नौ महीने में 54 हजार से अधिक दो पहिया चालकों के बने बिना हेलमेट चालान
इंदौर में नौ महीने में 54 हजार से अधिक दोपहिया चालकों के बिना हेलमेट जारी किए गए। प्रशासन की सख्ती के बावजूद जुगाड़ के तरीके अपनाने और नियमों की लापरवाही के कारण हेलमेट मुहिम बार-बार विफल रही। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने हेलमेट पहनना अनिवार्य बताते हुए ISI मार्क की गुणवत्ता पर ध्यान देने का निर्देश दे रखे हैं, लेकिन इंदौर में हर बार ये मुहिम फेल होती है और लोग भी जागरूक होना पसंद नहीं कर रहे।
इंदौर में ‘नो हेलमेट-नो पेट्रोल’ एक बार फिर साबित हुआ फ्लॉप शो, नौ महीने में ही बने रिकॉर्ड चालान, पिछले साल से 34 फीसदी ज्यादा
द एक्सपोज लाइव न्यूज नेटवर्क, इंदौर।
इंदौर में प्रशासन द्वारा लागू की गई ‘नो हेलमेट–नो पेट्रोल’ मुहिम और ट्रैफिक [नियमों #TrafficRules] की कड़ी निगरानी के बावजूद, बिना हेलमेट [चालानों #Challan] में इस साल अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ट्रैफिक विभाग [#TrafficDepartment] के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2025 तक बिना हेलमेट चालानों की संख्या 54 हजार 516 रही, जबकि पिछले साल पूरे साल में यह संख्या 41 हजार 290 थी। इसका मतलब है कि सिर्फ नौ महीने में ही पिछले पूरे साल से ज्यादा चालान कट चुके हैं।
इस साल का आंकड़ा पिछले 12 महीनों की तुलना में करीब 32 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़ोतरी केवल पुलिस की ढील का ही परिणाम नहीं है, बल्कि लोगों की नियमों के प्रति लापरवाही और जुगाड़ [#Jugaad] अपनाने की प्रवृत्ति भी इसके पीछे बड़ी वजह है। इंदौर में ‘नो हेलमेट–नो पेट्रोल’ मुहिम के बावजूद आंकड़े यह बता रहे हैं कि सड़क सुरक्षा [#RoadSafety] पर लोगों की सोच अभी भी उतनी बदल नहीं पाई है। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई दो महीने बाद ही ठप हो गई। और लोग अभी भी नियम का पालन करने की बजाय बिना सुरक्षा के रोक-टोक घूम रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार जागरूकता अभियान, हेलमेट की सस्ती उपलब्धता और स्कूल-कॉलेज स्तर पर ट्रैफिक [शिक्षा #TrafficEducation] के बिना सड़क सुरक्षा में सुधार मुश्किल है।
जुलाई 2025 में शुरू हुई थी मुहिम
जिला प्रशासन ने 30 जुलाई 2025 को आदेश जारी किया था कि 1 अगस्त 2025 से शहर के सभी पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट आने वाले किसी भी दोपहिया वाहन चालक को ईंधन नहीं दिया जाएगा। आदेश के मुताबिक, उल्लंघन करने वाले पंप मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। शुरुआती हफ्तों में कई पंपों पर पुलिस की निरीक्षण टीम ने कार्रवाई की और कुछ पंपों को अस्थायी रूप से सील भी किया गया। पर ये मुहिम मात्र दो महीने ही चल पाई। भारी विरोध के चलते अक्टूबर से इस आदेश को हटा लिया गया। इसके बाद बिना हेलमेट पेट्रोल दिया जाने लगा।
लोगों ने अपनाए जुगाड़ के तरीके
हालांकि, इस नीति के लागू होने के बावजूद लोगों ने नियमों का पालन पूरी तरह नहीं किया।
- कई लोग हेलमेट साथ लेकर पेट्रोल पंप पर आते थे, लेकिन वाहन पर नहीं पहनते थे।
- कुछ ने सिर ढकने के लिए टोकरी, बर्तन या डिब्बे के ढक्कन तक इस्तेमाल करने की कोशिश की।
- सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें लोग नियम का केवल दिखावा कर रहे थे।
इस तरह के नकली पालन की वजह से प्रशासन की सख्ती के बावजूद सड़क पर असल में हेलमेट पहनने की आदत नहीं बनी। बाद में हर बार की तरह प्रशासन ने खुद ही नियम में ढील दे दी। हालांकि अलग-अलग चरणों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन उसका कोई असर होता नजर नहीं आ रहा है।
अगस्त 2025 में लागू हुआ ‘नो हेलमेट–नो पेट्रोल’ आदेश दो महीने में ही ठंडा पड़ गया। यही हाल पहले भी देखा गया है, हर बार आदेश जारी होते ही बड़ी शोर-शराबा होती है, लेकिन सड़क पर वास्तविक सख्ती नहीं रहती, और हेलमेट मुहिम बार-बार विफल हो जाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल आदेश जारी करना और मीडिया कवरेज करना काफी नहीं है; जब तक निगरानी और वास्तविक प्रवर्तन नहीं होगा, सड़क सुरक्षा केवल कागजों पर ही रहेगी।
चालान बढ़ने के पीछे के कारण
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, चालान बढ़ने की मुख्य वजहें हैं:
- सख्त निगरानी: अब ई-चालान ई-चालान [#EChallan], रैपिड ड्राइव [#RapidDrive] और सीसीटीवी निगरानी [#CCTVMonitoring] से हर चौराहे पर नजर रखी जा रही है।ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, चालान बढ़ने की मुख्य वजहें हैं।
- लापरवाही: लोग जानते हुए भी नियम नहीं मान रहे।
पिछले सालों के आंकड़े भी इस रुझान को दर्शाते हैं:
- 2021: 23,327 चालान
- 2022: 39,063 चालान
- 2023: 46,761 चालान
- 2024: 41,290 चालान
2025 में नौ महीने में ही आंकड़ा 54,516 तक पहुँच गया, जो पिछले साल के पूरे साल की संख्या से अधिक है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
- पेट्रोल पंपों पर विशेष निरीक्षण और ट्रैफिक टीमों की तैनाती की गई।
- ई-चालान और लाइव सर्विलांस सिस्टम [#SurveillanceSystem] के माध्यम से हर सड़कों पर निगरानी बढ़ाई गई।
- अधिकारियों का कहना है कि “कागज़ी पालन” से सड़क सुरक्षा नहीं बढ़ेगी, इसलिए लगातार अभियान और चालान दोनों जारी रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन
- सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हेलमेट पहनना दो-पहिया वाहन चालकों और सवारियों दोनों के लिए अनिवार्य है।
- अदालत ने राज्यों को निर्देश दिया है कि ट्रैफिक सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू करें और हेलमेट की गुणवत्ता (ISI मार्क) पर भी ध्यान दें।
- कोर्ट ने कहा है कि सड़क सुरक्षा केवल चालान से संभव नहीं है, बल्कि जागरूकता और व्यवहारिक पालन से ही लंबी अवधि में असर पड़ेगा।
विशेषज्ञों की राय
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चालान और आदेशों से काम नहीं चलेगा। वास्तविक बदलाव तब आएगा जब लोग हेलमेट पहनने को सिर्फ नियम का पालन नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम मानें।
