भगीरथपुरा काण्ड से ट्रेज़र टाऊन बिजलपुर में दहशत

100 करोड़ की अनियमितताओं के आरोपों के बीच फिर सुर्खियों में ट्रेजर टाउन, दूषित जल और ड्रेनेज संकट से उफनता जनआक्रोश

भगीरथपुरा काण्ड से ट्रेज़र टाऊन बिजलपुर में दहशत

एक्सपोज लाइव न्यूज नेटवर्क | इंदौर (Neeraj Dwivedi 9993949000)

इंदौर के बिजलपुर क्षेत्र में स्थित कलानी समूह की बहुचर्चित टाउनशिप ट्रेजर टाउन एक बार फिर गंभीर आरोपों और जनआक्रोश के केंद्र में आ गई है। करीब 100 करोड़ रुपये की अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतें अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थीं कि अब दूषित जल, ठप पड़ी ड्रेनेज व्यवस्था और सड़क पर बहते सीवरेज ने पूरे इलाके को भय और गुस्से में झोंक दिया है।

बीते कई महीनों से ट्रेजर टाउन की सड़कों पर खुलेआम बह रहा ड्रेनेज का पानी न केवल स्वच्छता के तमाम दावों की पोल खोल रहा है, बल्कि रहवासियों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए भी बड़ा खतरा बन चुका है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि आज बड़ी संख्या में आक्रोशित रहवासी बिल्डर कलानी समूह द्वारा क्लब हाउस में संचालित दफ्तर और उसके बाजू में पार्क की भूमि ( जिसे खुद बिल्डर द्वारा अनधिकृत तरीके से निजी हाथों में व्यवसायिक गतिविधियों को चलाने  के लिए किराये पर दे दिया ,इतना ही नहीं क्षेत्रीय जनप्रतनिधि से कह कर निगम से शेड बनाने के लिए राशि भी लगवा ली जबकि बगीचे के भूखंड पर ऐसा किया ही नहीं जा सकता ) पर चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठान पर ताले लगाने पहुँच गए।

“शिकायतें सही पाई गईं, फिर भी कार्रवाई शून्य”

प्रदर्शन कर रहे रहवासियों का कहना है कि वे महीनों से बिल्डर, नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, विद्युत मंडल और अन्य संबंधित विभागों में लगातार शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। कई मामलों में शिकायतें सही भी पाई गईं, लेकिन इसके बावजूद न तो प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई की और न ही बिल्डर ने समस्याओं के समाधान की गंभीर कोशिश की।

रहवासियों का सीधा आरोप है कि बिल्डर के रसूख और ‘शिष्टाचार के दबाव’ के आगे अधिकारी आज भी नतमस्तक नजर आ रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति हो रही है, जबकि जमीनी हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं।

एसटीपी फेल, सड़क पर बहता सीवरेज

स्थानीय लोगों के अनुसार, ट्रेजर टाउन में लगाया गया एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) लंबे समय से सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। यही वजह है कि बिना उपचारित गंदा पानी सीधे सड़कों और खुले स्थानों पर बह रहा है। इस मुद्दे को लेकर मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तक शिकायतें की जा चुकी हैं, जिसके बाद बोर्ड द्वारा बिल्डर पर 25 लाख रुपये की पेनल्टी भी लगाई गई।

इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं, जो यह सवाल खड़ा करता है कि क्या जुर्माना केवल औपचारिकता बनकर रह गया है?

सीएम हेल्पलाइन भी बेअसर?

रहवासियों का यह भी आरोप है कि उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर कई बार शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन वहां भी मामलों को बिना समाधान के “फोर्स क्लोज” कर दिया गया। इससे आम नागरिकों का सिस्टम से भरोसा लगातार टूटता जा रहा है।

भागीरथपुरा हत्याकांड की छाया में बढ़ता डर

हाल ही में शहर में हुए भागीरथपुरा हत्याकांड के बाद ट्रेजर टाउन के रहवासी और अधिक सहमे हुए हैं। उनका कहना है कि जब प्रशासन समय रहते छोटी समस्याओं पर ध्यान नहीं देता, तो वही लापरवाही आगे चलकर बड़े और भयावह कांडों की वजह बनती है।

बड़ा सवाल – प्रशासन कब जागेगा?

आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रेजर टाउन के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कभी जवाबदेही तय होगी? क्या बिल्डर के रसूख से ऊपर उठकर प्रशासन कानून के मुताबिक कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?

ट्रेजर टाउन के रहवासी आज भी “नरक जैसी जिंदगी” जीने को मजबूर हैं—जहाँ गंदा पानी, बदबू, बीमारी का डर और प्रशासनिक उदासीनता रोजमर्रा की सच्चाई बन चुकी है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है, या फिर एक और मामला सिस्टम की बेरुखी की भेंट चढ़ जाएगा।

उक्त बिल्डर और कॉलोनी की समस्या समय समय पर हम प्रकाशित करते आये हैं ,कई आगामी प्रोजेक्ट्स को ले कर भी कई शिकायत सामने आयी हैं जिसकी पुष्टि होते ही हम प्रमुखता से प्रकाशित करेंगे। समय समय पर सम्बन्ध में प्रकाशित की जा चुकी ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे  दी गयी लिंक पर क्लिक करें