अब इंदौर में 1000 करोड़ का स्पोर्ट्स पार्क: अहम सवाल यह कि पैसा कहां से आएगा?

इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) ने सुपर कॉरिडोर की स्कीम 151 और 169-बी में 1000 करोड़ रुपये के मल्टीपर्पस स्पोर्ट्स पार्क की घोषणा की है। ट्रांजेक्शन एडवाइजर के चयन के बाद परियोजना की फिजिबिलिटी और वित्तीय मॉडलिंग की प्रक्रिया शुरू होगी। लेकिन अभी तक कोई निवेशक नहीं मिला और निर्माण कार्य भी शुरू नहीं हुआ, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह प्रोजेक्ट भी सिर्फ घोषणा बनकर रह जाएगा।

अब इंदौर में 1000 करोड़ का स्पोर्ट्स पार्क: अहम सवाल यह कि पैसा कहां से आएगा?
Proposed Site TCS Square

आईडीए की नई उड़ान, ड्रीम प्रोजेक्ट के नाम पर नई दुकान खोली, लेकिन जमीनी हकीकत जीरो

अब तक किसी ने निवेशक ने रुचि भी नहीं दिखाई, जबकि 15 साल पुरानी है स्पोर्ट हब की स्कीम

द एक्सपोज लाइव न्यूज नेटवर्क, इंदौर। 

इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) ने सुपर कॉरिडोर की स्कीम नंबर 151 और 169-बी में करीब 1000 करोड़ रुपये की लागत से मल्टीपर्पस स्पोर्ट्स पार्क बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए प्राधिकरण ने हाल ही में कंसल्टेंट-कम-ट्रांजेक्शन एडवाइजर (टीए) चुनने के लिए टेंडर जारी किया है। यह सलाहकार परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता, डिजाइन, बोली प्रक्रिया और निजी डेवलपर के चयन तक का पूरा खाका तैयार करेगा।

पर असली सवाल यही है कि — इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए पैसा कहां से आएगा? क्या यह भी उन योजनाओं की तरह कागज़ों में सीमित रह जाएगा जिनकी घोषणाएं तो हो चुकीं, लेकिन काम अब तक शुरू नहीं हुआ? आईडीए के अनुसार स्पोर्ट्स पार्क 82,588 वर्गमीटर (करीब 20 एकड़) जमीन पर बनेगा। यह सुपर कॉरिडोर की स्कीम 151 और 169 सेक्टर-बी में प्रस्तावित है। योजना के मुताबिक यहां अत्याधुनिक खेल सुविधाएं, मनोरंजन स्थल और सामुदायिक गतिविधियों के लिए स्थान तैयार किए जाएंगे ताकि शहर में खेल संस्कृति को बढ़ावा दिया जा सके। फिलहाल आईडीए ट्रांसिक्शन एडवाइजर यानी कंसल्टेंट नियुक्त करने जा रहा है। चुना गया सलाहकार प्राधिकरण की मदद करेगा ताकि परियोजना को वित्तीय रूप से टिकाऊ और निजी निवेश आकर्षित करने योग्य बनाया जा सके। इसके लिए क्वालिटी एंड कॉस्ट-बेस्ड सेलेक्शन (QCBS) मॉडल अपनाया गया है। टीए का काम तकनीकी सर्वे, बाजार अध्ययन, राजस्व संभावनाओं का आकलन, और पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) संरचना तैयार करना होगा।

कंसल्टेंट तो ले ही जाएगा फीस

कंसल्टेंट-कम-ट्रांजैक्शन एडवाइजर का काम सिर्फ तकनीकी रिपोर्ट बनाना नहीं होगा। उसे बाजार का अध्ययन, राजस्व संभावनाएं, वित्तीय मॉडलिंग, प्रोजेक्ट आईआरआर (Internal Rate of Return) जैसे विस्तृत आर्थिक पहलुओं का आकलन करना होगा। माना जा रहा है कि 1 फीसदी भी फीस लेता है तो कम से कम 10 करोड़ तो वो ले ही जाएगा। सवाल ये कि कंसल्टेंट की जेब तो भर जाएगी, IDA की जेब से जनता का पैसा निकलेगा! क्या ये सिर्फ रिपोर्ट्स बनाने का बहाना है? पहले भी ऐसे 'एडवाइजर्स' लाखों कमाकर चले गए, प्रोजेक्ट वही के वही!

टीए को यह सुनिश्चित करना होगा कि परियोजना निजी निवेश के लिए आकर्षक हो और आईडीए के लिए मूल्यवान सिद्ध हो — लेकिन यही वह चरण है जहां अक्सर परियोजनाएं अटक जाती हैं। डीपीआर और फाइनेंशियल मॉडल तैयार हो जाते हैं, पर फिर न बोली आती है, न निवेशक।

1000 करोड़ जुटाना चुनौतीपूर्ण

आईडीए के अनुसार इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 1000 करोड़ रुपये है। इतने बड़े निवेश का बोझ अकेले आईडीए उठा नहीं सकता, इसलिए इसे पीपीपी मॉडल पर विकसित करने की बात की जा रही है। इस मॉडल के तहत निजी डेवलपर पूंजी लगाएगा और उसे टिकटिंग, इवेंट, विज्ञापन, रेंटल स्पेस व अन्य माध्यमों से राजस्व अर्जित करने का अधिकार मिलेगा।

