सदी का महानायक आज इंदौर में
एंग्री यंग मेन से बने बिग बी और अब युथ आइकॉन अमिताभ बच्चन आज करेंगे कोकिलाबेन अस्पताल का उद्घाटन

द एक्सपोज़ लाइव न्यूज़ नेटवर्क इंदौर
आज सदी के महानायक अमिताभ बच्चन टीना अम्बानी के साथ कोकिला बेन अस्पताल का उद्घाटन करने इंदौर पहुँच रहे हे ! इंदौर में ४ बजे वे उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे !
वैसे तो अमिताभ का जीवन भी किसी हिंदी फिल्म के क्लाइमेक्स से कम नहीं हे ,एक साधारण व्यक्ति से कई बार असफल होने के बाद सुपर स्टार बन जाना ,उनकी एक के बाद एक सुपर हिट फिल्मे जो आज भी कई बार देखने के बावजूद नई सी लगती हैं ! हर किरदार में एक नई झलक एक नया अंदाज़ ! १९७० में जज़ीर ,दीवार और शोले जैसी सुपर हिट फिल्मों ने अमिताभ को एक सुपर स्टार बना दिया ! १९८४ में भारत सरकार ने उन्हें पदमश्री से नवाज़ा ,२००१ में पदम्भूषण और २०१५ में पदम् विभूषण से अलंकृत भी किया ! इतना ही नहीं दुनिया के कई देशों ने अमिताभ को कई सम्माननीय पुरस्कारों से नवाज़ दिया !
पूरी दुनिया को अपने अभिनय का लोहा मनवा देने वाले अमिताभ के जीवन में एक मुश्किल दौर भी आया ,वो दौर ऐसा था की एक सुपर स्टार के जीवन से सब कुछ छीन गया ! कमाई दौलत ,कमाया नाम कई जगह तो कमाई इज़्ज़त भी दांव पर लग गयी ! मझधार में अमिताभ के साथ अगर कोई बचा तो बस सिर्फ अभिनय कला ,उनका परिवार, कुछ दोस्तों का साथ और सबसे बड़ा उनका " होंसला "! कहते हैं वो दौर इतना खतरनाक था की एक आम आदमी सहन करना तो दूर सोच कर भी घबरा जाता ! हर जगह अगर कोई बात होती तो सिर्फ उनकी नाकामी की ,कर्जदारों के तगादे कहीं भी कोई काम नहीं ,१९७० के पहले के संघर्ष भरे जीवन से भी खतरनाक संघर्ष भरा जीवन,चारों तरफ घनघोर अँधेरा ,फिल्म निर्माताओं का अविश्वाश !
नाकामी के उस दौर में अमिताभ को कुछ याद रहा तो सिर्फ उनके पिता की लिखी हुई वो पंक्ति
“असफलता एक चुनौती हैं, स्वीकार करो क्या कमी रह गयी,
देखो और सुधार करो जब तक न सफल हो,
नींद चैन को त्यागो तुम संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो ,
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती
कोशिश करनेवालों की हार नहीं होती।”
अमूमन देखने को मिलता हे की असफलता के तूफान में बड़े बड़े योद्धा हार जाते हे ,होंसलों को पस्त कर देते हैं हालातों से समझौता कर लेते हैं ! लेकिन अमिताभ तो फिर अमिताभ (अति कांतियुक्त, अत्यंत तेजस्वी ) ही हैं,आखिर अपने नाम की सार्थकता को भी तो उन्हें सिद्ध करना ही था , वे फिर लड़े फिर चले और फिर फिल्मों की आकशगंगा में एक सुपर स्टार बन अपनी एक जगह बना ली !
तू खुद की खोज मैं निकल
तू किस लिए हताश हैं
तू चल, तेरह वजूद की
समय को भी तलाश हैं
नाकामी की "ज़जीर" से बहार आकर मुश्किलों की "दीवार " फांद अमिताभ फिर एक "शोला" बन गए ,उन्होंने साबित कर दिया की भले ही सब कुछ ख़तम हो जाये अगर होंसला ख़तम हो जाये तो जीवन में कुछ नहीं बचता और अगर ज़िंदा हे तो खोई हुई सल्तनते भी वापस ली जा सकती हे !
हिन्दुतान के युथ आइकॉन ,बिग बी ,शहंशाह का हिन्दुस्तान के दिल और सबसे स्वच्छ शहर में स्वागत ,वंदन अभिनन्दन !