सुर-ताल कला संस्थान की संगीतमय पेशकश

‘तू चंदा में चांदनी’—सुरों, संवेदनाओं और यादों की अविस्मरणीय शाम ,सुर-ताल कला संस्थान द्वारा प्रस्तुत लाइव म्यूज़िकल कार्यक्रम “तू चंदा में चांदनी” ने बुधवार संध्या को अभिनव कला समाज सभागृह में संगीत-प्रेमियों के मन को छू लिया। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भावनाओं, स्मृतियों और रिश्तों की सुरमयी यात्रा थी—जहाँ हर गीत ने किसी न किसी स्मरण को छेड़ा।

सुर-ताल कला संस्थान की संगीतमय पेशकश

एक्सपोज लाइव न्यूज नेटवर्क इंदौर

कार्यक्रम का शुभारंभ स्टेट प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खरीवाल एवं शिवसेना प्रदेश प्रभारी सुरेश गुर्जर की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। शहर के कला-संस्कृति से जुड़े सुनील जैन ,राजेश शर्मा ,संजय कटारिया (पूर्व पार्षद ) ,मुकेश वर्मा,दिनेश पालीवाल  एवं अनेक गणमान्य नागरिकों, संगीत साधकों और रसिकों की उपस्थिति ने वातावरण को और भी गरिमामय बना दिया।

कार्यक्रम की थीम “तू चंदा में चांदनी” को बड़ी खूबसूरती से उस कालजयी भाव के साथ जोड़ा गया, जिसे एक प्यार का नगमा है जैसे गीत सदियों तक जीवित रखते हैं। चांद–चांदनी की तरह ही प्रेम और संगीत—अलग होकर भी एक-दूसरे में समाए हुए—इस शाम के हर पल में महसूस किए गए। मंच से गूंजती प्रेरक पंक्तियाँ “जो गीत नहीं जन्मा, वह गीत बनाएंगे” मानो इस संकल्प की उद्घोषणा थीं कि संगीत समय से परे है, और उसकी रोशनी हर दिल तक पहुँचती है।

वायलिन के दिग्गज साबिर खान की सधी हुई तानों के साथ निर्मला परमार एवं संतोष मोठ की भावपूर्ण जुगलबंदी ने “एक प्यार का नगमा है” को नए रंग दिए—कभी धीमी चांदनी-सी, तो कभी स्मृतियों की लहर-सी। यही वह क्षण था जब सभागृह एक साथ साँस लेता प्रतीत हुआ। इसके बाद प्रस्तुत “तुमने कभी किसी से प्यार किया है” ने तालियों की गूंज के साथ उत्साह का संचार किया और श्रोताओं को सहभागिता के लिए प्रेरित किया।

ताल-वाद्य पर अशोक पांचाल की सशक्त और सटीक ड्रमिंग ने कार्यक्रम में लयात्मक ऊर्जा भरी। शरद खंडेलवाल की जादुई आवाज़ में “बहोशों हवाश में दीवाना, आज वसीयत करता हूँ” ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। नवोदित गायक महेंद्र त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत “दिल ढूंढता है फिर वही फुर्सत के रात दिन” ने श्रोताओं को संजीव कुमार और शर्मिला टैगोर अभिनीत फ़िल्म आंधी की यादों में पहुँचा दिया—जहाँ संगीत एक सुकून बनकर ठहरता है।

वहीं जीतेन्द्र पाल की आवाज़ में “मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू” ने पूरे सभागृह में रोमांच और मधुर स्मित बिखेर दिया। समापन क्षणों में शुभी चौहान एवं निर्मला परमार द्वारा प्रस्तुत “मन क्यों बहका रे बहका आधी रात को” ने कार्यक्रम को ऐसी ऊँचाई दी कि श्रोता खड़े होकर तालियाँ बजाने को विवश हो गए। यह वही क्षण था जहाँ “तू चंदा में चांदनी” की थीम पूरी तरह साकार हुई—संगीत, प्रेम और स्मृति एक-दूसरे में घुलकर अमर हो गए।

कार्यक्रम के दौरान आयोजक निर्मला परमार एवं संतोष मोठ को निरंतर बधाई संदेश प्राप्त होते रहे। श्रोताओं ने सुर-ताल कला संस्थान से भविष्य में भी ऐसे उच्च स्तरीय, थीम-आधारित संगीतमय आयोजनों की अपेक्षा जताई। यह शाम प्रमाण बन गई कि जब गीत में भाव, सुर में सादगी और प्रस्तुति में आत्मा हो—तो संगीत चांदनी बनकर हर दिल पर उतरता है।