टैंक फुल कराना अभी भी भारी पड़ेगा... MP सरकार ने पेट्रोल-डीजल टैक्स घटाने से किया इनकार
मध्यप्रदेश सरकार ने विधानसभा में स्पष्ट किया है कि पेट्रोल-डीजल पर VAT घटाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। जानिए प्रदेश का टैक्स स्ट्रक्चर, तीन महीने में ईंधन से मिला राजस्व और पड़ोसी राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश कहां खड़ा है।
सीमा पर दूसरे राज्यों से भरवा रहे हैं ईंधन, फिर भी राहत नहीं; विधानसभा में सरकार ने कहा- फिलहाल टैक्स कम करने का कोई प्लान नहीं
भोपाल।
अगर हर बार पेट्रोल पंप पर गाड़ी रुकने के बाद पहला सवाल यही होता है—"इस बार कुछ सस्ता हुआ क्या?" तो जवाब फिलहाल "नहीं" है।
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार ने साफ कर दिया है कि पेट्रोल और डीजल पर राज्य कर (VAT) घटाने की फिलहाल न कोई प्रक्रिया चल रही है और न ही ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन है। यानी राज्य सरकार की ओर से ईंधन की कीमतों में राहत मिलने के आसार अभी नजर नहीं आ रहे हैं।
सरकार ने क्या कहा?
कांग्रेस विधायक हेमंत सत्यदेव कटारे के सवाल के जवाब में उपमुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि प्रदेश में फिलहाल—
- पेट्रोल पर: 29% VAT + ₹2.50 प्रति लीटर अतिरिक्त कर + 1% उपकर
- डीजल पर: 19% VAT + ₹1.50 प्रति लीटर अतिरिक्त कर + 1% उपकर
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इन करों में कटौती को लेकर कोई प्रक्रिया या विचार फिलहाल प्रचलित नहीं है।
सरकार ने माना... सीमा पार से भरवा रहे हैं पेट्रोल-डीजल
विधानसभा में सरकार ने स्वीकार किया कि पेट्रोल पंप डीलर्स के संगठनों ने कई बार शिकायत की है कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा से लगे जिलों के लोग दूसरे राज्यों में जाकर ईंधन भरवा रहे हैं।
कारण वही—जहां टैक्स कम, वहां ईंधन अपेक्षाकृत सस्ता।
सरकार ने माना कि इससे प्रदेश के पेट्रोल पंप कारोबार और राजस्व पर असर पड़ रहा है।
शिकायतें आईं... लेकिन राहत नहीं
दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने शिकायतों से इनकार नहीं किया, लेकिन राहत देने की संभावना से भी साफ इनकार कर दिया।
सरकार का कहना है कि पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम करना नीतिगत निर्णय का विषय है और फिलहाल इस दिशा में कोई कार्रवाई या प्रक्रिया नहीं चल रही है।
एक नजर में
- पेट्रोल पर 29% VAT + ₹2.50 अतिरिक्त कर + 1% उपकर
- डीजल पर 19% VAT + ₹1.50 अतिरिक्त कर + 1% उपकर
- टैक्स घटाने पर कोई प्रक्रिया नहीं
- सीमावर्ती जिलों से दूसरे राज्यों में ईंधन खरीदने की शिकायत स्वीकार
- तीन महीने में ₹3604.55 करोड़ का राजस्व

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पेट्रोल-डीजल पर टैक्स सिर्फ सरकारी राजस्व का मामला नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति की जेब से जुड़ा है जो रोज बाइक या कार लेकर घर से निकलता है। मध्यप्रदेश सरकार ने विधानसभा में साफ कर दिया है कि फिलहाल टैक्स कम करने का कोई इरादा नहीं है।
इसका मतलब है कि राज्य स्तर पर ईंधन सस्ता होने की उम्मीद फिलहाल नहीं है। ऐसे में जब पड़ोसी राज्यों की तुलना में सीमावर्ती जिलों के लोग कम कीमत पर ईंधन खरीदने दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं, तब सवाल सिर्फ कीमत का नहीं, बल्कि प्रदेश की टैक्स नीति और उसकी प्रतिस्पर्धात्मकता का भी है। आने वाले समय में यह मुद्दा सिर्फ आम उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्ट, व्यापार और राज्य के राजस्व—तीनों पर असर डाल सकता है।
