यूसीसी पर विधानसभा बनी रणभूमि: दो बार स्थगित हुई कार्यवाही, सत्ता-विपक्ष के नारों से गूंजा सदन

यूसीसी विधेयक तो मध्यप्रदेश विधानसभा से पारित हो गया, लेकिन उसके पीछे सदन के भीतर क्या-क्या हुआ? एक्सपोज़ लाइव इस रिपोर्ट में 12:53 बजे से 2:10 बजे तक की पूरी विधानसभा कार्रवाई, दो बार कार्यवाही स्थगित होने, सत्ता-विपक्ष के तीखे टकराव, अनुच्छेद 29 बनाम अनुच्छेद 44 की संवैधानिक बहस, आरिफ मसूद के संशोधन, भाजपा के जवाब और आखिरकार ध्वनिमत से विधेयक पारित होने तक की पूरी टाइमलाइन और हर अहम घटनाक्रम बता रहा है।

यूसीसी पर विधानसभा बनी रणभूमि: दो बार स्थगित हुई कार्यवाही, सत्ता-विपक्ष के नारों से गूंजा सदन
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प्रवर समिति की मांग पर अड़ी कांग्रेस, भाजपा ने किया पलटवार; करीब डेढ़ घंटे तक हंगामे के बीच आखिरकार यूसीसी विधेयक हुआ पारित

भोपाल। 

मध्यप्रदेश विधानसभा में बुधवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू होते ही सदन का माहौल पूरी तरह बदल गया। जो बहस संविधान और कानून के प्रावधानों से शुरू हुई थी, वह देखते ही देखते राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और नारेबाजी में बदल गई। कांग्रेस ने बिल को प्रवर समिति (सेलेक्ट कमेटी) को भेजने की मांग करते हुए वेल में उतरकर विरोध शुरू कर दिया, जबकि भाजपा ने जवाबी नारे लगाते हुए कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। हालात ऐसे बने कि विधानसभा अध्यक्ष को दो बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। अंततः हंगामे के बीच ही यूसीसी विधेयक पारित हो गया। 

अनुच्छेद 29 से शुरू हुई बहस

विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने संशोधन प्रस्ताव रखा। उन्होंने मांग की कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 29 के तहत संरक्षित समूहों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाए। उनका कहना था कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा विषय है और इतने महत्वपूर्ण कानून को बिना विस्तृत चर्चा के पारित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बिल को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग भी रखी। 

सरकार ने कहा- जनता की राय से तैयार हुआ कानून

संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यूसीसी विधेयक किसी राजनीतिक जल्दबाजी का परिणाम नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इस कानून को तैयार करने से पहले प्रदेशभर से 10 लाख से अधिक लोगों के सुझाव लिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड, गोवा, असम और गुजरात जैसे राज्यों में भी समान नागरिक संहिता की दिशा में पहल हो चुकी है और मध्यप्रदेश भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। 

वेल में उतरे कांग्रेस विधायक, शुरू हुई नारेबाजी

सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने विरोध तेज कर दिया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक सदन के वेल में पहुंच गए। विपक्ष की ओर से लगातार नारे लगाए गए—"बिल को प्रवर समिति को भेजो" और "ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दो"। इसके जवाब में सत्ता पक्ष के विधायकों ने "मुस्लिम तुष्टीकरण बंद करो" और "आदिवासियों के सम्मान में भाजपा मैदान में" जैसे नारे लगाए। कुछ देर तक पूरा सदन नारों से गूंजता रहा। 

दो बार रोकनी पड़ी कार्यवाही

हंगामा बढ़ने पर पीठासीन अध्यक्ष ने पहले करीब 1:11 बजे सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी। 1:23 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहा। इसके बाद स्थिति फिर बिगड़ने पर 1:43 बजे दूसरी बार कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद भी जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो विरोध और नारेबाजी थमी नहीं। 

विरोध के बीच भी आगे बढ़ी चर्चा

करीब 2:02 बजे सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई। इस दौरान सत्ता पक्ष के नेताओं ने यूसीसी के समर्थन में अपने तर्क रखे, जबकि कांग्रेस के विधायक लगातार विरोध करते रहे। कई बार अध्यक्ष को सदस्यों से अपने स्थान पर लौटने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील करनी पड़ी, लेकिन विपक्ष वेल से हटने को तैयार नहीं हुआ। 

आखिरकार हंगामे के बीच पारित हुआ विधेयक

लगातार विरोध और दो बार कार्यवाही स्थगित होने के बावजूद सरकार ने विधेयक को आगे बढ़ाया। संशोधन प्रस्ताव खारिज होने के बाद अध्यक्ष ने यूसीसी विधेयक को सदन के समक्ष रखा और ध्वनिमत से इसे पारित कर दिया। विधेयक पारित होते ही सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाकर स्वागत किया, जबकि विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखा। 

क्या खास रहा?

