Toxic Movie Review: यश का 'जहरीला फेयरी टेल' या ₹500 करोड़ का धुआं? 6 औरतों का खूनी क्लेश और वो घटिया क्लाइमेक्स... स्वैग भी नहीं बचा पाया रायता!
'Toxic' मूवी रिव्यू: ब्रो, यश के ₹500 करोड़ के बजट और 6 औरतों के खूनी ड्रामे के बीच वो आखिरी ट्विस्ट देख दिमाग सुन्न हो जाएगा! क्या ये बेहिसाब वायलेंस और स्वैग सच में देखने लायक है या सिर्फ 3 घंटे का भारी सिरदर्द? टिकट बुक करने से पहले ये सच जान लो!
'Violence is my Mother Tongue' से लेकर दिमाग हिला देने वाले डिसऑर्डर ट्विस्ट तक; 3 घंटे 14 मिनट का सिरदर्द झेलकर दर्शक बोले—"ये क्या बकवास था बे?!" पढ़ें 1.5 स्टार वाला बेबाक रिव्यू
रेटिंग: ⭐⯨☆☆☆ (1.5 / 5)
शैली: क्राइम एक्शन थ्रिलर / साइकोलॉजिकल ड्रामा
अवधि (Runtime): 3 घंटे 14 मिनट
सेंसर सर्टिफिकेट: 'A' (Adults Only)
फिल्म विवरण एवं स्टार कास्ट (Cast & Crew)
- निर्देशक (Director): गीतू मोहनदास (Geetu Mohandas)
- लेखक: गीतू मोहनदास, यश (Yash)
- निर्माता: वेंकट के. नारायण (KVN Productions) एवं यश (Monster Mind Creations)
- बजट (Budget): लगभग ₹500 करोड़
- सिनेमैटोग्राफी: राजीव रवि
- संगीत व बैकग्राउंड स्कोर: रवि बसरूर (Ravi Basrur)
प्रमुख कलाकार और उनके किरदार
- यश: राया (Raya) / टिकट (Ticket)
- नयनतारा: गंगा (यश की बहन)
- कियारा आडवाणी: नादिया (सर्कस परफॉर्मर / प्रेमिका)
- तारा सुतारिया: रेबेका (डॉन की बेटी / पहली प्रेमिका)
- हुमा कुरैशी: एलिजाबेथ (डॉन की रखैल / लेडी विलेन)
- रुक्मिणी वसंत: मेलिसा (यश की तीसरी प्रेमिका / पत्नी)
- डैरेल डी'सिल्वा: सल्वाडोर (गैंगस्टर डॉन)
- संजीदा शेख: कमला (मां - स्पेशल अपीयरेंस)
- सुदेव नायर व अक्षय ओबेरॉय: अहम सहयोगी किरदार
Quick Verdict
करीब ₹500 करोड़ के भारी बजट और यश के स्टारडम से सजी 'Toxic' स्टाइल और विजुअल्स के स्तर पर बड़ी फिल्म जरूर लगती है, लेकिन कहानी और स्क्रीनप्ले के मामले में बुरी तरह बिखर जाती है।
बिना सिर-पैर का वायलेंस, धुएं के छल्ले और कन्फ्यूजिंग प्लॉट ट्विस्ट इसे केवल एक भारी सिरदर्द बनाते हैं।
कहानी और प्लॉट (Storyline)
कहावत है कि दुनिया की हर लड़ाई 'ज़र, जोरू और जमीन' के लिए होती है। क्राइम फिल्मों की तरह यहां भी जर और जमीन का बैकड्रॉप है, लेकिन असली क्लैश यश और उसकी जिंदगी की 6 औरतों के इर्द-गिर्द घूमता है:
- मां (संजीदा शेख): जो बिना किसी ठोस वजह के बेटे के पैदा होते ही बाप का कत्ल कर देती है।
- बहन गंगा (नयनतारा): जो भाई की भूख मिटाने के लिए खुद को दांव पर लगा देती है।
- पहली प्रेमिका (तारा सुतारिया): डॉन की बेटी, जो यश के प्यार में खुद को मिटाने को तैयार है।
- दूसरी प्रेमिका (कियारा आडवाणी): सर्कस परफॉर्मर नादिया, जिसके लिए यश पूरी अंडरवर्ल्ड से भिड़ जाता है।
