सीएम इन एक्शन: भागीरथपुरा गंदा पानी कांड पर सख्ती, इंदौर निगमायुक्त को किया रवाना

इंदौर के भागीरथपुरा में 24 दिसंबर से शुरू हुए दूषित पानी संकट ने हैजा की पुष्टि, करीब 15 मौतों की मीडिया रिपोर्ट और सैकड़ों बीमारों के बाद राजनीतिक भूचाल ला दिया। 2 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त कदम उठाते हुए निगम और पीएचई के अफसरों पर कार्रवाई की और इंदौर निगमायुक्त को हटाने के निर्देश दिए। लेकिन सवाल अब भी कायम है—अगर समय रहते शिकायतें सुनी जातीं, तो क्या ये जानें बच सकती थीं?

सीएम इन एक्शन: भागीरथपुरा गंदा पानी कांड पर सख्ती, इंदौर निगमायुक्त को किया रवाना
इंदौर गंदा पानी काण्ड

नलों से निकला ज़हर, सैकड़ों बीमार, 15 मौतों और हैजा की पुष्टि के बाद हरकत में सरकार, सीएम का सख्त संदेश: जनस्वास्थ्य से समझौता नहीं

एक्सपोज लाइव न्यूज नेटवर्क, इंदौर। 

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में 24 दिसंबर 2025 से शुरू हुए दूषित पेयजल संकट ने देखते-ही-देखते भयावह रूप ले लिया। नलों से गंदा पानी, फिर उल्टी-दस्त की बाढ़, हैजा के जीवाणु की पुष्टि और करीब 15 मौतों की मीडिया रिपोर्ट के बाद आखिरकार 2 जनवरी 2026 को राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट कर दिया कि जनस्वास्थ्य से जुड़ी लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने 2 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया कि प्रारंभिक जांच में गंभीर लापरवाही सामने आने पर इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और पीएचई के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है। साथ ही इंदौर नगर निगम के आयुक्त दिलीप कुमार यादव को इंदौर से हटा दिया गया है

24–26 दिसंबर: नलों से गंदा पानी, शुरुआती शिकायतें

  • 24 दिसंबर 2025 से भागीरथपुरा क्षेत्र के कई घरों में नलों से मटमैला और बदबूदार पानी आने लगा।
  • स्थानीय रहवासियों ने नगर निगम और जल प्रदाय विभाग में शिकायतें कीं, लेकिन शुरुआती स्तर पर इसे तकनीकी गड़बड़ी मानकर नजरअंदाज किया गया।

28–30 दिसंबर: बीमारी फैली, अस्पतालों में भीड़

  • 28 दिसंबर के बाद हालात तेजी से बिगड़ने लगे।
  • इलाके में उल्टी-दस्त, पेट दर्द, बुखार और डिहाइड्रेशन के मरीज बढ़ने लगे।
  • 30 दिसंबर 2025 तक स्थिति यह हो गई कि 150 से अधिक लोग बीमार हो चुके थे और कई को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसी दौरान कुछ मौतों की खबरें भी सामने आने लगीं।

31 दिसंबर: हैजा और ई-कोलाई की आशंका

  • 31 दिसंबर 2025 को लिए गए पानी के सैंपलों की प्रारंभिक रिपोर्ट में E. coli और हैजा जैसे जीवाणु होने की आशंका जताई गई।
  • अस्पतालों में सैकड़ों मरीज पहुंच चुके थे और कई की हालत गंभीर बताई गई।

1–2 जनवरी: हैजा की पुष्टि, मौतों का आंकड़ा बढ़ा

  • 1 जनवरी 2026 को आई विस्तृत लैब रिपोर्ट में पानी में हैजा फैलाने वाला जीवाणु (Vibrio cholerae) और E. coli पाए जाने की पुष्टि हुई।
  • इसी के साथ मीडिया रिपोर्टों में मौतों की संख्या बढ़कर करीब 15 बताई गई।
  • इस दौरान 200 से अधिक मरीज अस्पतालों में भर्ती रहे, जबकि कई को आईसीयू में रखा गया।

2 जनवरी: सरकार का एक्शन

2 जनवरी 2026 को मामला सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचा।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्काल कार्रवाई करते हुए:

  • निगम के अपर आयुक्त को निलंबित किया
  • पीएचई के अधीक्षण यंत्री को निलंबित किया
  • इंदौर नगर निगम आयुक्त को पद से हटाने के निर्देश दिए

मौतों के आंकड़े पर टकराव

  • मीडिया रिपोर्ट: दूषित पानी से जुड़ी बीमारी में करीब 15 मौतें
  • सरकारी रिपोर्ट (हाईकोर्ट में): 4 मौतें, 294 बीमार, जिनमें 32 आईसीयू में

इस अंतर ने प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सीवेज मिला पानी, सिस्टम फेल्योर उजागर

जांच में सामने आया कि पेयजल पाइपलाइन में सीवेज/ड्रेनेज का पानी मिल गया, जिससे पूरे इलाके में दूषित पानी सप्लाई हुआ। यह केवल तकनीकी चूक नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र की बड़ी विफलता मानी जा रही है।

इंदौर कमिश्नर-कलेक्टर की बैठक, सख्त हिदायत

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से फैली बीमारी को लेकर 2 जनवरी को मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक की। बैठक में संभागायुक्त, इंदौर ने बताया कि 28 दिसंबर को क्षेत्र में उल्टी-दस्त के मामले सामने आए, जिनका संभावित कारण पेयजल प्रदूषण पाया गया। सूचना मिलते ही नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। प्रभावित क्षेत्र के 13,444 घरों का सर्वे किया गया। 310 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें से 235 स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। 24 घंटे डॉक्टरों की ड्यूटी तय की गई, 10 एम्बुलेंस तैनात की गईं, अस्पतालों में निःशुल्क इलाज के लिए बेड चिन्हित किए गए। विशेषज्ञ मेडिकल टीम मौके पर भेजी गई, 24×7 कॉल सेंटर, सहायता डेस्क सक्रिय की गई और 1600 से अधिक जल नमूने लिए गए।

मुख्यमंत्री ने बैठक में निर्देश दिए कि जनस्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसी घटना दोबारा न हो। इसके लिए 20 वर्ष से अधिक पुरानी व लीकेज वाली पाइपलाइनों का चिन्हांकन, रिसाव मिलने पर 48 घंटे में मरम्मत, जल शोधन संयंत्रों और टंकियों की 7 दिन में जांच-सफाई, सभी प्रमुख जल स्रोतों पर नियमित जल नमूना परीक्षण और क्लोरीनेशन सिस्टम की 24×7 निगरानी सुनिश्चित की जाए। जल प्रदूषण मिलने पर तुरंत सप्लाई बंद कर वैकल्पिक सुरक्षित पानी दिया जाए। गंदे पानी से जुड़ी शिकायतों को इमरजेंसी कैटेगरी में रखकर 24–48 घंटे में निराकरण और सीएम हेल्पलाइन पर आई शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।