  • यूसीसी पर चर्चा शुरू होते ही सदन में तीखी राजनीतिक टकराहट।
  • कांग्रेस की प्रवर समिति भेजने की मांग।
  • सत्ता और विपक्ष के बीच जवाबी नारेबाजी।
  • दो बार कार्यवाही स्थगित।
  • हंगामे के बीच यूसीसी विधेयक पारित। 

बहस का केंद्र बना संविधान

यूसीसी पर हुई बहस केवल कानून तक सीमित नहीं रही। एक ओर विपक्ष अनुच्छेद 25 और 29 के तहत अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात करता रहा, तो दूसरी ओर सरकार और सत्ता पक्ष के सदस्य अनुच्छेद 44, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और समान नागरिक व्यवस्था की संवैधानिक अवधारणा का हवाला देते रहे। इसी संवैधानिक बहस ने यूसीसी पर हुई चर्चा को विधानसभा के सबसे महत्वपूर्ण विमर्शों में बदल दिया। 

12:53 से 2:10 तक यूसीसी पर क्या-क्या हुआ? विधानसभा की मिनट-दर-मिनट पूरी टाइमलाइन

मध्यप्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 पर हुई चर्चा सिर्फ कानून बनाने की प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि करीब डेढ़ घंटे तक सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक और संवैधानिक बहस का केंद्र रही। दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित हुई, विपक्ष वेल में उतरा, सत्ता पक्ष ने जवाबी नारे लगाए और अंततः हंगामे के बीच विधेयक पारित हो गया। पढ़िए पूरा घटनाक्रम, मिनट-दर-मिनट। 

12:53 बजे: यूसीसी विधेयक पर चर्चा शुरू

तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 पर विचार का प्रस्ताव सदन में रखा। इसके साथ ही विधानसभा में ऐतिहासिक बहस की शुरुआत हुई। 

आरिफ मसूद ने रखा संशोधन

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने विधेयक में संशोधन प्रस्तावित करते हुए मांग की कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 29 के तहत संरक्षित समूहों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिल अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है और इसे प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए। 

सरकार ने किया पलटवार

संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह विधेयक जनता की राय के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने दावा किया कि 10 लाख से अधिक सुझाव मिलने के बाद यह कानून बनाया गया और इसे उत्तराखंड, गोवा, असम तथा गुजरात जैसे राज्यों की पहल के अनुरूप बताया। 

1:09 बजे: सदन में हंगामा शुरू

सरकार और विपक्ष के बीच बहस तेज होते ही नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक वेल में पहुंच गए। विपक्ष ने "बिल को प्रवर समिति को भेजो" और "ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दो" जैसे नारे लगाए। जवाब में सत्ता पक्ष ने "मुस्लिम तुष्टीकरण बंद करो" और "आदिवासियों के सम्मान में भाजपा मैदान में" जैसे नारे लगाए। सदन का माहौल पूरी तरह गरमा गया। 

1:11 बजे: पहली बार कार्यवाही स्थगित

लगातार नारेबाजी और हंगामे के बीच पीठासीन अध्यक्ष ने विधानसभा की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी। 

1:23 बजे: फिर शुरू हुई कार्यवाही, लेकिन हंगामा जारी

कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद भी विपक्ष शांत नहीं हुआ। कांग्रेस विधायक वेल में डटे रहे और नारेबाजी जारी रही। सत्ता पक्ष भी लगातार जवाब देता रहा। 

1:43 बजे: दूसरी बार सदन स्थगित

स्थिति सामान्य नहीं होने पर पीठासीन अध्यक्ष ने दूसरी बार कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी। यह साफ हो चुका था कि यूसीसी पर चर्चा अब पूरी तरह राजनीतिक टकराव में बदल चुकी है। 

2:02 बजे: फिर शुरू हुई बहस

कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भाजपा विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा ने कहा कि यूसीसी संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और शाह बानो मामले का हवाला देते हुए समान नागरिक संहिता की आवश्यकता बताई। इसके बाद विधायक रामेश्वर शर्मा ने बहुविवाह, तीन तलाक और आदिवासी अधिकारों का मुद्दा उठाया। 

2:03 बजे: फिर वेल में उतरा विपक्ष

सरकार के तर्कों के बीच कांग्रेस विधायक एक बार फिर वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। सदन में शोर-शराबा जारी रहा, जबकि सत्ता पक्ष यूसीसी के समर्थन में अपनी दलीलें रखता रहा। 

मुख्यमंत्री ने रखा सरकार का पक्ष

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में कहा कि यूसीसी महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इस कानून के लागू होने के बाद बहुविवाह पर रोक लगेगी, लिव-इन संबंधों को छिपाने पर सजा का प्रावधान होगा और बेटा-बेटी को संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाया। 

