इंदौर में शराब कारोबार 2100 करोड़ रुपये के पार
इंदौर का शराब बाजार अब 2100 करोड़ रुपये के स्तर को पार कर चुका है और खपत के मामले में यह मध्यप्रदेश के सबसे बड़े बाजारों में शामिल हो गया है। आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और बढ़ेगा या नहीं, यह नीति, नियंत्रण और सामाजिक व्यवहार पर निर्भर करेगा। फिलहाल डेटा यह बताता है कि इंदौर की पहचान केवल स्वच्छता और स्वाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि शराब कारोबार में भी यह शहर एक प्रमुख आर्थिक केंद्र बन चुका है।
इस साल 56 ग्रुप में नीलाम होंगी इंदौर जिले की शराब की 173 दुकानें, सबसे मंहगा ग्रुप स्कीम नंबर 54, जिसकी बोली 135 करोड़ रुपए होगी
केवल नौ महीने में 705 करोड़ लीटर शराब पी गए इंदौरवासी, अनुमान है कि मार्च आखिरी तक खपत का आंकड़ा एक हजार करोड़ लीटर छू जाएगा
द एक्सपोज लाइव न्यूज नेटवर्क, इंदौर
स्वच्छता, खानपान और शहरी प्रबंधन के लिए पहचाना जाने वाला इंदौर अब शराब कारोबार के आंकड़ों को लेकर चर्चा में है। आबकारी विभाग के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इंदौर जिले में शराब दुकानों का अनुमानित कुल कारोबार 2100 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। यह आंकड़ा न केवल मध्यप्रदेश में बल्कि देश के प्रमुख शहरी शराब बाजारों में इंदौर को शीर्ष पंक्ति में खड़ा करता है।
आबकारी रिकॉर्ड के मुताबिक जिले में कुल 173 शराब दुकानें संचालित होंगी, जिन्हें 56 ग्रुपों में विभाजित किया गया है। इन दुकानों का वितरण शहर के प्रमुख व्यावसायिक, आवासीय और बाहरी क्षेत्रों में किया गया है। स्कीम नंबर-54, राऊ, द्वारकापुरी, एमआर-9, आनंद बाजार, कनाडिया, पीपल्यापाला, महू और देपालपुर जैसे क्षेत्रों में शराब बिक्री की अनुमति दी गई है। इससे स्पष्ट है कि यह नेटवर्क केवल शहरी केंद्र तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे जिले को कवर करता है।
खपत के आंकड़े: सिर्फ नौ महीनों में रिकॉर्ड
खपत से जुड़े आंकड़े इंदौर के शराब बाजार की वास्तविक तस्वीर पेश करते हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में जिले में—
- देशी शराब: 243 करोड़ प्रूफ लीटर
- विदेशी स्पिरिट: 462 करोड़ प्रूफ लीटर
- बीयर: 51 करोड़ बल्क लीटर
की खपत दर्ज की गई। यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पूरे वर्ष का नहीं, बल्कि केवल नौ महीनों का है। आबकारी अधिकारियों का अनुमान है कि वार्षिक आंकड़े इससे कहीं अधिक हो सकते हैं।
क्षेत्रवार विश्लेषण: राऊ सबसे आगे
क्षेत्रीय आंकड़ों के अनुसार राऊ क्षेत्र जिले में सबसे अधिक खपत वाला इलाका बनकर उभरा है। यहां नौ महीनों में एक करोड़ लीटर से अधिक शराब की बिक्री दर्ज की गई।
अन्य प्रमुख क्षेत्र—
- द्वारकापुरी ग्रुप: लगभग 86 लाख लीटर
- एमआर-9 ग्रुप: करीब 55 लाख लीटर
- स्कीम-54 ग्रुप: 5 दुकानों से 26 लाख लीटर से अधिक
- राऊ क्षेत्र में बीयर: अकेले 56 लाख लीटर से ज्यादा
