शराबखोरीः 44 केस नहीं... सवाल यह कि इंदौर का 'ढाबा कल्चर' आखिर किनके संरक्षण में चल रहा है?

इंदौर में आबकारी विभाग की कार्रवाई में 44 प्रकरण दर्ज और 30 बीयर केन जब्त हुईं। लेकिन बार-बार हो रही छापेमारी के बावजूद 'ढाबा कल्चर' पर लगाम क्यों नहीं लग रही? Expose Live की रिपोर्ट में उठाए गए जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था से जुड़े बड़े सवाल।

शराबखोरीः 44 केस नहीं... सवाल यह कि इंदौर का 'ढाबा कल्चर' आखिर किनके संरक्षण में चल रहा है?

शनिवार को आबकारी विभाग की एक और बड़ी कार्रवाई में 44 प्रकरण दर्ज, 30 बीयर केन जब्त, पर शराब की एक बोतल नहीं... क्यों..?

पर लगातार दबिशों के बावजूद अगर ढाबों पर शराबखोरी और बिना लाइसेंस परोसने का खेल नहीं रुक रहा, तो जवाबदेही किसकी?

इंदौर। 

आबकारी विभाग ने एक बार फिर शहर के कई चर्चित ढाबों पर दबिश देकर 44 प्रकरण दर्ज किए और 44 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। एमआर-11 से लेकर बायपास, उज्जैन रोड और रिंग रोड तक कई ढाबों पर खुलेआम मदिरापान, बिना लाइसेंस शराब परोसने और नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए। गिल ढाबे से 30 केन बीयर भी जब्त की गई। पर शराब की एक भी बोतल नहीं। क्यों..? क्या इन ढाबों पर केवल बीयर पिलाई जा रही थी। जबकि खुद आबकारी विभाग के फोटो दिखा रहे हैं, कि वहां शराब भी चल रही थी। तो शराब की जब्ती क्यों नहीं। केवल बीयर की जब्ती से ही कार्रवाई पूरी कैसे हो गई या फिर इसके पीछे भी कोई गेम है..? और अगर जब्त की गई तो कार्रवाई में उनका विवरण क्यों नहीं..?

और दूसरी बात इस पूरी कार्रवाई की सबसे बड़ी कहानी 44 केस नहीं हैं।

बड़ा सवाल यह है कि जब आबकारी विभाग पिछले कई महीनों से लगातार ऐसे अभियान चला रहा है, तब भी इंदौर का 'ढाबा कल्चर' आखिर खत्म क्यों नहीं हो रहा? अगर बार-बार कार्रवाई करनी पड़ रही है, तो क्या कार्रवाई का डर खत्म हो चुका है, या फिर व्यवस्था में कहीं ऐसी कमजोरी है जो इस पूरे नेटवर्क को बार-बार खड़ा कर देती है?

कार्रवाई में क्या मिला?

आबकारी विभाग की कार्रवाई के दौरान मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 34(1), 36(ए) और 36(बी) के तहत कुल 44 प्रकरण दर्ज किए गए।

कार्रवाई के प्रमुख बिंदु—

  • 44 प्रकरण दर्ज
  • 44 लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई
  • 30 केन बीयर जब्त (गिल ढाबा)
  • बिना लाइसेंस शराब परोसने के मामले
  • सार्वजनिक स्थान पर शराब पीते मिले लोग

कार्रवाई की जद में बैकयार्ड कैफे (एमआर-11), शिकारबाड़ी ढाबा, गिल ढाबा, लालटेन ढाबा, एस.एस. जम्मू-कश्मीर, देशी तड़का, अवंतिका ढाबा, मां दुर्गा ढाबा, मेट्रो ढाबा, पंजतारा ढाबा, जुगनू का ढाबा, काका की महफिल, यश ढाबा, वीर जी का ढाबा, शिव शक्ति ढाबा, कमल कपूर ढाबा, न्यू सिटिंग जॉन ढाबा और कैंडल्स ढाबा सहित कई प्रतिष्ठान शामिल रहे।

सवाल सिर्फ ढाबों पर नहीं, पूरे सिस्टम पर है

इंदौर में ढाबों और हाईवे रेस्टोरेंट्स पर कार्रवाई कोई नई बात नहीं है। पिछले कई महीनों में आबकारी विभाग समय-समय पर ऐसे अभियान चलाता रहा है। हर बार प्रकरण दर्ज होते हैं, शराब जब्त होती है और सख्त कार्रवाई के दावे किए जाते हैं।

  • फिर भी कुछ समय बाद तस्वीर लगभग वैसी ही दिखाई देती है।
  • यहीं से सबसे बड़ा सवाल शुरू होता है।
  • अगर कार्रवाई लगातार हो रही है, तो क्या उसका असर जमीन पर दिखाई दे रहा है?
  • अगर नहीं, तो आखिर कमी कहां है?

क्या कार्रवाई चुनिंदा ढाबों तक ही सीमित है?

एमआर-11, बायपास, उज्जैन रोड और रिंग रोड पर बड़ी संख्या में ढाबे और रेस्टोरेंट संचालित हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि—

  • क्या हर अभियान में पूरे कॉरिडोर की जांच होती है?
  • या कार्रवाई केवल उन्हीं स्थानों तक सीमित रहती है जहां शिकायत मिलती है या टीम पहुंचती है?
  • अगर पूरे क्षेत्र का एक साथ ऑडिट किया जाए, तो क्या तस्वीर इससे भी बड़ी हो सकती है?