- डॉन की रखैल (हुमा कुरैशी): एलिजाबेथ, जिसे सिर्फ अंडरवर्ल्ड की गद्दी चाहिए।
इसके बाद शुरू होता है अंतहीन मेलोड्रामा—यश दूसरी प्रेमिका के लिए डॉन को मारता है, डॉन की बेटी यश पर फायर करती है, बहन डॉन की बेटी को ढेर करती है, और डॉन की रखैल यश की दूसरी प्रेमिका से उसकी बहन का मर्डर करवा देती है।
यश बदले में रखैल को मारता है और दूसरी प्रेमिका से दूर हो जाता है। दूसरी प्रेमिका सुसाइड कर लेती है और अपने बेटे को यश के भरोसे छोड़ जाती है। यश गिल्ट और गुस्से में उस बच्चे को भी मार डालता है और अल्ट्रा-प्रो-मैक्स बेवड़ा बन जाता है।
कहानी में आगे छठी औरत (रुक्मिणी वसंत) आती है जो पत्नी बनती है। उसका भी एक बेटा होता है। क्लाइमेक्स में पहला बेटा बदला लेने लौटता है, लेकिन बाद में ट्विस्ट खुलता है कि यह सब यश का 'बॉडी/मल्टीपल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर' और उसका खुद का गिल्ट था—लड़का असल में लौटा ही नहीं था।
स्क्रीनप्ले और डायलॉग्स (Screenplay & Writing)
फिल्म का स्क्रीनप्ले पूरी तरह बिखरा हुआ है। इसका मुख्य डायलॉग है—"Violence is a universal language and my mother tongue is violence." मेकर्स ने इसे इतना सीरियसली ले लिया कि हर दूसरे सीन में बिना किसी इमोशनल कनेक्ट के सिर्फ खून-खराबा, कटते गले और गोलियां हैं।
पूरी फिल्म में दो चीजें स्क्रीन पर लगातार कॉम्पिटिशन करती दिखती हैं:
1. सिगरेट और सिगार का कॉम्पिटिशन
हर किरदार फेफड़ों की परवाह किए बिना धुआं उड़ा रहा है।
2. शराब गटकने की होड़
हर गंभीर बातचीत सिर्फ व्हिस्की की बोतलों के बीच होती है।
पहला हाफ जहां औरतों के उलझे रिश्तों में फंसकर दम तोड़ देता है, वहीं दूसरा हाफ एक जबरन थोपे गए साइकोलॉजिकल ट्विस्ट के साथ खत्म होता है, जिसे देखकर दर्शक सिर्फ यही सोचता है—"ये क्या बकवास था?"
एक्टिंग और परफॉर्मेंस (Performances)
यश
यश का स्क्रीन प्रेजेंस, स्वैग और औरा हमेशा की तरह भारी है। एक्शन सीन्स में वह पूरी जान झोंकते हैं, लेकिन कमजोर राइटिंग की वजह से उनका किरदार सिर्फ चिल्लाने, सिगरेट फूंकने और बेवड़े बने रहने तक सीमित हो जाता है।
सपोर्टिंग कास्ट
नयनतारा, कियारा आडवाणी, तारा सुतारिया, हुमा कुरैशी आदि: इतनी बड़ी स्टारकास्ट होने के बावजूद किसी भी फीमेल कैरेक्टर को ढंग से डेवलप नहीं किया गया। ज्यादातर किरदार सिर्फ प्लॉट को जबरन खींचने और यश के पागलपन को ट्रिगर करने के लिए इस्तेमाल किए गए हैं।
डायरेक्शन और टेक्निकल डिपार्टमेंट (Direction & Technical Aspects)
डायरेक्शन
गीतू मोहनदास का विज़न स्टाइल और डार्क टोन के मामले में तो दिखता है, लेकिन एक कोर-मास फिल्म और साइकोलॉजिकल ड्रामा के बीच का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया।
