व्हाट्सएप मैसेज से 6000 वोकेशनल ट्रेनर्स को ‘सर्विस ब्रेक’
मध्य प्रदेश में 6000 से अधिक वोकेशनल ट्रेनर्स ने स्कूल शिक्षा विभाग पर व्हाट्सएप मैसेज के जरिए सर्विस ब्रेक देने, बिना लिखित आदेश छुट्टियां खत्म करने और वेतन कटौती के आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर DPI को ज्ञापन सौंपकर सेवा बहाली की मांग की गई है।
स्कूल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, बिना लिखित आदेश छुट्टियां खत्म करने, वेतन कटौती और सेवाएं रोकने का आरोप
एक्सपोज लाइव, भोपाल।
मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों में कौशल शिक्षा से जुड़े 6000 से अधिक वोकेशनल ट्रेनर्स की सेवाओं को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। न्यू वोकेशनल एजुकेशन ट्रेनर्स एसोसिएशन (NVETA) ने आरोप लगाया है कि 1 जून 2026 से प्रशिक्षकों को केवल व्हाट्सएप संदेश के आधार पर काम से रोक दिया गया। संगठन का दावा है कि इस संबंध में कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया।
एसोसिएशन ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर सेवा बहाली और विभागीय हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का कहना है कि पिछले 10 वर्षों से कार्यरत प्रशिक्षकों को अचानक "सर्विस ब्रेक" की स्थिति में डाल दिया गया है।
NVETA प्रदेश अध्यक्ष जगदीश परमार का आरोप है कि हजारों कर्मचारियों के भविष्य से जुड़े फैसले व्हाट्सएप संदेशों के जरिए लिए जा रहे हैं, जबकि कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया।
क्या हैं प्रमुख आरोप?
- 1 जून से व्हाट्सएप संदेश के जरिए सेवाएं रोकी गईं।
- कोई लिखित या आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया।
- मासिक आकस्मिक अवकाश (CL) समाप्त कर दिया गया।
- अवकाश लेने पर वेतन कटौती की चेतावनी दी गई।
- VT Manpower App की तकनीकी समस्याओं से वेतन प्रभावित हुआ।
- 6000 से अधिक प्रशिक्षकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हुआ।
वेतन को लेकर भी नाराजगी
संगठन का कहना है कि मध्य प्रदेश में वोकेशनल ट्रेनर्स को करीब 20 हजार रुपये मानदेय मिलता है, जबकि दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में इसी कार्य के लिए 38 से 42 हजार रुपये तक भुगतान किया जाता है।
संगठन की प्रमुख मांगें
- सभी प्रभावित प्रशिक्षकों की सेवा बहाल की जाए।
- सर्विस ब्रेक की व्यवस्था समाप्त हो।
- 12 माह निरंतर सेवा सुनिश्चित की जाए।
- CL और अन्य अवकाश सुविधाएं बहाल हों।
- महिला प्रशिक्षकों को सवैतनिक मातृत्व अवकाश मिले।
- वेतन विसंगतियों का समाधान किया जाए।
छात्रों पर क्या पड़ेगा असर?
वोकेशनल ट्रेनर्स स्कूलों में विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी और कौशल आधारित प्रशिक्षण देते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में प्रशिक्षकों की सेवाएं प्रभावित होने से कौशल शिक्षा कार्यक्रमों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
बड़ा सवाल
क्या सरकारी विभागों में हजारों कर्मचारियों की सेवा शर्तों से जुड़े फैसले अब औपचारिक आदेशों की जगह व्हाट्सएप संदेशों से लिए जाएंगे?
फिलहाल मामले पर स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।