बिजलपुर ट्रेज़र टाउन में नया संग्राम

हाईकोर्ट में जवाब से पहले पारदर्शिता की मांग पर रहवासी हुए लामबंद,सहकारिता विभाग के प्रशासक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल ,कॉलोनाइजर के साथ साठगांठ के लगे आरोप ,मामला पहले भी थाने तक पहुंचा था ,सहकारिता उपायुक्त ने लगाई फटकार

बिजलपुर  ट्रेज़र  टाउन में नया संग्राम

द एक्सपोज़ लाइव न्यूज़ नेटवर्क इंदौर 

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय इंदौर  में लंबित मामले को लेकर ट्रेजर टाउन एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। अब तक रहवासी कॉलोनाइजर के खिलाफ मूलभूत सुविधाओं में सुधार, अधूरे विकास कार्यों की पूर्णता और लगातार हो रही अनियमितताओं पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। लेकिन जब बार-बार किए गए वादे पूरे नहीं हुए, तो अंततः रहवासियों ने न्याय की आस में हाईकोर्ट की शरण ली।

मामले में नगर निगम भवन अधिकारी के साथ सहकारिता विभाग द्वारा नियुक्त प्रशासक को भी पक्षकार (Respondent No.6) बनाया गया है। अब स्थिति यह है कि न्यायालय में संस्था की ओर से तथ्यात्मक उत्तर प्रस्तुत किया जाना है। प्रारंभिक चर्चा में उत्तर दाखिल न करने की बात सामने आई थी, लेकिन पत्राचार, मेल और लगातार फॉलोअप के बाद उत्तर दाखिल करने की सहमति बनी है।

जवाब पर टिकी टाउनशिप की किस्मत

रहवासियों का कहना है कि संस्था की ओर से न्यायालय में जो भी उत्तर प्रस्तुत किया जाएगा, उसका सीधा असर पूरे टाउनशिप के अधिकारों, विकास योजनाओं और भविष्य की संरचना पर पड़ेगा। यदि उत्तर रिकॉर्ड के विपरीत, अपूर्ण या भ्रामक तथ्यों पर आधारित हुआ तो इसका नुकसान पूरे ट्रेजर टाउन को उठाना पड़ सकता है।

रहवासियों के बीच यह आशंका भी गहराई से चर्चा में है कि कहीं सहकारिता विभाग के प्रशासक द्वारा ऐसा जवाब पेश न कर दिया जाए, जिससे कॉलोनाइजर को लाभ और आम रहवासियों को हानि हो। इसी चिंता को लेकर अब कॉलोनी में एकजुटता का माहौल बन गया है।

सहकारिता उपायुक्त से गुहार

रहवासियों ने सहकारिता उपायुक्त  मनोज जायसवाल से आग्रह किया है कि संस्था की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत किया जाने वाला उत्तर दाखिल करने से पूर्व रहवासी प्रतिनिधियों के साथ साझा किया जाए, ताकि पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। प्रशासक को उपायुक्त की फटकार के बाद प्रशासक जवाब पेश करने को राजी तो गए लेकिन रहवासियों को अंदेशा हे की वे जवाब में ऐसे विपरीत तथ्य लिख सकते हैं जिसका नुकसान रहवासियों को भुगतना पड़ सकता हे 

रहवासियों की मांग स्पष्ट है—

  • न्यायालय में प्रस्तुत उत्तर पूर्णतः सत्य और तथ्यात्मक हो
  • जांच में सिद्ध आदेशों का समर्थन करे
  • नियमानुसार एवं विधिसम्मत हो
  • टाउनशिप के सामूहिक हितों की रक्षा करे

रहवासियों का कहना है कि यह किसी व्यक्ति या विभाग के विरुद्ध आंदोलन नहीं है, बल्कि सत्य, पारदर्शिता और टाउन हित के पक्ष में सामूहिक पहल है।

करोड़ों के हित और अधूरा विकास

ट्रेजर टाउन में अधूरे विकास कार्य, मूलभूत सुविधाओं की कमी और करोड़ों रुपये के सामूहिक हित का प्रश्न लंबे समय से उठता रहा है। अब मामला न्यायालय में है, ऐसे में एक गलत या अपूर्ण जवाब आने वाले वर्षों की संरचना और निवेश पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

रहवासी अब खुलकर कह रहे हैं—

“यह केवल एक याचिका नहीं, बल्कि हमारे घर, हमारे अधिकार और हमारे भविष्य का सवाल है।”

सभी रहवासियों से अपील की गई है कि वे सजग रहें, संगठित रहें और टाउन हित को सर्वोपरि रखें। आज लिया गया निर्णय आने वाले वर्षों की दिशा तय करेगा। सवाल अब सिर्फ इतना है—क्या न्यायालय में सच सामने आएगा या फिर ट्रेजर टाउन की किस्मत एक भ्रामक जवाब के भरोसे छोड़ दी जाएगी?