हाथी ने कुचला... या सिस्टम ने मौत को दे दी खुली छूट?
इंदौर के राजनगर में हाथी के हमले में विजय होलकर की मौत के बाद पुलिस ने महावत पर BNS की धारा 106(1) और 291 के तहत मामला दर्ज किया है। लेकिन घटना राजनगर पुलिस चौकी के सामने, भीड़भाड़ वाले इलाके में हुई। हाथी धार्मिक कार्यक्रम के बाद शहर में भिक्षावृत्ति के लिए क्यों घूम रहा था, उसे अनुमति किसने दी और क्या प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होगी? एक्सपोज लाइव की विशेष पड़ताल।
इंदौर हाथी कांड: राजनगर पुलिस चौकी के सामने गई विजय होलकर की जान... महावत पर सिर्फ दो जमानती धाराएं, लेकिन सवाल पूरी व्यवस्था पर
49 वर्षीय विजय होलकर की मौत के बाद उठे कई सवाल... क्या पुलिस ने केस कोदो सामान्य धाराओं तक सीमित कर दिया? हाथी के दस्तावेज, परमिशन और प्रशासनिक जिम्मेदारी किसकी
इंदौर।
चंदननगर के राजनगर में 49 वर्षीय विजय होलकर की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। लेकिन इस हादसे से भी बड़ा सवाल अब उस व्यवस्था पर खड़ा हो गया है, जिसकी आंखों के सामने एक हाथी भीड़भाड़ वाले इलाके में घूमता रहा और किसी ने उसे रोकने की जरूरत तक नहीं समझी।
शनिवार, 25 जुलाई, शाम करीब 4:18 बजे। बाजार में भीड़ थी, सड़कें संकरी थीं, चौराहे पर लोगों की आवाजाही लगातार जारी थी। इसी दौरान एक हाथी राजनगर पुलिस चौकी के सामने से गुजर रहा था। कुछ ही मिनटों में विजय होलकर की जिंदगी खत्म हो गई। अब सवाल यह है कि क्या सिस्टम भी उस समय सिर्फ तमाशबीन बना हुआ था?
एफआईआर के मुताबिक, महावत हाथी को लेकर गली से गुजर रहा था। स्थानीय निवासी विजय होलकर हाथी को गुड़ खिलाने पहुंचे। आरोप है कि हाथी ने पहले उन्हें सूंड से धक्का दिया। इसके बाद महावत ने हाथी के सिर के पास दो-तीन डंडे मारे, जिससे हाथी और उग्र हो गया। हाथी ने विजय को सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया और पेट पर पैर रख दिया। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
पुलिस ने महावत के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) और 291 के तहत मामला दर्ज कर लिया। दोनों ही धाराएं जमानती हैं। लेकिन क्या एक व्यक्ति की मौत की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ इन दो धाराओं में सिमट जाती है?
पुलिस चौकी के सामने हाथी घूमता रहा... किसी ने रोका क्यों नहीं?
हादसा किसी सुनसान जगह पर नहीं हुआ। यह राजनगर पुलिस चौकी के ठीक सामने हुआ। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब हाथी भीड़भाड़ वाले इलाके से गुजर रहा था, तब क्या पुलिस को इसकी जानकारी नहीं थी? यदि थी, तो उसे रोकने या सुरक्षित स्थान पर भेजने की कोशिश क्यों नहीं हुई?
वीडियो में साफ दिखाई देता है कि सड़कें संकरी हैं, आसपास भीड़ है और चौराहे पर हाथी खड़ा है। ऐसे में इतना बड़ा जानवर आखिर शहर के बीचों-बीच बेखौफ कैसे घूम रहा था?
धार्मिक कार्यक्रम खत्म... फिर शहर में भिक्षावृत्ति क्यों?
चंदननगर थाना पुलिस के मुताबिक, हाथी को उज्जैन से जैन समाज के एक मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इंदौर लाया गया था। लेकिन कार्यक्रम खत्म होने के बाद महावत उसे लेकर शहर के अलग-अलग इलाकों में भिक्षावृत्ति (दान मांगने) के लिए घूम रहा था। हादसा भी इसी दौरान हुआ।
अब सवाल यह है कि यदि हाथी सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम के लिए लाया गया था, तो कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उसे शहर की गलियों और बाजारों में घुमाने की अनुमति किसने दी?
- क्या वन विभाग को इसकी जानकारी थी?
- क्या स्थानीय प्रशासन ने इसकी अनुमति दी थी?
- क्या पुलिस को इस मूवमेंट की सूचना थी?
और यदि थी, तो फिर किसी ने इसे रोकने की जरूरत क्यों नहीं समझी?
सिर्फ महावत नहीं... पूरी चेन की जांच होनी चाहिए
हाथी कोई सामान्य पालतू पशु नहीं है। ऐसे पशु को सार्वजनिक स्थान पर लाने के लिए कई वैधानिक प्रक्रियाएं और सुरक्षा मानक लागू होते हैं। ऐसे में जांच का दायरा सिर्फ महावत तक सीमित क्यों रहे?
जांच में यह भी सामने आना चाहिए कि—
- हाथी के पास वैध Ownership Certificate था या नहीं?
- क्या अधिकृत पशु चिकित्सक का Health Certificate लिया गया था?
- क्या यह प्रमाणित किया गया था कि हाथी Musth (मतमस्तता) की स्थिति में नहीं था?
- हाथी को उज्जैन से इंदौर लाने और फिर कार्यक्रम के बाद शहर में घुमाने की अनुमति किस आधार पर दी गई?
यदि इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ, तो जिम्मेदारी सिर्फ हाथी चलाने वाले की कैसे हो सकती है?
दो जमानती धाराएं... लेकिन क्या सिस्टम भी जवाब देगा?
महावत पर लगी दोनों धाराएं जमानती हैं। कानून अपना काम करेगा। लेकिन इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल कानून की किताब से नहीं, व्यवस्था से जुड़ा है।
क्या विजय होलकर की मौत के बाद सिर्फ महावत पर केस दर्ज कर देना ही पर्याप्त है?
या फिर यह भी तय होगा कि भीड़भाड़ वाले शहर में हाथी आखिर किसकी निगरानी में घूम रहा था?
EXPOSE LIVE QUESTION
- राजनगर पुलिस चौकी के सामने... भीड़भाड़ वाले बाजार में... धार्मिक कार्यक्रम खत्म होने के बाद हाथी शहर में घूमता रहा।
- क्या सिस्टम को यह सब दिखाई नहीं दिया?
- या फिर व्यवस्था हर बार किसी की मौत के बाद ही जागती है?