आबकारी विभाग की फिर कार्रवाई... 23 केस… लेकिन 'ढाबा कल्चर' पर लगाम या सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी?

इंदौर में आबकारी विभाग ने ढाबों पर फिर कार्रवाई करते हुए 23 प्रकरण दर्ज किए। लेकिन 18 जुलाई के अभियान के बाद मेट्रो और पंजतारा ढाबा दोबारा कार्रवाई में मिलने से फॉलो-अप और अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पढ़िए The Expose Live की ग्राउंड एनालिसिस।

आबकारी विभाग की फिर कार्रवाई... 23 केस… लेकिन 'ढाबा कल्चर' पर लगाम या सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी?

18 जुलाई को 18 चर्चित ढाबों पर छापा, आठ दिन बाद फिर नई सूची के साथ अभियान

दो पुराने नाम फिर पकड़े गए, बाकी का क्या हुआ? सवाल कार्रवाई का नहीं, उसके फॉलो-अप का है

इंदौर। 

आबकारी विभाग ने एक बार फिर शहर और बायपास क्षेत्र के ढाबों पर विशेष अभियान चलाते हुए 23 प्रकरण दर्ज किए हैं। इस बार कार्रवाई की जद में पप्पू (पंजाबी) ढाबा, ग्रिलीशियस, अर्बन तड़का, सफारी, मेट्रो, पंजतारा, गामा दा ढाबा और चस्का ढाबा आए। सभी मामलों में मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 36(ए) और 36(बी) के तहत कार्रवाई की गई।

प्रेस नोट कहता है कि अभियान सफल रहा।

लेकिन Expose Live के लिए कहानी यहीं खत्म नहीं होती, यहीं से शुरू होती है।

आठ दिन पहले भी अभियान था... फिर आठ दिन में क्या बदला?

18 जुलाई को आबकारी विभाग ने शहर और बायपास के 18 चर्चित ढाबों पर कार्रवाई कर 44 प्रकरण दर्ज किए थे। विभाग ने इसे बड़ी कार्रवाई बताया था।

अब ठीक आठ दिन बाद फिर नया अभियान चला और 23 नए प्रकरण दर्ज हो गए।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि मेट्रो ढाबा और पंजतारा ढाबा दोनों अभियानों की सूची में शामिल हैं।

यानी सवाल सिर्फ इतना नहीं कि आज 23 केस दर्ज हुए।

सवाल यह है कि पिछले अभियान के बाद इन ढाबों पर आठ दिन तक क्या निगरानी हुई?

अगर फॉलो-अप हुआ था, तो वही नाम दोबारा कार्रवाई की सूची में क्यों हैं?

बाकी 16 ढाबों का क्या हुआ?

18 जुलाई की कार्रवाई में जिन 18 ढाबों के नाम सामने आए थे, उनमें से इस बार सिर्फ दो नाम फिर सूची में हैं।

बाकी 16 ढाबों को लेकर विभाग ने यह नहीं बताया—

  • क्या उनकी दोबारा जांच हुई?
  • क्या वे नियमों का पालन करते मिले?
  • क्या उन पर आगे कोई कार्रवाई हुई?
  • या इस बार उनकी जांच ही नहीं हुई?

जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक किसी भी अभियान का वास्तविक असर मापना मुश्किल है।

हर दिन पव्वे पकड़ने से खत्म होगा 'ढाबा कल्चर'?

इंदौर में लगभग हर दिन आबकारी विभाग की ओर से किसी बाइक, स्कूटी या कार से कुछ शराब की बोतलें जब्त करने या छोटे-छोटे मामलों में कार्रवाई की प्रेस विज्ञप्तियां जारी होती हैं।

दूसरी तरफ बायपास और शहर का 'ढाबा कल्चर' लगातार चर्चा में बना रहता है।

ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या विभाग की प्राथमिकता सिर्फ प्रकरणों की संख्या बढ़ाना है, या उन जगहों पर लगातार निगरानी रखना भी है जहां खुलेआम शराब परोसने और सार्वजनिक शराबखोरी की शिकायतें बार-बार सामने आती हैं?

आज किन ढाबों पर हुई कार्रवाई?

  • पप्पू (पंजाबी) ढाबा – 5 प्रकरण
  • ग्रिलीशियस ढाबा – 4 प्रकरण
  • अर्बन तड़का एवं सफारी ढाबा – 4 प्रकरण
  • मेट्रो, पंजतारा, गामा दा ढाबा और चस्का ढाबा – 10 प्रकरण

कुल: 23 प्रकरण | 23 लोगों के खिलाफ कार्रवाई

STORY BOX | आठ दिन, दो अभियान... लेकिन सवाल वही

18 जुलाई

  • 18 चर्चित ढाबों पर कार्रवाई
  • 44 प्रकरण दर्ज

26 जुलाई

  • 8 ढाबों पर कार्रवाई
  • 23 प्रकरण दर्ज

दोनों अभियानों में कॉमन ढाबे

  • मेट्रो ढाबा
  • पंजतारा ढाबा

बड़ा सवाल

  • बाकी 16 ढाबों का फॉलो-अप हुआ या नहीं?

Expose Live Questions

  • क्या विशेष अभियान के बाद संबंधित ढाबों का नियमित फॉलो-अप होता है?
  • मेट्रो और पंजतारा ढाबा दोबारा कार्रवाई में क्यों मिले?
  • बाकी 16 ढाबों की स्थिति क्या है?
  • कितने ढाबों के लाइसेंस पर सख्त कार्रवाई हुई?
  • क्या लगातार निगरानी की व्यवस्था है, या अभियान सिर्फ समय-समय पर चलाए जाते हैं?

आबकारी विभाग का पक्ष

आबकारी विभाग के अनुसार, बिना लाइसेंस शराब परोसने और सार्वजनिक स्थानों पर मदिरापान करने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। विभाग का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

Expose Live Take

23 नए प्रकरण दर्ज होना खबर है, लेकिन उससे बड़ी खबर यह है कि आठ दिन पहले जिन ढाबों पर कार्रवाई हुई थी, उनमें से दो नाम फिर सूची में हैं।

कार्रवाई का असर सिर्फ प्रेस नोट से नहीं, बल्कि इस बात से मापा जाएगा कि अगली सूची में पुराने नाम गायब क्यों हैं—क्योंकि सुधार हुआ, या क्योंकि फॉलो-अप ही नहीं हुआ। जब तक यह तस्वीर साफ नहीं होती, तब तक 'ढाबा कल्चर' पर सख्ती के दावे सवालों के घेरे में रहेंगे।

EXPOSE FILES | पिछली कार्रवाई क्या थी... और क्यों फिर खड़े हो गए वही सवाल?