इन आंकड़ों के विपरीत सगड़ौद और चोरल जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में खपत सीमित रही, जिससे शहरी-ग्रामीण खपत अंतर स्पष्ट होता है।
खपत बढ़ने के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार इंदौर में शराब खपत बढ़ने के पीछे कई संरचनात्मक कारण हैं—
- तेजी से बढ़ता शहरीकरण
- युवा और कामकाजी आबादी का उच्च अनुपात
- आईटी, उद्योग और सेवा क्षेत्र में रोजगार
- नाइट-इकोनॉमी और सामाजिक आयोजनों में वृद्धि
- पर्यटन और बाहरी आबादी की मौजूदगी
इन कारकों ने मिलकर शराब बाजार को स्थिर और लगातार बढ़ता हुआ बनाया है।
सरकार को बड़ा राजस्व
2100 करोड़ रुपये से अधिक के इस कारोबार से राज्य सरकार को भारी राजस्व प्राप्त हो रहा है। दस्तावेजों के अनुसार— लाइसेंस फीस: लगभग 105 करोड़ रुपये और आबकारी ड्यूटी: करीब 1997 करोड़ रुपये रहेगी। यानी सरकार का खजाना तो भरेगा ही भरेगा।
दुकानों का आवंटन ई-टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित करने का दावा किया गया है। सरकार का कहना है कि पिछली अनियमितताओं को देखते हुए इस बार निगरानी व्यवस्था सख्त रखी गई है। ई-चालान प्रणाली लागू की गई है और नर्मदा तट के आसपास शराब बिक्री पर प्रतिबंध पूर्ववत रहेगा। किसी नए क्षेत्र में अतिरिक्त दुकान खोलने की अनुमति नहीं दी गई है।
स्वास्थ्य पर असर: आंकड़ों के पीछे की चिंता
जहां राजस्व और रोजगार के आंकड़े सकारात्मक तस्वीर पेश करते हैं, वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ बढ़ती खपत को लेकर चिंता जता रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार अत्यधिक शराब सेवन से लीवर, हृदय और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ता है। हालांकि, इन चेतावनियों के बावजूद खपत के आंकड़े फिलहाल बढ़ते रुझान को ही दर्शाते हैं।
सबसे महंगा समूह: स्कीम नंबर-54 (IND-1)
सबसे बड़ा दांव स्कीम नंबर-54 (IND-1) समूह पर लगाया गया है। इस समूह का आरक्षित मूल्य 134.96 करोड़ रुपये तय किया गया है। इसमें कुल पांच प्रमुख दुकानें शामिल हैं— स्कीम नंबर-54 (क), स्कीम नंबर-54 (ख), लसूडिया गोदाम क्रमांक-1, लसूडिया मोरी और रंगरंजनपुर। ये दुकानें शहर के अत्यधिक व्यस्त और व्यावसायिक इलाकों में स्थित हैं।
दूसरे स्थान पर एम.आर.-9 (IND-2) समूह है, जिसका मूल्य 130.09 करोड़ रुपये रखा गया है। इसमें एम.आर.-9, रंगपाड़न्या, लसूडिया गोदाम क्रमांक-2 और एम.आर.-11 की दुकानें शामिल हैं। यह इलाका पहले से ही व्यापारिक और आवागमन का प्रमुख केंद्र रहा है, जिसका असर खपत के आंकड़ों में साफ दिखता है।
तीसरे स्थान पर चंद्रगुप्त मौर्य चौराहा (IND-3) समूह है, जिसका आरक्षित मूल्य 99.39 करोड़ रुपये है। इसमें चंद्रगुप्त मौर्य चौराहा (एम.आर.-10), हीरानगर, परदेशीपुरा क्रमांक-1, एम.आर.-10 और परदेशीपुरा क्रमांक-2 दुकानें शामिल हैं।
एम.आई.जी. (IND-4) समूह का मूल्य 98.04 करोड़ रुपये है। इसमें एम.आई.जी., रामकृष्णबाग और भमोरी चौराहा दुकानें शामिल हैं।
वहीं आनंद बाजार (IND-5) समूह का मूल्य 78.18 करोड़ रुपये है। आनंद बाजार और बंगाली चौराहा (क्रमांक-1 और 2) की दुकानें शामिल हैं।