2:08 बजे: संशोधन पर मतदान

आरिफ मसूद के संशोधन प्रस्ताव को सदन में मतदान के लिए रखा गया। ध्वनिमत में संशोधन के विरोध में बहुमत रहा और प्रस्ताव खारिज कर दिया गया। 

2:10 बजे: यूसीसी विधेयक पारित

संशोधन खारिज होने के बाद अध्यक्ष ने मूल विधेयक को सदन के समक्ष रखा। ध्वनिमत से मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 पारित हो गया। इसके बाद सत्ता पक्ष के विधायकों ने मेज थपथपाकर स्वागत किया, जबकि विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखा। 

यूसीसी पर विधानसभा में किसने क्या कहा? पढ़िए सरकार और विपक्ष के सबसे बड़े तर्क

मध्यप्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 पर हुई चर्चा सिर्फ पक्ष और विपक्ष के विरोध तक सीमित नहीं रही। करीब डेढ़ घंटे चली बहस में संविधान, सुप्रीम कोर्ट के फैसले, महिला अधिकार, बहुविवाह, अल्पसंख्यकों के अधिकार, वोट बैंक की राजनीति और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष ने अपने-अपने तर्क रखे। आइए जानते हैं कि यूसीसी पर किस नेता ने क्या कहा। 

आरिफ मसूद: अनुच्छेद 29 के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने बहस की शुरुआत संशोधन प्रस्ताव के साथ की। उन्होंने मांग की कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 29 के तहत संरक्षित समूहों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाए।

उन्होंने कहा कि—

यह विधेयक अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है।

सरकार एक सिविल विषय को आपराधिक स्वरूप देने की कोशिश कर रही है।

केंद्र का लॉ कमीशन अभी यूसीसी पर अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंचा है, फिर मध्यप्रदेश सरकार इतनी जल्दबाजी क्यों कर रही है।

इतना बड़ा कानून प्रवर समिति को भेजकर विस्तृत चर्चा के बाद ही पारित किया जाना चाहिए। 

कैलाश विजयवर्गीय: जनता की राय से बना है यह कानून

संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यह सिर्फ सरकार का कानून नहीं है, बल्कि जनता की भागीदारी से तैयार हुआ विधेयक है।

उन्होंने कहा—

यूसीसी पर 10 लाख से अधिक लोगों ने सुझाव दिए।

इसके लिए समिति ने प्रदेशभर में लोगों की राय ली।

राज्य सरकार को ऐसा कानून बनाने का पूरा अधिकार है।

"एक देश, एक विधान" भाजपा और जनसंघ की पुरानी विचारधारा रही है। 

डॉ. सीतासरन शर्मा: संविधान और सुप्रीम कोर्ट दोनों यूसीसी की बात करते हैं

भाजपा विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा ने यूसीसी के समर्थन में संवैधानिक और न्यायिक आधार रखे।

उन्होंने कहा—

समान नागरिक संहिता संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है।

सुप्रीम कोर्ट कई मामलों में यूसीसी की आवश्यकता पर टिप्पणी कर चुका है।

शाह बानो प्रकरण इसका प्रमुख उदाहरण है।

देश में सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून होना समय की मांग है। 

रामेश्वर शर्मा: बहुविवाह और तीन तलाक जैसी व्यवस्थाओं पर लगेगी रोक

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने यूसीसी को महिलाओं और परिवारों के अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि इस कानून से सामाजिक समानता मजबूत होगी।

उन्होंने कहा—

बहुविवाह जैसी व्यवस्था समाप्त होगी।

तीन तलाक जैसी प्रथाओं पर प्रभावी रोक लगेगी।

आदिवासियों के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।

यह कानून समाज में समान न्याय सुनिश्चित करेगा। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव: यह सिर्फ कानून नहीं, सामाजिक परिवर्तन का दस्तावेज है

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूसीसी को महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय का कानून बताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।

उन्होंने कहा—

अब प्रदेश में कोई व्यक्ति दो विवाह नहीं कर सकेगा।

लिव-इन संबंध छिपाने पर 5 साल तक की सजा का प्रावधान होगा।

पुत्र और पुत्री को संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा।

यह कानून महिलाओं को बराबरी का दर्जा देगा।

कांग्रेस ने वर्षों तक वोट बैंक की राजनीति और तुष्टीकरण किया, जबकि सरकार समान कानून की दिशा में आगे बढ़ रही है। 

उमंग सिंघार: यूसीसी से पहले ओबीसी आरक्षण पर ध्यान दीजिए

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने यूसीसी के साथ-साथ ओबीसी आरक्षण का मुद्दा भी सदन में उठाया।

उन्होंने कहा—

सरकार पहले 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का समाधान करे।

यूसीसी जैसे व्यापक कानून को प्रवर समिति के पास भेजा जाना चाहिए।

विधेयक पर पर्याप्त चर्चा का अवसर मिलना चाहिए।