निगम अधिकारियों और सी एम एच ओ की मिलीभगत से अवैध रूप में संचालित हो रहा अवैध कैंसर हॉस्पिटल
मामला देवी अहिल्या चैरिटेबल हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर जो कि संस्था पैरामेडिकल टेक्नोलॉजी ऑर्गेनाइजेशन ऑफ एमपी के अंतर्गत बताया जाता है ! जिस भूमि पर अस्पताल संचालित हो रहा है वह भूमि फर्जी तौर पर अपने आप को डॉक्टर घोषित कर रहे एवं धोखाधड़ी के आरोपी अजय हार्डिया के नाम पर दर्ज है !

अजय हार्डिया ने वर्ष १९९६ में केवल कृष्ण खोसला से कुल मिलाकर ३६८० स्क. फी. प्लॉट खरीदा था जिस का कुल क्षेत्रफल ७३०० वर्ग फिट हुआ करता था ३६८० स्क. फी. केवल कृष्ण खोंसला के नाम पर ही दर्ज था जिस पर दोनों के द्वारा सम्मिलित रूप से ७३०० वर्ग फीट का नक्शा वर्ष १९९६ में निगम से स्वीकृत कराया गया ! निगम द्वारा भूतल पर पार्किंग रखने की शर्त पर लगभग ७८ वर्ग मीटर की अनुमति एवं प्रथम ,द्वितीय और तृतीय मंजिल पर लगभग २५०० वर्ग फिट निर्माण की अनुमति निगम द्वारा दी गई! मतलब सम्पूर्ण प्लाट पर लगभग ९००० स्क .फि. की अनुमति प्रदान की गयी
वर्ष १९९८ मे केवलकृष्ण खोंसला के नाम पर दर्ज ३६८० वर्ग फीट हिस्सा अजय हार्डिया द्वारा बंसल बंधुओं से अपनी संस्थादेवी अहिल्या चैरिटेबल हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर के नाम पर क्रय किया गया जिस पर केवलकृष्ण खोंसला के नाम पर भवन अनुमति अजय हार्डिया के साथ पहले ही दी जा चुकी थी !
वर्ष २००१ में अजय हार्डिया द्वारा संपूर्ण ७३०० वर्ग फिट का नक्शा रिन्यू कराने का आवेदन अपनी संस्था के नाम से दिया गया जिसका दाखिला क्रमांक १४३२ दी. ३१/१२/२००१ था जिसमे भूखंड का क्षेत्रफल ६८२.७५ वर्ग मीटर और एफ ए आर १.५ था ! जिसके हिसाब से ९०९. ११ स्क्वेयर मीटर निर्माण की अनुमति दी गई थी अनुमति में स्पष्ट तौर पर शर्तें भी लिखी गई थी जिसमें भूतल पर पार्किंग स्वीकृत किया गया था और संपूर्ण भवन आवासीय उपयोग हेतु स्वीकृत हुआ था ! अनुमति में जो भी शर्तें लिखी गई थी उन्हें विलोपित करते हुए मेडिपर्ल हॉस्पिटल की अनुमति ले ली गई इसके अलावा उसी प्लाट पर कॉलेज के अनुमति लेते वक़्त मूल विक्रय पत्र जो की केवल कृष्ण खोंसला के नाम पर दर्ज हे उसमे कूल रकबे (७३०० स्क.फि. ) को एक लाख स्क.फी दिखा दिया गया एवं भू उपयोग भी शैक्षणिक बता करा गुमराह करते हुए बड़ा फर्जीवड़ा किया गया ! जिस पर नर्सिंग कौंसिल और रजिस्ट्रार पैरामेडिकल कॉंन्सिल की भूमिका भी स्पष्ट तौर पर संदिघ्ध साबित हो रही हे ! संपूर्ण मामले में भंवरकुआं थाने में एफआईआर वर्ष २०१८ में दर्ज की गई जिसमें निगम द्वारा जवाब देते हुए लिखा गया कि निगम ने सिर्फ तृतीय मंजिल की स्वीकृति संस्था के नाम पर प्रदान की है वह भी आवासीय उपयोग हेतु ! अर्थात भूतल ,प्रथम एवं द्वितीय मंजिलों की स्वीकृति अजय हार्डिया के नाम पर दी गई थी! यहां पर भी निगम के अधिकारियों द्वारा थाने में जो पत्र दिया गया उसमें भूतल का उल्लेख ना करते हुए उसे तल मंजिल बता दिया क्या जो एक बड़ी मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है जिस पर पुलिस प्रशासन भी मौन है!
