“स्टॉप वर्क” की मांग के बीच निगम पर सवाल: बिना डेवलपमेंट परमिशन चल रहा ‘ट्रेजर मार्किट सिटी फेज-4’ का काम
लगातार शिकायतें, CM हेल्पलाइन में गुहार, फिर भी जवाब— “सिर्फ बाउंड्री वॉल बन रही है”,बिना विकास अनुमति चल रहा काम ,बिना RERA रजिस्ट्रेशन बिक रहे प्लाट ,आखिर कौन हे इनका संरक्षक ,अधिकारी नहीं दे रहे जवाब, धड्ड्ले से फिर की जा रही अनियमितता ,पहले के 2 प्रोजेक्ट में भी रहवासी कर रहे लगातार शिकायतें ,जो प्लाट लेगा उनके नुकसान की कौन करेगा भरपाई ?नियम मौजूद लेकिन सब कुछ बिल्डर के सामने शिथिल ,ग्राम बिजलपुर, तहसील राऊ व जिला इंदौर स्थित भूमि खसरा क्रमांक 876/1, 876/2, 876/3, 876/4, 877/1, 877/2, 878/1, 878/2, 880, 879, 888, 919/1/1, 919/1/2, 919/2, 920/2 पर आने वाला हे ट्रेज़र ग्रुप का यह नया आवासीय प्रोजेक्ट
द एक्सपोज़ लाइव न्यूज़ नेटवर्क इंदौर
नीरज द्विवेदी (9993949000)
इंदौर। ट्रेजर टाउन बिजलपुर से जुड़ा एक मामला अब नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। रहवासी द्वारा नवंबर 2025 से लगातार कॉलोनी सेल, नगर निगम, सीएम हेल्पलाइन और उच्च अधिकारियों को शिकायतें भेजी जा रही हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि “ट्रेजर मार्किट सिटी फेज-4” में बिना Development Permission के विकास कार्य शुरू कर दिए गए हैं।

सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब CM Helpline शिकायत क्रमांक 37093290 के निराकरण में निगम की ओर से यह कहा गया कि मौके पर केवल “Boundary Wall” का निर्माण पाया गया और शिकायत निराधार है। जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि मौके पर सड़क निर्माण की खुदाई, भूमि समतलीकरण, प्लॉट-रोड मार्किंग, JCB मशीनों से कार्य और अंडरग्राउंड पाइपलाइन डालने जैसी गतिविधियां जारी हैं।
“परमिशन नहीं, फिर काम कैसे?”
शिकायतकर्ता के अनुसार कॉलोनी सेल में मौखिक रूप से बताया गया था कि संबंधित बिल्डर ने अब तक Development Permission के लिए आवेदन तक प्रस्तुत नहीं किया है। इसके बावजूद मौके पर डेवलपमेंट गतिविधियां शुरू होना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है :
- यदि अनुमति नहीं दी गई, तो काम किस आधार पर शुरू हुआ?
- क्या किसी अन्य स्तर पर मौन स्वीकृति मिली?
- बिना अनुमति कार्य होने पर अब तक “Stop Work” कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- शिकायतकर्ता को बिना सूचना दिए निरीक्षण क्यों किया गया?
पुराने विवादों से घिरा है प्रोजेक्ट
शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित बिल्डर के खिलाफ पहले से निगम के आदेश लंबित हैं। वर्ष 2025 में पारित आदेशों में कथित अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद भवन अनुज्ञा स्थगित की गई थी, लेकिन आज तक आदेशों का पालन नहीं हुआ।
शिकायत में यह भी दावा किया गया कि :
- वर्ष 2010 की कॉलोनी का हस्तांतरण आज तक लंबित है।
- रहवासियों को कथित रूप से करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति हुई।
- कॉलोनी के STP बंद पाए गए और सीवेज का पानी स्टॉर्म लाइन में छोड़े जाने की शिकायत हुई।
- खसरा 885 और 919 की भूमि को लेकर भी गंभीर विवाद बताए गए हैं।
“क्या प्रभावशाली बिल्डर पर मेहरबान है सिस्टम?”
लगातार शिकायतों और कथित उल्लंघनों के बावजूद यदि नया डेवलपमेंट आगे बढ़ता है तो यह प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि :
- CM Helpline शिकायत दोबारा खोली जाए
- संयुक्त और निष्पक्ष निरीक्षण कराया जाए
- Development Permission की स्थिति सार्वजनिक की जाए
- बिना अनुमति कार्य पाए जाने पर तत्काल “STOP WORK” आदेश जारी हों
- भ्रामक निराकरण देने वालों की जवाबदेही तय हो
अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर निगम इस पूरे मामले में पारदर्शी कार्रवाई करता है या फिर “सिर्फ बाउंड्री वॉल” वाला जवाब ही आगे भी ढाल बना रहेगा।
मामले में हमने ज़िम्मेदारों से बात करने के बहुत प्रयास करे लेकिन कोई भी उपलब्ध नहीं हो सका