सीट बेल्ट नहीं लगाना पढ़ सकता हे भारी
साइरस मिस्त्री की दुर्घटना से लेनी पड़ेगी सीख

द एक्सपोज़ लाइव न्यूज़ नेटवर्क
पालघर मुंबई में साइरस मिस्त्री की महंगी कार भी नहीं बचा पाई उनकी जान ,दोष कार को देना भी ठीक नहीं ! बेशक कार कीमती रही होगी ,सुरक्षा का सारे इंतज़ाम भी कार बनाने वाली कंपनी ने दिए थे फिर क्या हुवा कैसे हुवा यह समझने की ज़रूरत हे ! ऐसा पहेली बार नहीं हुवा हे की एक पढ़ा लिखा इंसान इस तरह की गलती कर बैठा ! अक्सर ईश्वर की उदृश्य सत्ता को चुनौती देते अंध गति से महंगी गाड़ियां भगाते हुए कई नवधनाठ्य सड़कों पर देखी जाते हैं ! तेज गति और कई और भी नशे में चूर यह लोग अक्सर यह भूल जाते हैं की "मति मर जाने पर गति दुश्मन होती हे " !
आज के युग में जहां पैसा बड़ी आसानी से लोगों के पास आने लगा हे लोगों में आधुनिक और महंगी चीजों के प्रति आकर्षण भी बड़ा हे लेकिन उन महंगी और आधुनिक चीजों को इस्तेमाल करने के तौर तरीके वह आज तक नहीं समझ पाए ! एक सामान्य सी बात हे कि भले ही गाड़ी महंगी हो उसमें सुरक्षा के लिए एयर बैलून भी लगे हो लेकिन वह तब तक चालू नहीं होते जब तक की सीट बेल्ट ना लगा हो क्यूंकि उसका सर्किट तभी पूर्ण होता हे जब सीट बेल्ट लगा हो ,यहाँ तक की गाड़ी पूर्ण क्षतिग्रस्त हो जाने पर अगर मालूम पड़ता हे की सीट बेल्ट नहीं लगा था तो बिमा कपनी भी बिमा नहीं देती हे ! अक्सर लोग यह चूक कर बैठते हैं और एयर बलून के भरोसे गाड़ी की गति तय सीमा से भी अधिक कर हादसों के शिकार हो जाते हैं ! कई सड़कों पर शासन प्रशासन द्वारा बोर्ड लगाकर गति सीमा, अंधे मोड़, सकरी पुलिया के बारे में आगाह भी किया जाता है लेकिन हम उसे भी नजरअंदाज कर देते हैं !
विज्ञान का सिद्धांत है कि कार के पीछे सीट पर बैठा हुआ आदमी जब कार दुर्घटनाग्रस्त होती है और उछाल कर वह सामने वाली सीट की तरफ जाता हे उसका वजन 40 गुना हो जाता हे यानी अगर 80 किलो का आदमी कार की पिछली सीट पर बैठा हो और कार सामने से टकराती है जैसे ही वह सीट से उछलकर आगे जाता हे तो वह 3200 किलोग्राम का हो जाता हे इसे गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत भी कहा जाता हे ! इसी कारण हर गाड़ी में पीछे की सीट पर भी सीट बेल्ट लगाए जाते हैं लेकिन हम उसका इस्तेमाल नहीं करते !
शासन प्रशासन हर बार सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाता हे जिसमें उसने अपने आप को गाड़ियों के कागजात चेक करने तक ही सीमित रखा हे और सड़क सुरक्षा वसूली सप्ताह बन कर रह जाता हे ! लोगों में जागरूकता के लिए आज तक कोई पहल नहीं की गई न ही उन्हें गाड़ी चलते वक़्त सुरक्षा के बारे में कोई ज्ञान दिया जाता हे !
बेशक यह जिम्मेदारी शासन प्रशासन की नहीं हे लेकिन अगर मानवता के नाते ही पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन जागरूकता की तरफ कोई कदम उठाता हे या सामाजिक संघठनों को इस और प्रेरित करता हे तो निश्चित तौर पर इस तरह के हादसे कम किए जा सकते हैं !