वोट देना आपका जन्मसिद्ध अधिकार है, इसलिए वोट दें, ना कि इसलिए कि बदले में पोहा जलेबी मिलेगा

अरे आप विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में रहते हैं। वह देश, जिसके लोकतंत्र का लोहा सारी दुनिया मानती है, लेकिन यही दुनिया जब यह जानेगी कि यहां के लोग वोटिंग करने भी तब निकलते हैं, जब उन्हें कुछ हासिल होने का लालच दिया जाता है। सोचिए आपके लिए कितने शर्म की बात है।

वोट देना आपका जन्मसिद्ध अधिकार है, इसलिए वोट दें, ना कि इसलिए कि बदले में पोहा जलेबी मिलेगा
Vote for Yourself

अख़बारों की सुर्खियां बन रही हैं कि यदि आप वोटिंग करने जाएंगे तो आपको मुफ्त में पोहे जलेबी मिलेंगे। यदि आप वोटिंग करने जाएंगे तो आपको जू में मुफ्त में प्रवेश मिलेगा। यदि आप वोटिंग करने जाएंगे तो आपको यह ईनाम मिलेगा आपको वह ईनाम मिलेंगे। यह इस देश के लिए शर्मनाक बात है कि इस देश के नागरिकों को वोटिंग करने के लिए भी लालच देना पड़ रहा है। 

सारे काम छोड़कर सबसे पहले वोट दो, इस नारे से उतरकर आज वोटिंग देने पर गिफ्ट देने जैसी बातें हो रही हैं, तो क्यों हो रही हैं, सोचिए जरा। पर आप अब भी कहेंगे भई हम वोट क्यों दें, किसे दें, किया क्या है, इन नेताओं ने। तो साहब यह सोचिए विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सरकार बनाना और बिगाड़ना आपके हाथ में है। और जब सरकार आप बना रहे हैं, तो यह सरकार सही लोगों की बने, यह जिम्मेदारी भी आप ही की तो होगी। और वोट देकर, आप यह तय करेंगे कि जिन लोगों को हम सरकार चलाने के लिए असेंबली में बैठाने जा रहे हैं, वो सही व्यक्ति हों, राष्ट्र हित के लिए काम करें, जनहित के लिए काम करें।

आप इसलिए वोट दें क्योंकि वोट देना आपका संवैधानिक अधिकार और नैतिक कर्तव्य है। तो जब आप अपने कर्तव्य से पीछे हटेंगे, तो फिर आप यह उम्मीद क्यों लगाते हैं कि सरकार चलाने के लिए जिन लोगों को भेजा गया है, वो अपने कर्तव्यों का पूरी तरह से पालन करेंगे। यह आपको तय करना है कि वे अपने राजधर्म और राष्ट्र धर्म का पूरी निष्ठा से पालन करें। इसलिए आपको वोट देना है और ऐसे लोगों को वहां भेजना है।

पूरे प्रदेश में आपकी संख्या 5.5 करोड़ से अधिक है और आप लोग ही तय करने वाले हैं कि आपका भाग्य क्या होगा, कैसा होगा। इसलिए मतदान केवल इसलिए नहीं है कि आपका विधायक कौन होगा, आपका मंत्री कौन होगा, बल्कि यह मतदान इसलिए है कि आप स्वयं अपने भाग्य की रेखा खींच रहे हैं और जब भाग्य की रेखा खींची जाती है तो उसकी लंबाई की सटीकता और उसके घुमाव की बारीकियों का ध्यान तो आप ही को रखना है। और हां एक बात और आप इनके रहमों करम पर नहीं हैं बल्कि ये आपके रहमों करम पर हैं।

आप यह भी कह सकते हैं कि हमने इन्हें वोट दिया, इन्होंने हमारे लिए क्या किया, हमने उन्हें भी वोट दिया, उन्होंने हमारे लिए क्या किया। तो भई यह जरूरी नहीं कि आप इन्हें चुने या उन्हें चुने।आप यह भी तय कर सकते हैं कि इनमें से कोई भी ना आए और इसके लिए नोटा का विकल्प भी आपके पास हमेशा रहता है। आप उस नोटा पर बटन दबाकर तय कर सकते हैं कि ना ये आए, ना वो आए और अगली बार जो आए, वह, वो हो जो सही मायने में जनसेवक और राष्ट्र सेवक हो। तो अगर आपको ना यह पसंद है, ना वह पसंद है, तो भी आप पोलिंग बूथ जाएं और अपनी आवाज वहां तक पहुंचाएं। आज भले ही आपकी यह आवाज मद्धम हो, धीमी हो, लेकिन एक दिन यह आवाज जरूर शोर का रूप लेगी और तब इनको भी और उनको भी सबको समझ में आएगा कि अब यह नहीं चलेगा। अब जनता जन सेवक चाहती है, कोई वीआईपी नेता नहीं। इसलिए यह जरूर बता दें कि भई अब अवसर है, बदलाव का ना..ना.. किसी दल या पार्टी का नहीं, बल्कि चेहरों के बदलाव का।

वोट देना कोई मतदान नहीं है, भले ही इसे मतदान कहा जाता हो, लेकिन यह आपका अधिकार है। आप इसे दान नहीं करते हैं, बल्कि आप इसके जरिए यह तय करते हैं कि हम इस व्यक्ति को अपना लीडर बनाकर असेंबली में भेज रहे हैं। यह व्यक्ति हमारे हित में काम करेगा, राष्ट्रहित का ध्यान रखेगा, देश की अखंडता और मर्यादा बनाए रखेगा। 

प्रदेश भर में ढाई लाख से ज्यादा कर्मचारी आपके वोटिंग अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए पिछले 1 महीने से दिन और रात मेहनत कर रहे हैं और अब यह आपकी बारी है कि आप उनकी मेहनत को सफल बनाएं और अपने नजदीक वोटिंग सेंटर या बूथ पर जाकर अधिकार से बटन दबाएं।

और हां बटन दबाने से पहले ना यह सोचेंगे कि इसने यह प्रलोभन दिया, ना यह विचार करेंगे कि उसने क्या लालच दिया, बस यह सोचें कि आप क्या चाहते हैं, आपके लिए सही कौन है, आपके मन का सत्य क्या है, बस उस सत्य पर मोहर लगाएं..। इति..।

- संपादक