इन सवालों के जवाब फिलहाल सार्वजनिक नहीं हैं।

डर खत्म हो गया या सिस्टम कमजोर है?

अगर हर कुछ महीनों में फिर उसी तरह की कार्रवाई करनी पड़ रही है, तो इसका मतलब दो में से एक बात जरूर है—

  • या तो नियम तोड़ने वालों में कार्रवाई का डर नहीं बचा...
  • या फिर कार्रवाई के बाद निगरानी और फॉलो-अप इतना प्रभावी नहीं है कि अवैध गतिविधियां दोबारा शुरू न हो सकें।

यह सवाल केवल ढाबा संचालकों पर नहीं, बल्कि पूरे प्रवर्तन तंत्र की प्रभावशीलता पर भी खड़ा होता है।

Expose Live Questions

  • बार-बार कार्रवाई के बावजूद यही समस्या क्यों लौट आती है?
  • जिन ढाबों पर पहले कार्रवाई हुई थी, क्या उनकी दोबारा जांच हुई?
  • पूरे बायपास और एमआर-11 कॉरिडोर में कुल कितने ढाबे हैं और उनमें से कितनों का निरीक्षण हुआ?
  • क्या आबकारी विभाग, स्थानीय पुलिस और अन्य एजेंसियों की संयुक्त निगरानी व्यवस्था है?
  • अगर है, तो फिर बार-बार उसी तरह की कार्रवाई की नौबत क्यों आ रही है?

अधिकारी क्या बोले?

सहायक आबकारी आयुक्त अभिषेक तिवारी ने कहा कि अवैध मदिरा के निर्माण, संग्रहण, परिवहन और विक्रय के साथ-साथ बिना लाइसेंस शराब परोसने तथा सार्वजनिक स्थानों पर मदिरापान करने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Expose Live Take

44 केस दर्ज होना प्रशासनिक कार्रवाई है।

लेकिन महीनों से लगातार हो रही ऐसी कार्रवाइयों के बावजूद अगर इंदौर का 'ढाबा कल्चर' जस का तस बना हुआ है, तो बहस सिर्फ नियम तोड़ने वालों तक सीमित नहीं रह सकती।

अब जरूरत इस बात की है कि कार्रवाई के आंकड़ों से आगे बढ़कर यह भी बताया जाए कि लगातार दबिशों के बावजूद यह नेटवर्क बार-बार खड़ा कैसे हो जाता है, कितने प्रतिष्ठानों का नियमित ऑडिट होता है और क्या प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय वास्तव में उतना प्रभावी है जितना प्रेस नोटों में दिखाई देता है।

अगर बार-बार अभियान चल रहे हैं, बार-बार प्रकरण दर्ज हो रहे हैं और बार-बार वही तरह की अनियमितताएं सामने आ रही हैं, तो क्या कार्रवाई का असर जमीन पर दिखाई दे रहा है?

या फिर 'ढाबा कल्चर' पर लगाम लगाने के लिए केवल छापेमारी नहीं, बल्कि स्थायी निगरानी और सख्त दंडात्मक व्यवस्था की जरूरत है?

यही वह सवाल हैं, जिनका जवाब शहर जानना चाहता है।

ढाबा कल्चर... कार्रवाई जारी, सवाल भी जारी

  • 25 स्थानों पर एक साथ दबिश, बायपास, एमआर-11 और देवास नाका क्षेत्र समेत शहरभर में 51 प्रकरण दर्ज।
  • 'अवैध अहाता' अभियान के तहत 14 ढाबों और रेस्टोरेंट्स पर कार्रवाई, 27 प्रकरण दर्ज।
  • अभियान के अगले चरण में भी बायपास क्षेत्र के कई ढाबों पर दबिश, दो दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ कार्रवाई।
  • न्यू ईयर से पहले गिल ढाबा, शिकारबाड़ी, न्यू सिटिंग जॉन, लालटेन सहित कई चर्चित ढाबों पर फिर जांच और कार्रवाई।
  • अलग-अलग अभियानों में बिना लाइसेंस शराब परोसने, सार्वजनिक स्थान पर मदिरापान और अवैध शराब उपलब्ध कराने के मामलों में कई प्रकरण दर्ज, गिरफ्तारियां और शराब जब्त।

अब इन 5 सवालों के जवाब चाहिए

  1. इंदौर बायपास, एमआर-11 और आसपास कुल कितने ढाबे एवं रेस्टोरेंट संचालित हैं?
  2. इनमें से कितनों का नियमित निरीक्षण आबकारी विभाग करता है?
  3. पिछले दो वर्षों में कितने प्रतिष्ठानों पर एक से अधिक बार कार्रवाई हुई?
  4. बार-बार पकड़े गए प्रतिष्ठानों में कितनों के लाइसेंस निलंबित या निरस्त किए गए?
  5. अगर कार्रवाई लगातार हो रही है, तो 'ढाबा कल्चर' पर उसका स्थायी असर क्यों नहीं दिख रहा?