सिनेमैटोग्राफी व BGM
राजीव रवि की सिनेमैटोग्राफी और रवि बसरूर का बैकग्राउंड स्कोर अंतरराष्ट्रीय स्तर का है। सर्कस वाले फाइट सीन्स और लाइटिंग शानदार हैं।
एडिटिंग
3 घंटे 14 मिनट का रन-टाइम दर्शकों के धैर्य की कड़ी परीक्षा लेता है। अगर फिल्म से कम से कम 30 मिनट की बेवजह मार-काट और स्लो-मोशन शॉट्स हटा दिए जाते, तो यह थोड़ी झेलने लायक होती।
What We Loved
1. यश का स्क्रीन प्रेजेंस
यश का स्क्रीन प्रेजेंस, स्वैग और औरा हमेशा की तरह भारी है।
2. एक्शन सीन्स
एक्शन सीन्स में यश पूरी जान झोंकते हैं और सर्कस वाले फाइट सीन्स खास तौर पर प्रभावशाली हैं।
3. सिनेमैटोग्राफी
राजीव रवि की सिनेमैटोग्राफी अंतरराष्ट्रीय स्तर की है।
4. बैकग्राउंड स्कोर और लाइटिंग
रवि बसरूर का बैकग्राउंड स्कोर और सर्कस वाले फाइट सीन्स की लाइटिंग फिल्म के मजबूत तकनीकी हिस्सों में शामिल हैं।
What Didn't Work
फिल्म का स्क्रीनप्ले पूरी तरह बिखरा हुआ है। कमजोर राइटिंग की वजह से यश का किरदार भी सिर्फ चिल्लाने, सिगरेट फूंकने और बेवड़े बने रहने तक सीमित हो जाता है।
इतनी बड़ी स्टारकास्ट होने के बावजूद फीमेल कैरेक्टर ढंग से डेवलप नहीं किए गए।
पहला हाफ औरतों के उलझे रिश्तों में फंसकर दम तोड़ देता है, जबकि दूसरा हाफ एक जबरन थोपे गए साइकोलॉजिकल ट्विस्ट के साथ खत्म होता है।
3 घंटे 14 मिनट का रन-टाइम भी दर्शकों के धैर्य की कड़ी परीक्षा लेता है। फिल्म से कम से कम 30 मिनट की बेवजह मार-काट और स्लो-मोशन शॉट्स हटाए जाते तो यह थोड़ी झेलने लायक होती।
Who Should Watch This?
यश के स्टारडम, स्वैग और एक्शन के दीवाने दर्शकों के लिए फिल्म में देखने लायक चीजें हैं। हालांकि सिर वो भी पकड़ लेते हैं, लेकिन जो दर्शक मजबूत कहानी और संतुलित स्क्रीनप्ले की उम्मीद लेकर जाएंगे, उनके लिए फिल्म निराशाजनक साबित हो सकती है।
Expose Live Take
'Toxic' ₹500 करोड़ के भारी बजट, स्टाइल और यश के स्टारडम से सजी एक ऐसी फिल्म है जो सिर्फ दिखावे (Style over Substance) में उलझकर रह गई।
बिना सिर-पैर का वायलेंस, धुएं के छल्ले और कन्फ्यूजिंग प्लॉट ट्विस्ट इसे केवल एक भारी सिरदर्द बनाते हैं।
फिल्म में स्टारडम है, स्टाइल है, बड़ा बजट है और शानदार तकनीकी काम है, लेकिन कहानी और स्क्रीनप्ले इन सबका साथ नहीं दे पाते।
Final / Expose Live Rating
⭐⯨☆☆☆ 1.5 / 5
'Toxic' एक ऐसी फिल्म है जिसमें Style over Substance साफ नजर आता है। यश का स्टारडम और तकनीकी चमक फिल्म को संभालने की कोशिश करते हैं, लेकिन बिखरी हुई कहानी, कमजोर स्क्रीनप्ले, लंबा रनटाइम और कन्फ्यूजिंग ट्विस्ट इसे भारी अनुभव बना देते हैं।
Category Ratings
Coffee Break Score: ⭐⯨☆☆☆
Gen Z Meter: ⭐⭐☆☆☆

