“बधाई के नाम पर वसूली गैरकानूनी” — हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, इंदौर की हालिया घटना से जुड़ा बड़ा सवाल
High Court of Judicature at Allahabad ने किन्नेरों द्वारा "नेग और बधाई" से जुड़े मामले में अहम फैसले में साफ कहा है कि “बधाई” या “जजमानी” के नाम पर किसी भी व्यक्ति से धन वसूली को कानूनी संरक्षण नहीं दिया जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि यदि ऐसी गतिविधियों को मान्यता दी गई तो यह जबरन वसूली और अवैध उगाही को बढ़ावा देने जैसा होगा।
द एक्सपोज़ लाइव न्यूज़ ( नीरज द्विवेदी 9993949000)
मामला उस याचिका से जुड़ा था जिसमें किन्नर समुदाय के कुछ लोगों ने अपने “इलाके” तय करने और वहां बधाई वसूली के अधिकार को सुरक्षित करने की मांग की थी। कोर्ट ने दो टूक कहा कि भारत के किसी भी नागरिक से टैक्स, फीस या धन केवल कानून के तहत ही लिया जा सकता है, परंपरा या दबाव के आधार पर नहीं। अदालत ने इसे भारतीय न्याय संहिता के तहत अवैध उगाही की श्रेणी में माना और याचिका खारिज कर दी।
इंदौर में पिछले महीने हुआ था हंगामा
इस फैसले के बाद इंदौर में पिछले महीने सामने आई घटना फिर चर्चा में आ गई है, जहां शहर के एक इलाके में “बधाई” को लेकर दो समूहों के बीच विवाद और हंगामे की खबर सामने आई थी। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाए थे कि कार्यक्रमों और दुकानों पर दबाव बनाकर रकम मांगी जा रही थी, जिसके चलते विवाद की स्थिति बनी। घटना के बाद पुलिस हस्तक्षेप तक करना पड़ा था।
अब हाईकोर्ट के इस फैसले ने ऐसे मामलों पर बड़ा कानूनी संदेश दे दिया है कि “परंपरा” के नाम पर किसी भी प्रकार की जबरन वसूली को संवैधानिक अधिकार नहीं माना जा सकता।
कोर्ट की सख्त चेतावनी
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि ऐसे दावों को वैधता दी गई तो भविष्य में अन्य गिरोह भी “इलाके” बांटकर अवैध वसूली शुरू कर सकते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान का अनुच्छेद 14, 19 और 21 किसी को भी अवैध तरीके से धन लेने का अधिकार नहीं देता।
यह फैसला अब देशभर में “बधाई वसूली” को लेकर चल रही बहस के बीच एक बड़ी न्यायिक टिप्पणी माना जा रहा है।