सेंधमार पुजारीः मंदिर में लगा दी सेंध
पूजा करने आया, कब्जा कर महल खड़ा कर दिया – इंदौर कलेक्टर (मंदिर) की ज़मीन पर बना डाली चार मंज़िला इमारत, फिर मंदिर की दीवार तोड़ी
द एक्सपोज़ लाइव न्यूज़ नेटवर्क, इंदौर
इंदौर शहर के खजराना क्षेत्र में स्थित चिंतामण हनुमान मंदिर पर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पूजा-पाठ के लिए नियुक्त एक पुजारी ने ही अब इस धार्मिक स्थल पर कब्जा कर लिया है! मंदिर की सीमाओं को तोड़ते हुए न केवल भूमि पर अवैध निर्माण किया गया, बल्कि मंदिर की दीवार गिराकर पुजारी ने बहुमंज़िला अवैध इमारत से मंदिर तक रास्ता भी बना दिया है।
मामला रोबोट चौराहे (MR 9) के पास खसरा नंबर 532 ग्राम खजराना का है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार मंदिर की पूरी भूमि मारुति मंदिर व्यवस्थापक कलेक्टर के नाम दर्ज है, लेकिन वर्षों पहले पूजा के लिए नियुक्त पुजारी शैलेन्द्र जोशी ने धीरे-धीरे मंदिर की ज़मीन पर अधिकार जमा लिया। उसने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर खुद को मंदिर का उत्तराधिकारी साबित करने का प्रयास किया जा रहा है उसमें प्रशासन का मोन सबसे बड़ा है क्योंकि विगत 25 वर्ष से इस भूमि के व्यवस्थापक जिलाधीश है इसी मोन के चलते मंदिर से सटी भूमि पर पंडित ने चार मंज़िला अवैध इमारत खड़ी कर दी।

साल 2023 में इस अतिक्रमण के विरुद्ध तहसील न्यायालय ने धारा 248 के तहत नोटिस जारी कर कार्रवाई की और अतिक्रमण आंशिक रूप से ढहा भी दिया गया। मगर अतिक्रमणकारी पुजारी बाज़ नहीं आया और बचे हिस्से पर निर्माण कार्य आज भी जारी है। चौंकाने वाली बात यह है कि अब वह मंदिर की दीवार को गिराकर अपनी इमारत से सीधा रास्ता बना रहा है।
पुराने राजस्व दस्तावेजों में पुजारी के रूप में जनक प्रसाद दुबे व बाद में उनके पुत्र माधवलाल दुबे का नाम दर्ज है, लेकिन शैलेन्द्र जोशी ने खुद को पुजारी दर्शा कर चढ़ावे से करोड़ों की संपत्ति भी बना ली। इसके बावजूद आज तक उसके खिलाफ न तो कोई FIR दर्ज हुई है, न ही प्रशासन ने उसे रोका।
वर्ष 2000 से ज़मीन कलेक्टर के नाम लेकिन वर्ष 2000 के बाद किसी तीसरे से खरीदी बता रहा पुजारी
पुजारी का दावा है कि यह ज़मीन उसके पिता ने खरीदी थी, लेकिन राजस्व अभिलेख उसे झूठा साबित करते हैं। खसरा नंबर 532/1470 (2.492 हेक्टेयर) की भूमि देवस्थान संपत्ति के रूप में वर्ष 2000 से कलेक्टर के नाम है, जबकि 532/1471 की भूमि आईडीए के नाम दर्ज है, जो स्कीम नंबर 94 के अंतर्गत आती है। अर्थात, यहां कोई भी निजी भूमि मौजूद नहीं है।
कलेक्टर द्वारा रिसीवर नियुक्त लेकिन फिर भी चल रही मनमानी
इंदौर जिलाधीश द्वारा उक्त मंदिर पर पहले ही रिसीवर नियुक्त किया जा चूका हे लेकिन पुजारी द्वारा मंदिर के चरों और गुमटियां लगवा दी गयी ,यहाँ तक की बाजु में शराब की दुकान के बहार भी अवैध गुमटियां लगवा कर हर महीने मोटी रकम किराये के रूप में ली जा रही हे।
न्याय की उम्मीद में स्थानीय लोग लगातार शिकायतें कर रहे हैं, परंतु पुजारी की पकड़ इतनी मज़बूत है कि अब तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं हो पाई है। इंदौर प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है – क्या धर्मस्थलों पर अब माफिया राज चलेगा?
क्या अब मंदिरों की जमीन भी सुरक्षित नहीं? प्रशासन कब जागेगा?
मामले में क्षेत्रीय पार्षद कालू गागोरे का कहना है : मंदिर की दीवार में तोड़फोड़ की जानकारी आपके द्वारा मुझे प्राप्त हुई है। में खुद जा कर देखूंगा और अगर ऐसा पाया जाता हे तो तत्काल उचित कार्यवाही हेतु जिला,पुलिस और निगम प्रशासन से अनुरोध करूँगा ,मामला अति संवेदनशील और लोगों की आस्था से जुड़ा है,पुजारी की मनमानी सहन किसी भी कीमत पर नहीं की जाएगी।
वहीं एक स्थानीय रहवासी गणेश चौहान का कहना है : जिला प्रशासन द्वारा करीब डेढ़ साल पहले पुजारी की अवैध ईमारत के कुछ हिस्से को ढहाया गया था लेकिन बावजूद इसके पुजारी द्वारा निर्माण जारी रखा गया। अब मंदिर की दीवार तोड़ कर ईमारत में जाने का रास्ता बनाया जा रहा हे। सभी रहवासी अपने अपने स्तर पर शिकायत कर रहे हैं।