हाईकोर्ट बोला – मास्टर प्लान खत्म, इंदौर में अफसर बोले – नोटिस जारी रहेंगे!

हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार कर रहे अधिकारी, जनता में नाराज़गी,जिस दलील को प्रशासन द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत किया गया उस दलील को अदालत ने तथ्यहीन मान 2021 के मास्टर प्लान को खत्म माना ,अब अधिकारी जनप्रतिनिधियों ,मीडिया को उसी दलील का हवाला दे कर कर रहे गुमराह इतना ही नहीं उसी आधारहीन दलील को लेकर अपील की भी कर रहे तैयारी ,लेकिन नवीन मास्टर प्लान के बारे में अभी भी ढुलमुल रवैया अपनाया जा रहा,जबकि इसी कारण लगभग 37 हज़ार हेक्ट भूमियां शहर में ब्लॉक पड़ी हे ,ये बात अलग हे की 900 से अधिक नई मंजूरियां नगर तथा ग्राम विभाग 2021 को आधार मान अभी तक दे चूका हे। बेतरतीब विकास ,मुलभुत सुविधाओं के अभाव के साथ जहाँ भूमि सम्बन्धी विवाद भी इसी कारण बढे हैं और निवेश पर भी सीधा असर पढ़ रहा हे।

हाईकोर्ट बोला – मास्टर प्लान खत्म, इंदौर में अफसर बोले – नोटिस जारी रहेंगे!

द एक्सपोज़ लाइव न्यूज़ नेटवर्क इंदौर 

नीरज द्विवेदी (9993949000 )इंदौर।

शहर में सड़क चौड़ीकरण और कथित अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय इंदौर खंडपीठ ने अपने हालिया आदेश में स्पष्ट किया है कि इंदौर डेवलपमेंट प्लान-2021 (मास्टर प्लान) अपनी अवधि पूरी कर चुका है और इसके बाद नया मास्टर प्लान अभी लागू नहीं हुआ है। इसके बावजूद शहर में 2021 के मास्टर प्लान के आधार पर कार्रवाई जारी है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। मामले की सुनवाई के दौरान प्रशासन द्वारा दलील पेश की गयी की भले ही मास्टर प्लान की अवधी समाप्त हो चुकी हे लेकिन उसके प्रावधान आज भी लागु हैं ,इस पर अदालत ने ( saving clause ) सम्बन्धी दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा जो की प्रशासन प्रस्तुत नहीं कर सका ,अन्ततः अदालत ने तल्ख़ टिपण्णी कर मास्टर प्लान को खत्म माना और स्पष्ट किया की 31 मार्च 2021 के बाद प्रावधान अब लागु नहीं रह सकते ,इसके बावजूद अधिकारी जनप्रतिनिधियों से लगाकर मीडिया तक को यही दलील अब भी दे रहे हैं और अब अपील की बातें भी सामने आ रही हे। 

उच्च न्यायालय के 5 फरवरी 2026 के आदेश में कहा गया है कि इंदौर डेवलपमेंट प्लान-2021 वर्ष 2008 से लागू होकर 31 मार्च 2021 को समाप्त हो चुका है और इसके बाद ऐसा कोई प्रावधान नहीं दिखाया गया जिससे यह सिद्ध हो सके कि योजना समाप्त होने के बाद भी उसकी धाराएं लागू रह सकती हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि योजना की अवधि के दौरान ही प्रस्तावित बस स्टैंड या पिकअप स्टेशन जैसे प्रोजेक्ट 18 वर्षों में भी धरातल पर नहीं आए, तो केवल उस आधार पर भूमि मालिकों को अनिश्चित काल तक अपनी जमीन के उपयोग से नहीं रोका जा सकता। 

इसके बावजूद शहर में स्थिति बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। आंतरिक सूत्रों के अनुसार नगर निगम और अन्य विभागों द्वारा अभी भी 2021 मास्टर प्लान के आधार पर सड़क निर्माण में बाधक निर्माण हटाने के नोटिस लगातार भेजे जा रहे हैं। " उसमें एक वार्ड ऐसा भी है जिसमें जिस सड़क का नाम केंद्र में रखकर नोटिस दिए जा रहे है वह सड़क इंदौर विकास योजना के दोनों क्षेत्र मध्य क्षेत्र और मध्य क्षेत्र के बाहर वाली प्रस्तावित सड़क में नाम नहीं है लेकिन उस सड़क के नाम से नोटिस धड़ले से बट रहे है  रहवासी जब इस सड़क को विकास योजना में सूचना पत्र में लिखे नाम से देखते हैं तो दिखाई नहीं दे रही है उसके बाद भी कई रहवासियों को चेतावनी दी गई है कि उनके मकान या दुकानों के हिस्से सड़क विस्तार में बाधा हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जब अदालत यह स्पष्ट कर चुकी है कि पुराना मास्टर प्लान समाप्त हो चुका है और नया प्लान अभी लागू नहीं हुआ, तो ऐसी स्थिति में केवल पुराने मास्टर प्लान के आधार पर सड़क निर्माण की कार्रवाई करना कानूनी विवाद को जन्म दे सकता है। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इंदौर शहर के प्रथम नागरिक स्वयं वर्षों तक अतिरिक्त महाधिवक्ता के पद पर रह चुके हैं और कानून की गहरी समझ रखते हैं। इसके बावजूद नगर निगम और अन्य विभागों द्वारा पेश किए जा रहे तथ्यों और व्याख्याओं के कारण जनप्रतिनिधियों तक भी आधी-अधूरी जानकारी पहुंचने की चर्चा शहर में हो रही है।

सूत्र बताते हैं कि अब प्रशासनिक स्तर पर इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील या आगे की कानूनी रणनीति पर भी विचार किया जा रहा है। लेकिन तब तक शहर के कई इलाकों में रहवासी असमंजस में हैं—एक तरफ अदालत का आदेश और दूसरी तरफ प्रशासन के नोटिस।

अब बड़ा सवाल यही है कि जब मास्टर प्लान ही समाप्त हो चुका है तो फिर सड़क निर्माण का आधार क्या है?

क्या अधिकारी अदालत के आदेश को नजरअंदाज कर अपनी सुविधा से नियमों की व्याख्या कर रहे हैं, या फिर पूरा मामला प्रशासनिक भ्रम का शिकार है?

फिलहाल इंदौर में यह मुद्दा धीरे-धीरे एक बड़े शहरी विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है।