इंदौर को मिला नया निगमायुक्त: IAS क्षितिज सिंघल को सौंपी गई कमान
भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड के बाद इंदौर नगर निगम की कमान बदल दी गई है। जनस्वास्थ्य संकट और प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवालों के बीच सरकार ने शीर्ष स्तर पर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। नए निगमायुक्त के सामने जल आपूर्ति सुधार, सिस्टम की सख्त निगरानी और जनता का भरोसा बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। आखिर किस अधिकारी को सौंपी गई इंदौर की कमान—पूरी कहानी अंदर।
भागीरथपुरा कांड बना वजह, निगम के शीर्ष पद पर बदलाव, फील्ड ओरिएंटेड अधिकारी को लेकर आए सीएम
द एक्सपोज लाइव न्यूज नेटवर्क, इंदौर।
भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड के बाद प्रशासनिक स्तर पर की गई सख्त कार्रवाई के तहत इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव को पद से हटाए जाने के बाद सरकार ने IAS क्षितिज सिंघल को इंदौर का नया निगमायुक्त नियुक्त किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब शहर हाल ही में गंभीर जनस्वास्थ्य संकट से गुजरा और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े हुए।
सीएम के सख्त रुख के बाद शीर्ष स्तर पर फेरबदल
सरकारी निर्णय के अनुसार, दूषित पानी की घटना को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए पहले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की और उसके बाद नगर निगम के शीर्ष प्रशासनिक पद पर बदलाव किया। दिलीप यादव को हटाकर मंत्रालय में पदस्थ किया गया, जबकि अब अनुभवी आईएएस अधिकारी क्षितिज सिंघल को इंदौर नगर निगम की कमान सौंपी गई है।
फील्ड-ओरिएंटेड और सिस्टम-ड्रिवन अधिकारी
प्रशासनिक हलकों में क्षितिज सिंघल को फील्ड में काम करने वाला, सिस्टम-ड्रिवन और निर्णय लेने में सख्त अधिकारी माना जाता है। वे इससे पहले उज्जैन नगर निगम में आयुक्त रह चुके हैं और नगरीय प्रशासन, जल आपूर्ति, सफाई व्यवस्था तथा सेवा वितरण से जुड़े मामलों में अनुभव रखते हैं। उनकी नियुक्ति को सरकार की ओर से यह संकेत माना जा रहा है कि अब इंदौर में परिणाम आधारित प्रशासन पर फोकस रहेगा।
जल आपूर्ति और निगरानी सबसे बड़ी चुनौती
नए निगमायुक्त के सामने सबसे बड़ी चुनौती जल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करना, दूषित पानी जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना, और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सख्त निगरानी रखना होगी। इसके साथ ही सफाई, स्वास्थ्य सेवाएं, शिकायत निवारण और फील्ड-लेवल मॉनिटरिंग को लेकर भी उनसे कड़े और त्वरित फैसलों की उम्मीद की जा रही है।
ब्यूरोक्रेसी में साफ संदेश: जवाबदेही सर्वोपरि
ब्यूरोक्रेसी में इस बदलाव को साफ संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में लापरवाही अब पद पर बने रहने काधार नहीं होगी, और इंदौर जैसे बड़े शहर में प्रशासनिक जवाबदेही सर्वोपरि रहेगी।