खजराना में फिर सक्रिय भूमाफिया!

सर्वे नंबर 1121 पर रातों-रात सड़क और ड्रेनेज लाइन, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

खजराना में फिर सक्रिय भूमाफिया!

द एक्सपोज़ लाइव न्यूज़ नेटवर्क इंदौर 

पिछली सरकार के कार्यकाल में भूमाफियाओं पर चली सख्त कार्रवाई के बाद कुछ समय तक शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी जमीनों पर कब्जों पर लगाम लगी थी। लेकिन अब हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौटते दिखाई दे रहे हैं। ताजा मामला खजराना गांव के शासकीय सर्वे नंबर 1121 का है, जहां सूत्रों के मुताबिक भूमाफियाओं ने रातों-रात सड़क निर्माण और ड्रेनेज लाइन डालकर सरकारी जमीन पर कब्जे की नींव रख दी है।

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इस पूरे खेल के पीछे वही गिरोह सक्रिय है, जिसने पहले इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना RE -2 से लगी और योजना में शामिल शासकीय भूमियों पर अवैध पटेल नगर कॉलोनी बसाई थी। हैरानी की बात यह है कि वर्षों पूर्व प्रशासन द्वारा उक्त क्षेत्र को रिक्त कब्जे में लेने की कार्रवाई की गई थी, लेकिन आज वहां रोज नए मकान खड़े हो रहे हैं। सवाल उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध निर्माण दोबारा फल-फूल रहा है? कलेक्टर टी इल्लैया राजा द्वारा भूमाफिआ का आलिशान फार्म हाउस भी ध्वस्त कर दिया गया था लेकिन अब वहां मैरिज गार्डन संचालित होने लगा हे। 

कुछ समय पहले कलेक्टर शिवम वर्मा ने लापरवाही और संदिग्ध कार्यशैली के आरोपों के चलते एक तहसीलदार और पटवारी को बतौर सजा भू-अभिलेख शाखा में अटैच कर दिया था। लेकिन क्षेत्र में हालात देखकर प्रतीत होता है कि कागजों में हेराफेरी और जमीनों की बंदरबांट का खेल बंद नहीं हुआ है। खजराना और कनाड़िया तहसील क्षेत्र में कई शासकीय जमीनें वर्षों से खाली पड़ी हैं, जो अब फिर से भूमाफियाओं की नजर में आ गई हैं।

इसी सर्वे नंबर 1121 के पास हाल ही में एक और विवाद सामने आया था, जहां वर्षों से निवास कर रहे एक व्यक्ति के मकान को बिना पूर्ण कानूनी प्रक्रिया अपनाए ध्वस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई से बड़ा विवाद खड़ा हुआ, लेकिन पुलिस ने मामूली धाराओं में प्रकरण दर्ज कर मामले की इतिश्री कर ली। इससे भूमाफियाओं के हौसले और बुलंद हो गए।

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण के पीछे इस्लाम शफी पटेल नामक व्यक्ति की भूमिका बताई जा रही है, जिस पर पहले से कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। उस पर अतीत में जिला बदर की कार्रवाई भी हो चुकी है। बावजूद इसके, यदि वही व्यक्ति फिर से सरकारी जमीनों पर कब्जे के खेल में सक्रिय है, तो यह प्रशासनिक तंत्र की गंभीर विफलता मानी जाएगी।

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि जिन अधिकारियों के कार्यकाल में क्षेत्र में अवैध कब्जे बढ़े, उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद जमीन पर स्थिति नहीं बदली। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पटवारी और तहसील स्तर पर मिलीभगत के बिना सरकारी सर्वे नंबर पर सड़क और ड्रेनेज लाइन डालना संभव ही नहीं है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन फिर से बुलडोजर चलाएगा या इस बार भी मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा? खजराना का सर्वे नंबर 1121 केवल एक जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति की परीक्षा बन चुका है। यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो शहर की अन्य शासकीय जमीनें भी भूमाफियाओं के निशाने पर आ सकती हैं।