शोध से स्किल तक... IPS अकादमी में शिक्षकों ने सीखे रिसर्च के नए टूल

इंदौर की आईपीएस अकादमी में आयोजित एक सप्ताह के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में शिक्षकों और शोधार्थियों को SPSS, रिसर्च मेथडोलॉजी, पेटेंट, कॉपीराइट, अकादमिक लेखन और पब्लिकेशन एथिक्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

शोध से स्किल तक... IPS अकादमी में शिक्षकों ने सीखे रिसर्च के नए टूल

एक सप्ताह के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में SPSS, रिसर्च प्रपोजल, पेटेंट और पब्लिकेशन एथिक्स पर मिला प्रैक्टिकल प्रशिक्षण

इंदौर।

बदलते शिक्षा जगत में सिर्फ पढ़ाना ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शोध करना भी शिक्षकों की बड़ी जिम्मेदारी बन चुका है। इसी सोच के साथ आईपीएस अकादमी, इंदौर के वाणिज्य विभाग ने एक सप्ताह का Faculty Development Program (FDP) आयोजित किया, जिसमें देशभर के शिक्षकों और शोधार्थियों को आधुनिक रिसर्च टूल्स और अकादमिक लेखन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

20 से 24 जुलाई 2026 तक चले इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने SPSS डेटा एनालिसिस, रिसर्च आइडिया डेवलपमेंट, सिनॉप्सिस लेखन, रिसर्च प्रपोजल, पेटेंट, कॉपीराइट और पब्लिकेशन एथिक्स जैसे विषयों पर विशेषज्ञों से सीख हासिल की।

कार्यक्रम का आयोजन आईपीएस अकादमी के अध्यक्ष योगेन्द्र जैन, निदेशक निशित जैन और निधि जैन के मार्गदर्शन में हुआ। वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता पराशर के नेतृत्व में इसका समन्वयन डॉ. अर्चना द्विवेदी और सह-समन्वयक डॉ. वैभव शर्मा ने किया।

STORY BOX | किसने क्या सिखाया?

  • डॉ. मीनाक्षी पराशर – रिसर्च आइडिया और सिनॉप्सिस निर्माण
  • डॉ. प्रियंका कौर चावला – SPSS आधारित डेटा एनालिसिस
  • डॉ. संदीप वर्मा – फंडेड रिसर्च प्रोजेक्ट, पेटेंट और कॉपीराइट
  • डॉ. दुर्गेश मिश्रा – अकादमिक लेखन और पब्लिकेशन एथिक्स

एक वक्ता–एक पौधा अभियान बना आकर्षण

कार्यक्रम की सबसे खास पहल "एक वक्ता–एक पौधा" अभियान रही। हर आमंत्रित विशेषज्ञ ने अकादमी परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का संदेश दिया। प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी का बेहतर उदाहरण बताया।

समापन पर मिला प्रमाण-पत्र

कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए और विशेषज्ञों का सम्मान किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता पराशर ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों और शोधार्थियों की शोध क्षमता को मजबूत करते हैं और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को बढ़ावा देते हैं। वहीं समन्वयक डॉ. अर्चना द्विवेदी ने भविष्य में भी इसी तरह के शोध और कौशल विकास आधारित कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता जताई।