फिर विवादों में इंदौर ट्रेज़र टाउन प्रा लि

बिना STP के दी गई कम्प्लीशन सर्टिफिकेट, बाद में नियम विरुद्ध स्थान पर बनाया प्लांट — पहले ट्रेजर टाउन अब ट्रेजर टाउन प्लेटिनम मामले में निगम की भूमिका पर गंभीर सवाल

फिर विवादों में इंदौर ट्रेज़र टाउन प्रा लि

द एक्सपोज़ लाइव न्यूज़ नेटवर्क इंदौर 

नीरज द्विवेदी (9993949000) 

इंदौर। शहर के ग्राम बिजलपुर, तहसील राऊ स्थित ट्रेजर टाउन प्लेटिनम कॉलोनी में कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी किए जाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्राप्त दस्तावेजों और शिकायतों के आधार पर आरोप लगाया गया है कि कॉलोनी को आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के पूर्ण निर्माण से पहले ही कम्प्लीशन सर्टिफिकेट प्रदान कर दिया गया, जबकि उस समय कॉलोनी में अनिवार्य रूप से स्थापित किया जाने वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) अस्तित्व में ही नहीं था।

जानकारी के अनुसार जब इस विषय में शिकायत की गई तो विभागीय स्तर पर यह तथ्य स्वीकार किया गया कि कॉलोनी में STP का निर्माण नहीं हुआ है। इसके बाद संबंधित बिल्डर को STP निर्माण के निर्देश जारी किए गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिस समय कॉलोनी को कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया गया, उस समय कॉलोनी का आवश्यक बुनियादी ढांचा पूर्ण नहीं था।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बाद में जब STP का निर्माण किया गया तो उसकी स्वीकृत मूल लोकेशन को बदलकर उसे पेयजल टंकी और विद्युत ट्रांसफार्मर के समीप स्थापित कर दिया गया, जो तकनीकी दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और संभावित रूप से खतरनाक स्थिति मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार की व्यवस्था भविष्य में सीवेज और पेयजल के मिश्रण जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न कर सकती है।

मामले को और गंभीर बनाता है नगर निगम के पत्राचार में दर्ज वह तथ्य, जिसमें स्वयं यह स्वीकार किया गया है कि बिल्डर द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र तथ्यात्मक रूप से सही नहीं था तथा कॉलोनी का विकास कार्य पूर्ण नहीं था। इसके बावजूद कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी किए जाने से प्रशासनिक प्रक्रिया और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित बिल्डर की कार्यप्रणाली पहले भी विवादों में रही है। इसी बिल्डर की पूर्व परियोजना ट्रेजर टाउन में भी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इसके अतिरिक्त पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन के मामले में मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा इसी बिल्डर पर लगभग 25 लाख रुपये की दंडात्मक कार्रवाई भी की जा चुकी है, जिसका उल्लेख उच्च न्यायालय में दायर एक प्रकरण के प्रत्युत्तर में भी सामने आया था।

इधर हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में सीवेज और पेयजल के मिश्रण से उत्पन्न हुई त्रासदी ने पूरे शहर को झकझोर दिया था, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी और बड़ी संख्या में लोग गंभीर रूप से बीमार हुए थे। ऐसे में ट्रेजर टाउन प्लेटिनम में STP की वर्तमान स्थिति को लेकर रहवासियों में गहरी चिंता व्याप्त है कि यदि समय रहते इस मामले की तकनीकी जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में यहां भी इसी प्रकार की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह मामला केवल एक कॉलोनी तक सीमित नहीं है बल्कि यह शहरी विकास और जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। यदि अधूरे विकास कार्य और असत्य शपथ पत्र के आधार पर कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं तो इससे भविष्य में शहर के अन्य प्रोजेक्ट्स में भी ऐसी अनियमितताओं को बढ़ावा मिल सकता है।

रहवासियों और शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी एवं प्रशासनिक जांच कराए जाने की मांग की है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि गलत जानकारी या असत्य शपथ पत्र के आधार पर अनुमति प्राप्त की गई है अथवा विभागीय स्तर पर लापरवाही बरती गई है, तो उसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए।

रहवासियों का कहना है कि भागीरथपुरा जैसी दुखद घटनाओं से सबक लेते हुए प्रशासन को इस प्रकार के मामलों में समय रहते गंभीरता से हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि भविष्य में शहर के नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा कोई बड़ा संकट उत्पन्न न हो।