इंदौर से सटे ग्राम मुरादपुरा के भूमाफियों की जमानत हुई ख़ारिज

जमीनी जादूगरी में शामिल आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका हाई कोर्ट ने भी ख़ारिज की । बेशकीमती ज़मीन की हेराफेरी में महिलाएं भी शामिल , संभवत शासन को भी किया राजस्व का नुकसान

इंदौर से सटे ग्राम मुरादपुरा के भूमाफियों की जमानत हुई ख़ारिज
courtesy:Quora

द एक्सपोज़ लाइव न्यूज़ नेटवर्क इंदौर 

मामला सांवेर तहसील के ग्राम मुरादपुर की भूमि के संबंध मै दर्ज़ एफ आई आर 257/23 थाना रावजी बाजार इंदौर का ! उक्त प्रकरण में हाई कोर्ट इंदौर में इंदर बाई बेवा गुलाबसिंह , भूरी बाई , उषा बाई पिता  स्वर्गीय गुलाब सिंह की अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज कर दी ।

क्या हे पूरा मामला ?

दरअसल स्व गुलाब सिंह द्वारा ज़मीन का मुँह बदला फरियादी दिनेश ब्राह्मण द्वारा वर्ष 2003 में ही कर लिया गया था ,जिसमे खेती में सहूलियत की दृष्टि से दिनेश ब्राह्मण की ज़मीन स्व गुलाब सिंह ने ली और गुलाब सिंह की ज़मीन फरियादी दिनेश ने !आज तक दोनों ही अपनी अपनी भूमियों पर खेती करते आ रहे हैं ! स्व गुलाब सिंह द्वारा बैंक से पूर्व से ही क़र्ज़ लिया गया था जिसे उनके स्वर्गवासी होने तक भी वारिसों दरबार सिंह द्वारा नहीं चुकाया गया था इसीलिए ज़मीन की रजिस्ट्री भी दिनेश द्वारा अपने पक्ष में नहीं की जा सकी थी,और बार बार संपर्क करने पर दरबार सिंह द्वारा   आश्वाशन ही दिया जाता रहा ,स्व गुलाब सिंह के वारिसों की नीयत में खराबी को समझते हुए दिनेश द्वारा सिविल सूट भी उक्त भूमि के सम्बद्ध में दायर किया गया ! सिविल सूट के रहते सत्य छुपाते हुवे रजिस्ट्री करने पर फरियादी को पुलिस की भी शरण लेनी पड़ी। क्योंकि  ज़मीन किसी तीसरे पक्ष  (दीपक और जगदीश चौधरी ) को बेच दी गयी ! रजिस्ट्री करते वक़्त दरबार एवं अन्य द्वारा झूठा शपथ पत्र भी दिया गया ।    

जमानत ख़ारिज होने का कारण यह भी 

रजिस्ट्री के समय दरबार एवं अन्य  द्वारा असत्य शपथ पत्र प्रस्तुत किए थे और जिस भूमि को इनके द्वारा  दीपक और जगदीश चौधरी को बेची थी उसका कब्ज़ा भी इनके पिता और पति द्वारा वर्ष 2003 में ही फरियादी दिनेश को दे दिया था। इसके बाद भी ज़मीन असत्य जानकारी देकर बेच दी थीं ! पुलिस द्वारा पूछताछ हेतु बुलाने पर एवम् एफआईआर के बाद गैरहाज़िर  होने के कारण  दरबार सिंह एवं अन्य को पुलिस द्वारा 30/9/2023 को फरार घोषित कर  2000 रु  का इनाम भी घोषित कर दिया गया । इसलिए हाई कोर्ट द्वारा इन्हें अग्रिम ज़मानत का लाभ नहीं दिया गया।

ज़मीन 35 लाख बीघा में बेचीं और 5 बीघा ज़मीन की रजिस्ट्री कुल 35 लाख चालीस हज़ार लिखा ।

एक्सपोज़ लाइव की पड़ताल में खुद दरबार सिंह द्वारा तथ्यों का खुलासा करते हुए 35 लाख बीघा में ज़मीन बेचना कबूल किया गया है ।यदि ऐसा है तो कलेक्टर ऑफ़ स्टैंप एक्ट के तहत् भी उल्लघन पाया जायेगा क्योंकि रजिस्ट्री में भूमि की कुल कीमत मात्र35 लाख चालीस हजार ही लिखी है जिससे शासन को भी राजस्व की बड़ी हानि हुई हे जिसकी जांच अगर होती हे तो एक बड़ा भ्रष्टाचार भी सामने आ सकता हे ! इतना ही नहीं तीसरा पक्ष जो बेशक कागज़ों पर कहीं नहीं है पर यदि सूक्ष्म पड़ताल हुई तो अवश्य सामने आ सकते है क्योंकि एक बड़ी राशि का भुगतान भी उसके द्वारा दरबार सिंह को दिया गया है जो एफआईआर के अनुसार सामने आना बाकी है ! इतना ही नहीं पुलिस द्वारा अभी तक खरीददार और तीसरे पक्ष पर कोई FIR दर्ज नहीं की गयी है जिनके द्वारा भी कानूनी प्रावधानों का सीधा सीधा उल्लंघन  दस्तावेजों में किया है और विधिक प्रावधानों के अनुसार वो भी पुरे मामले में बराबर के दोषी साबित हो रहे हैं !