फिल्म रिव्यू: 'धमाल 4' में कॉमेडी का फुल डोज, लॉजिक नहीं हंसी ढूंढेंगे तो पैसा वसूल!

धमाल 4 रिव्यू: अजय देवगन, अरशद वारसी और रितेश देशमुख स्टारर धमाल 4 एक हल्की-फुल्की फैमिली एंटरटेनर है। कहानी में नया कुछ नहीं, लेकिन कॉमिक सीन्स और कलाकारों की शानदार टाइमिंग फिल्म को मनोरंजक बनाती है। जानिए फिल्म देखनी चाहिए या नहीं।

फिल्म रिव्यू: 'धमाल 4' में कॉमेडी का फुल डोज, लॉजिक नहीं हंसी ढूंढेंगे तो पैसा वसूल!

अजय देवगन, अरशद वारसी और रितेश देशमुख की तिकड़ी ने फिर मचाया धमाल, कहानी में नया कुछ नहीं लेकिन कॉमिक सीन्स हंसने पर मजबूर कर देते

रेटिंग: ⭐⭐⭐☆ ☆ (3/5)

निर्देशक: इंद्र कुमार

निर्माता: अजय देवगन, भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, अशोक ठकेरिया, इंद्र कुमार, आनंद पंडित, कुमार मंगत पाठक

लेखक: परितोष पेंटर, वेद प्रकाश, बंटी राठौड़

कलाकार: अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी, जावेद जाफरी, संजय मिश्रा, रवि किशन, उपेंद्र लिमये, ईशा गुप्ता, संजीदा शेख, अंजलि आनंद, विजय पाटकर समेत कई अन्य कलाकार।

अवधि: 2 घंटे 23 मिनट

सेंसर सर्टिफिकेट: UA 13+

First Impression

अगर आप थिएटर में Christopher Nolan वाला लॉजिक लेकर जा रहे हैं... तो भाई, पहले ही बता देते हैं—गलत स्क्रीन में घुस गए हो। 

लेकिन अगर आपका मकसद सिर्फ हंसना, एंटरटेन होना और दो-ढाई घंटे तक दिमाग को छुट्टी देना है... तो धमाल 4 आपको निराश नहीं करेगी।

ये फिल्म लॉजिक से नहीं... कॉमिक टाइमिंग और पागलपन से चलती है।

Story: कहानी बहाना है... हंसी कमाना है!

कहानी एक बार फिर खजाने की तलाश के इर्द-गिर्द घूमती है।

अब इसमें कितना लॉजिक है, ये पूछना वैसा ही है जैसे धमाल देखकर Physics के नियम ढूंढना।

फिल्म का मकसद साफ है—हर थोड़ी देर में कोई नई गड़बड़, नया कन्फ्यूजन और ऐसा सीन जहां थिएटर में हंसी अपने आप निकल जाए। और अच्छी बात ये है कि इस बार ऐसे सीन्स की कमी नहीं है।

Acting: पूरी गैंग फुल ऑन फॉर्म में! 

अजय देवगन अपने शांत अंदाज में भी खूब हंसाते हैं... लेकिन असली मजा तब आता है जब अरशद वारसी, जावेद जाफरी, रितेश देशमुख और संजय मिश्रा स्क्रीन पर साथ होते हैं।

इनकी कॉमिक टाइमिंग कई जगह फिल्म को अगले लेवल पर ले जाती है।

हर कलाकार अपना रोल एंजॉय करता दिखता है और वही मजा दर्शकों तक भी पहुंचता है।

Direction: लॉजिक नहीं... लाफ्टर चाहिए!

इंद्र कुमार जानते हैं कि लोग धमाल देखने क्यों आते हैं

उन्होंने फिल्म को ज्यादा गंभीर बनाने की कोशिश नहीं की।

हां, कुछ जगह कहानी ढीली पड़ती है और कुछ जोक्स पहले से अंदाजा लग जाते हैं... लेकिन कॉमेडी का फ्लो बना रहता है, इसलिए फिल्म बोर नहीं होने देती।

Music & Technical

गाने ठीक-ठाक हैं, लेकिन फिल्म की असली ताकत इसका बैकग्राउंड स्कोर और कॉमिक प्रेजेंटेशन है।

लोकेशंस अच्छी हैं, विजुअल्स रंगीन हैं और फिल्म पूरे समय हल्का-फुल्का माहौल बनाए रखती है।

क्या सही लगा? 

  • कॉमिक सीन्स की भरमार।
  • अरशद वारसी, जावेद जाफरी, रितेश देशमुख और संजय मिश्रा की शानदार टाइमिंग।
  • फैमिली के साथ बैठकर देखने लायक क्लीन एंटरटेनमेंट।
  • कई जगह थिएटर में खुलकर हंसी निकलती है।
  • पूरी फिल्म में मस्ती वाला फील बना रहता है।

क्या थोड़ा खटका? 

  • कहानी बहुत नई नहीं है।
  • कुछ जोक्स पहले से प्रेडिक्टेबल लगते हैं।
  • अगर हर चीज में लॉजिक ढूंढेंगे, तो मजा आधा रह जाएगा।

Final Verdict

धमाल 4 कोई मास्टरपीस नहीं है... लेकिन बनने की कोशिश भी नहीं करती।

ये बस आपको हंसाना चाहती है, और ज्यादातर जगह इसमें सफल भी रहती है।

अगर आप दोस्तों या फैमिली के साथ बिना ज्यादा दिमाग लगाए एंटरटेनमेंट चाहते हैं, तो टिकट बुक कर सकते हैं।

बस एक बात याद रखना...

थिएटर में एंट्री से पहले अपना लॉजिक सीट के नीचे रख देना... क्योंकि यहां दिमाग नहीं, हंसी चलती है। 

Verdict: "No Logic... Only Dhamaal! Family ke saath jao, Popcorn lo aur bas Enjoy karo."