फिर भी, सवाल यही है कि निजी क्षेत्र ऐसे निवेश में कितनी रुचि दिखाएगा, जब इंदौर जैसे शहर में स्टेडियमों से प्रत्यक्ष राजस्व की संभावनाएं सीमित हैं। अभी तक इस संबंध में किसी निवेशक की औपचारिक दिलचस्पी सामने नहीं आई है। यानी आईडीए के पास किसी निवेशक की प्रारंभिक सहमति तक नहीं है और इतना बड़ा सपना दिखना शुरू कर दिया।

फंडिंग के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं

आईडीए की वित्तीय स्थिति देखें तो इस वर्ष के लिए उसने लगभग 978 करोड़ रुपये की आय लक्ष्य निर्धारित की है, जो मुख्यतः जमीन, फ्लैट और दुकानें बेचकर हासिल की जानी है। हाल ही की बोर्ड बैठक में ₹261 करोड़ के राजस्व लक्ष्य के लिए भी संपत्तियों की बिक्री को मंज़ूरी दी गई।

यानी स्पोर्ट्स पार्क की लागत तो आईडीए की वार्षिक आय से भी अधिक है। ऐसे में या तो सरकार को अनुदान देना होगा, या फिर निजी डेवलपर से बड़ी राशि निवेश के रूप में आनी होगी। लेकिन पीपीपी मॉडल के पिछले अनुभव बताते हैं कि ऐसे प्रोजेक्ट अक्सर वित्त के अभाव में लटक जाते हैं।

चार साल से घोषणा पर चल रहा काम 

स्पोर्ट्स पार्क का विचार नया नहीं है। 2021 में भी आईडीए बोर्ड ने सुपर कॉरिडोर पर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने का प्रस्ताव पारित किया था। तब बताया गया था कि स्कीम 151 और 169-बी की जमीन पर लगभग 13 हेक्टेयर क्षेत्र में क्रिकेट, बैडमिंटन, टेबल टेनिस जैसे खेलों की सुविधाएं दी जाएंगी। 

इसके बाद कई बार बोर्ड बैठकों में परियोजना का ज़िक्र हुआ, और साथ ही स्टार्टअप पार्क और कन्वेंशन सेंटर जैसे प्रोजेक्ट्स को भी इसी पीपीपी मॉडल में शामिल करने की बात कही गई। परंतु तीन साल बीत चुके हैं और अब तक जमीन पर कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

क्या यह भी हवाई सपना ही रह जाएगा?

इंदौर शहर में विकास के कई बड़े सपने देखे गए — स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स, नया कन्वेंशन सेंटर, डबल डेकर बसें — पर कई अब तक पूरा रूप नहीं ले पाए। अब स्पोर्ट्स पार्क का ऐलान फिर एक नया जोश लाता है, पर वास्तविकता यह है कि बिना स्पष्ट फंडिंग ब्लूप्रिंट के यह परियोजना भी महज घोषणा बन सकती है।

फिलहाल आईडीए का कहना है कि ट्रांजैक्शन एडवाइजर के चयन के बाद फिजिबिलिटी रिपोर्ट के आधार पर अगला कदम उठाया जाएगा। लेकिन सवाल यही है — क्या यह स्पोर्ट्स सिटी वास्तव में धरातल पर उतरेगी, या एक और ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ की सूची में शामिल हो जाएगी?

इंदौर की “हवाई घोषणाएं”

प्रोजेक्ट क्या कहा गया अब तक की स्थिति मुख्य अड़चनें
1️⃣ स्टार्टअप पार्क / Startup-cum-IT पार्क (सुपर कॉरिडोर) सुपर कॉरिडोर पर 20–22 एकड़ में मल्टीस्टोरी स्टार्टअप-कम-आईटी पार्क बनाने की घोषणा। करोड़ों का निवेश और टेक्नॉलॉजी/स्टार्टअप हब बनाने का दावा। जमीन चिन्हित, बोर्ड स्तर पर PPP चर्चा हुई, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ भूमि उपयोग में बदलाव में देरी, निवेशकों की कमी, आईडीए और सरकारी विभागों में समन्वय की कमी।
2️⃣ 10,000-सीट का कन्वेंशन सेंटर सुपर कॉरिडोर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का इवेंट/कॉन्फ्रेंस हब बनाने की घोषणा। जमीन विवाद और अनुमति प्रक्रियाओं में उलझने के कारण काम ठप भूमि विवाद, विभागीय मंजूरी में देरी और वित्तीय रूपरेखा का अभाव।
3️⃣ एलिवेटेड कॉरिडोर (Malwa Mill से Bhamori तक) ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए मलवा मिल से भमोरी तक एलिवेटेड कॉरिडोर और फ्लायओवर बनाने की योजना। बार-बार चर्चा हुई, लेकिन निर्माण शुरू नहीं हुआ भारी निर्माण लागत, भूमि अधिग्रहण में देरी, वित्तीय प्रबंधन की कमी।
4️⃣ एरियल रोपवे / केबल-कार (Ropeway Transit) दो प्रमुख रूटों पर 11 किमी लंबी केबल-कार/रोपवे परियोजना की घोषणा। अनुमानित लागत ₹737 करोड़। परियोजना मंत्रालय की मंजूरी और बजट आवंटन का इंतजार कर रही है, निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। केंद्रीय मंजूरी और बजट आवंटन, सुरक्षा कानून, एजेंसी चयन में देरी।