मिलीभगत की पराकाष्ठा इतनी कि निगम अधिकारी जानते हुए भी मौन
अजय हार्डिया द्वारा उक्त भूमि पर कॉलेज एवं हॉस्पिटल की परमिशन लेने के लिए बाकायदा निगम में दो खाते खोले गए जिसका आज दिनांक तक संपत्ति कर भी भरा जा रहा है एक खाता स्वयं के नाम पर और एक खाता उसकी संस्था के नाम पर मौजूद है जिसमें प्लॉट नंबर भी से में क्षेत्रफल भी सेम है और नक्शे अलग अलग नाम से मौजूद है मौके पर भवन भी दो बना लिए गए अर्थात एक प्लॉट दो नक्शे और दो भवन! एक ऐसा ही मामला कुछ ही दिनों पहले ग्रेटर ब्रजेश्वरी कॉलोनी में एक भवन निगम द्वारा जमीन दोज भी किया जा चुका है लेकिन संस्थापक अभी भी निगम के अधिकारियों का आशीष प्राप्त हो रहा है
जांच में यह भी स्पष्ट है अजय हार्डिया द्वारा नजूल की भूमि पर भी कब्जा किया गया है जिस पर भी शासन प्रशासन मौन है , मौके पर पूरा निर्माण नियमों के विरुद्ध किया गया वही अजय हडिया द्वारा अपने पड़ोसी शिरीष गोयल के प्लॉट पर भी लगभग १०० वर्ग फीट भूमि पर अवैध कब्जा किया जा चुका है जिसकी शिकायत में कई बार निगम के अधिकारियों भवर कुआं थाना मैं कर चुके हैं जिस पर भी आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं की गई !
जिले के सीएमएचओ द्वारा अजय हार्डिया के मामले में स्पष्ट तौर पर बताया गया है की उसे डॉक्टर लिखने का कोई अधिकार प्राप्त नहीं है और ना ही कानूनी तौर पर वह डॉक्टर है लेकिन फिर भी वर्तमान सीएमएचओ द्वारा कोई कार्यवाही उसके ऊपर नहीं की जा रही है ! एक ऐसे ही मामले में अजय हार्डिया पर शिप्रा थाने में धारा 420, 467, 468 और 471 मैं दर्ज एक मामले में सीएमएचओ द्वारा अजय हार्डिया के डॉक्टर होने की जानकारी सीएमएचओ से मांगी तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा यह जानकारी मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विभाग भोपाल से प्राप्त की जा सकती है जबकि झोलाछाप डॉक्टरों को पकड़ने का काम सीएमएचओ के कार्य क्षेत्र में आता है स्पष्ट है अजय हार्डिया कि पहुंच नर्स सिर्फ निगम, सहकारिता विभाग बल्कि सीएमएचओ कार्यालय और भोपाल तक है ! अजय हार्डिया की संस्था क्योंकि भोपाल में पंजीकृत है इसलिए इंदौर सहकारिता विभाग भी कार्रवाई से पल्ला झाड़ रहा है !
इंदौर विश्व विद्यालय और जिला कलेक्टर भी दर्ज करवा चुके हे अजय हार्डिया पर एफ. आई आर
अभी तक अजय हार्डिया पर विभिन्न धाराओं में कुल ५ एफ. आई आर दर्ज हे जिसमे से ३ पर वह जमानत पर हे और २ पर जमानत होना बाकि हो कर अभी तक फरार हे ! पुलिस द्वारा अभी तक उसकी गिरफ्तारी के लिए कोई कार्यवाही नहीं की जा रही हे !