले, तो वे बीमारी के साथ जीना तो सीख लेंगे, लेकिन अपनी सामाजिक एकता, संस्कृति और उत्सवों को मरने नहीं देंगे। यह धैर्य आज तारीफ के काबिल है, लेकिन सवाल यह है—कब तक?