कैंसर के खात्मे के लिए भारत का 'ब्रह्मास्त्र': IIT गुवाहाटी और IASST ने खोजी RK-251 दवा, कीमोथेरेपी के दिन अब लदने वाले हैं!
भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजी नई 'स्मार्ट' कैंसर दवा RK-251, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट और बिना स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाए केवल कैंसर सेल्स को खत्म करेगी। जानिए कैसे IIT गुवाहाटी और IASST की यह खोज कीमोथेरेपी की जगह ले सकती है।
शरीर में 'जासूस' की तरह काम करेगी नई दवा— नहीं झडेंगे बाल, स्वस्थ अंगों को खरोंच तक नहीं आएगी, कैंसर सेल्स में घुसते ही एक्टिव होकर बीमारी को करेगी जड़ से खत्म; आक्रामक ब्रेस्ट कैंसर पर टेस्ट पूरी तरह सफल
ब्यूरो, नई दिल्ली / गुवाहाटी।
जब किसी परिवार में किसी अपने को कैंसर होने की बात पता चलती है, तो बीमारी के डर के साथ-साथ उसके इलाज का खौफ भी घेर लेता है। कैंसर के इलाज में दी जाने वाली 'कीमोथेरेपी' इतनी भारी होती है कि मरीज के बाल झड़ने लगते हैं, शरीर की ताकत खत्म हो जाती है, खाना पचना बंद हो जाता है और पूरा शरीर अंदर से टूट जाता है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आज की दवाएं 'अंधी' होती हैं—वे कैंसर को मारने के चक्कर में आपके शरीर के अच्छे और तंदुरुस्त अंगों को भी नुकसान पहुंचा देती हैं।
लेकिन अब भारत के वैज्ञानिकों ने इस सबसे बड़ी परेशानी का हल ढूंढ निकाला है। हमारे देश के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी चमत्कारी 'स्मार्ट दवा' तैयार की है, जो शरीर के अच्छे हिस्सों को छुएगी भी नहीं और सिर्फ कैंसर वाली खराब कोशिकाओं को ढूंढकर खत्म कर देगी।
किसने बनाई यह दवा और क्या है इसका नाम?
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत काम करने वाले संस्थान IASST (इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी) के डॉ. असीस बाला और IIT गुवाहाटी के डॉ. के.पी. भाबक की टीम ने मिलकर यह ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है।
वैज्ञानिकों ने इस नई स्मार्ट दवा को नाम दिया है — 'RK-251'।
यह कोई आम दवा नहीं है, बल्कि एक 'टारगेटेड मिसाइल' की तरह है, जिसे सिर्फ कैंसर के ठिकाने पर वार करने के लिए प्रोग्राम किया गया है।
यह दवा शरीर में जाकर कैसे काम करती है?
इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए कि यह दवा शरीर में एक 'जासूस' की तरह काम करती है:
- शरीर में शांत रहेगी (स्लीप मोड): जब यह दवा शरीर में डाली जाएगी, तो यह खून के जरिए पूरे शरीर में घूमेगी, लेकिन दिल, किडनी, लीवर या किसी भी अच्छे हिस्से को जरा भी नुकसान नहीं पहुंचाएगी। यह वहां पूरी तरह निष्क्रिय (सोती हुई) रहेगी।
- कैंसर की पहचान कैसे करती है? कैंसर वाली कोशिकाओं के अंदर एक खास तरह का केमिकल (जिसे विज्ञान में ROS कहते हैं) बहुत ज्यादा मात्रा में बनता है।
- कैंसर के अंदर पहुंचते ही एक्टिव होना: जैसे ही RK-251 दवा कैंसर कोशिका के अंदर घुसती है, वह उस केमिकल को पहचान लेती है और तुरंत जाग जाती है।
- अंदर जाकर करती है बड़ा हमला: एक्टिव होते ही यह दवा अपने अंदर से NBDHEX नाम का एक बेहद ताकतवर कैंसर-रोधी हथियार छोड़ती है। यह हथियार कैंसर की कोशिकाओं के उस प्रोटीन को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है, जिसकी मदद से कैंसर जिंदा रहता है और फैलता है। नतीजा यह होता है कि कैंसर अंदर ही अंदर दम तोड़ देता है।
लैब में जांच के क्या नतीजे निकले?
वैज्ञानिकों ने जब इस दवा को लैब में परखा, तो इसके नतीजे बेहद चौंकाने वाले और राहत देने वाले रहे:
- सबसे जिद्दी कैंसर पर भी चला जादू: महिलाओं में होने वाले सबसे आक्रामक और खतरनाक माने जाने वाले 'ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर' पर जब इसका टेस्ट किया गया, तो इसने कैंसर को तेजी से खत्म किया।
- कोई साइड-इफेक्ट या जहर नहीं: शुरुआती जीव परीक्षणों (ज़ेब्राफिश पर किए गए टेस्ट) में देखा गया कि दवा से शरीर में कोई भी जहरीलापन या खराबी पैदा नहीं हुई। स्वस्थ कोशिकाएं पहले की तरह पूरी तरह सुरक्षित रहीं।
- दुनिया भर में मिली मान्यता: भारतीय वैज्ञानिकों की इस बड़ी रिसर्च को दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल साइंस पत्रिका ACS - Journal of Medicinal Chemistry में भी जगह मिली है।
मरीजों तक यह दवा कब तक पहुंचेगी?
वैज्ञानिकों का कहना है कि लैब में मिली यह कामयाबी एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है। अब इंसानों पर इसका अंतिम ट्रायल (ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल) शुरू करने से पहले कुछ जरूरी कानूनी और मेडिकल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा, तो आने वाले समय में RK-251 कीमोथेरेपी की जगह ले लेगी। यानी कैंसर का इलाज तो होगा, लेकिन मरीज को न तो असहनीय दर्द सहना पड़ेगा, न बाल खोने पड़ेंगे और न ही महीनों बिस्तर पर लाचार रहना पड़ेगा।
