इंदौर में डबल डेकर बस प्रोजेक्ट: बड़ा वादे, आधी हकीकत
इंदौर का डबल डेकर बस प्रोजेक्ट एक साल से रुका हुआ है। बड़े वादों और घोषणाओं के बावजूद बसें अभी तक सड़कों पर नहीं हैं, जिससे शहरवासियों को वादा की गई सुविधा नहीं मिली। आर्थिक जोखिम और धीमी प्रक्रिया के कारण प्रोजेक्ट सुस्त पड़ा है, लेकिन भविष्य में चार और बसें जोड़ने की योजना है।
शहरवासियों को अब तक नहीं मिली नई सुविधा, छह महीने बाद भी बसें सड़कों पर नहीं उतरीं
द एक्सपोज लाइन न्यूज नेटवर्क, इंदौर।
देश का सबसे स्वच्छ शहर और स्मार्ट सिटी बनने की दिशा में अग्रसर इंदौर, अब भी अपने सार्वजनिक परिवहन प्रोजेक्ट्स में अधूरेपन का शिकार है। एक साल पहले इसका ट्रायल हुआ था और डबल डेकर बसों की शुरुआत की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक शहरवासियों को वादा की गई सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।
अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (#aictsl) ने छह महीने पहले डबल डेकर बस के लिए टेंडर जारी किया था, केवल एक बस चलाई जाना है, लेकिन उसके लिए भी ऑपरेटर नहीं मिला। अब एक बार फिर से टेंडर जारी किया गया है, जिससे यह सवाल उठता है — क्या यह योजना धरातल पर कभी सफल हो पाएगी? योजना का उद्देश्य था यात्रियों के लिए आरामदायक सफर, ध्वनि और प्रदूषण में कमी, और डबल डेकर डिज़ाइन के जरिए यात्री क्षमता दोगुनी करना। लेकिन यह सुविधा अब तक केवल कागजों में ही रही। लेकिन बसें अब तक नहीं आईं, जिससे यह योजना सिर्फ घोषणाओं तक ही सीमित रह गई।
क्या था प्रोजेक्ट का वादा?
एआईसीटीएसएल (#aictsl) ने अक्टूबर 2024 में डबल डेकर एसी इलेक्ट्रिक बस चलाने की योजना का ऐलान किया था। योजना थी —
- शुरुआत में चार बसें चलाई जाना थीं।
- चार क्लोज्ड डेक और एक ओपन डेक बसें, जिनमें पर्यटकों के लिए खास रूट होंगे।
- इलेक्ट्रिक बस के माध्यम से पर्यावरण अनुकूल और आधुनिक परिवहन।
- 10 साल का वार्षिक मेंटेनेंस अनुबंध, जिससे यात्रियों को खराबी जैसी परेशानी न झेलनी पड़े।
कहां अटक गया प्रोजेक्ट?
- आर्थिक जोखिम और प्रोजेक्ट की सफलता पर भरोसा न होने की वजह से शुरुआत में सिर्फ एक बस चलाने का फैसला।
- तय रूट — कुमेड़ी आईएसबीटी से टोल प्लाजा, एयरपोर्ट से बायपास, राजीव गांधी चौराहा से आईटी पार्क, और पर्यटकों के लिए ‘इंदौर दर्शन’ रूट।
- पहले टेंडर के छह महीने बाद भी बसें सड़कों पर नहीं उतरीं।
लोगों की सुविधा और शहर की उम्मीदें
डबल डेकर एसी ई-बस सेवा प्रधानमंत्री ई-बस योजना के तहत शुरू की जाना हैं। इससे:
- यात्रियों को गर्मी और उमस में आरामदायक सफर।
- इलेक्ट्रिक तकनीक के कारण कम प्रदूषण।
- शोर और ट्रैफिक में कमी।
- ज्यादा सीटें, जिससे निजी वाहनों की भीड़ घटे।
भविष्य की योजना और चुनौती
एआईसीटीएसएल (#aictsl) का कहना है कि टेंडर के बाद बस ऑपरेटर नियुक्त किया जाएगा। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। अगर यह परियोजना सफल रही, तो चार और डबल डेकर बसें चलाई जाएंगी।
फैक्ट बॉक्स: डबल डेकर बस योजना
- बस का प्रकार: 9 मीटर लंबी, एसी इलेक्ट्रिक।
- बैठने की क्षमता: निचला और ऊपरी डेक, दोगुने यात्री।
- रखरखाव: 10 साल का वार्षिक अनुबंध।
- एक बस की लागत करीब दो करोड़ रुपए।
- चार्जिंग: डिपो में फास्ट चार्जिंग स्टेशन।
लोगों की उम्मीद बनाम हकीकत
इंदौरवासी नई तकनीक और सुविधाओं के लिए हमेशा उत्साहित रहते हैं। मेट्रो, ई-बस, क्लीन सिटी जैसे अभियानों में उनका योगदान भी रहा है। लेकिन बार-बार घोषित योजनाओं के सुस्त अमल ने लोगों का भरोसा कम कर दिया है।
डबल डेकर बस प्रोजेक्ट न सिर्फ शहर की सुंदरता बढ़ा सकता था, बल्कि आम लोगों के रोज़मर्रा के सफर को आसान बना सकता था। अब यह देखना होगा कि टेंडर जारी होने के बाद यह योजना धरातल पर उतरकर वादे को पूरा करती है या नहीं।
इंदौर का डबल डेकर बस प्रोजेक्ट यह दिखाता है कि योजनाएं बनाना आसान है, लेकिन उन्हें सड़कों पर उतारना ही असली चुनौती है। बड़े वादे, आधा अमल — यही है इंदौर के कई सार्वजनिक परिवहन प्रोजेक्ट्स का हाल।
सिटी बस कंपनी के सीईओ का कहना है डबल डेकर बस के लिए दोबारा टेंडर किया गया है। जल्द ही बसें शहर की सड़कों पर नजर आएंगी।