18 महीने का सपना... 4 साल की हकीकत, 56 करोड़ का ब्रिज 176 करोड़ में बना, फिर भी पब्लिक को मिला आधा रास्ता

18 महीने में पूरा होने का दावा करने वाला इंदौर का पहला डबल डेकर ब्रिज करीब 4 साल बाद भी अधूरा है। ₹56.67 करोड़ की परियोजना की लागत बढ़कर लगभग ₹176 करोड़ पहुंच गई, जबकि जनता को फिलहाल सिर्फ एक कैरिज-वे ही मिला। EXPOSE LIVE की पड़ताल में जानिए देरी, बढ़ती लागत और सरकारी जवाबदेही पर उठते बड़े सवाल।

18 महीने का सपना... 4 साल की हकीकत, 56 करोड़ का ब्रिज 176 करोड़ में बना, फिर भी पब्लिक को मिला आधा रास्ता

जिस पुल से ट्रैफिक उड़ना था, वहीं सवालों का जाम लग गया, उद्घाटन हुआ, लेकिन कहानी अभी भी अधूरी है... और मंजिल अभी दूर

इंदौर। 

शहर के पहले डबल डेकर ब्रिज का इंतजार आखिरकार खत्म तो हुआ, लेकिन पूरी तरह नहीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 23 जुलाई को लवकुश चौराहे पर बने डबल डेकर ब्रिज की सिर्फ एक कैरिज-वे (एक भुजा) का उद्घाटन कर उसे यातायात के लिए खोल दिया। यानी जिस परियोजना को इंदौर की ट्रैफिक क्रांति बताया गया था, उसकी शुरुआत भी आधी हुई और मंजिल भी अभी भी दूर है।

सबसे बड़ा सवाल उद्घाटन का नहीं, उस वादे का है जो चार साल पहले किया गया था।

क्योंकि सरकारी परियोजनाएं सिर्फ सीमेंट, स्टील और कंक्रीट से नहीं बनतीं। उनमें जनता का पैसा, जनता का भरोसा और जनता का समय भी लगता है।

इंदौर का यह डबल डेकर ब्रिज सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि सरकारी परियोजनाओं की समयसीमा, लागत और जवाबदेही का भी आईना बन गया है।

18 महीने का दावा... लेकिन 4 साल बाद भी अधूरा पुल

2 सितंबर 2022 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस डबल डेकर ब्रिज का भूमिपूजन किया था। उस समय दावा किया गया था कि 18 महीने में निर्माण पूरा हो जाएगा। यानी मार्च 2024 तक पूरा ब्रिज शहर को मिल जाना चाहिए था।

मतलब मार्च 2024 तक इंदौरवासियों को जाम से राहत मिल जानी चाहिए थी। लेकिन कैलेंडर के पन्ने बदलते रहे... महीने साल में बदल गए... और परियोजना पूरी होने का इंतजार भी बढ़ता गया।

आज, करीब चार साल बाद, पूरा ब्रिज नहीं बल्कि उसकी सिर्फ एक भुजा जनता के लिए खोली गई है।

56 करोड़ से शुरू हुई परियोजना... 176 करोड़ तक पहुंच गई

जब परियोजना की घोषणा हुई थी तब इसकी अनुमानित लागत ₹56.67 करोड़ थी।

निर्माण के दौरान डिजाइन में बदलाव, मेट्रो परियोजना के साथ समन्वय, स्टील स्ट्रक्चर, यूटिलिटी शिफ्टिंग और अन्य तकनीकी कारणों के चलते लागत बढ़ते-बढ़ते करीब ₹176 करोड़ तक पहुंच गई।

यानी लागत लगभग तीन गुना हो गई। इतना खर्च बढ़ने के बावजूद शहर को अब तक पूरा डबल डेकर ब्रिज नहीं मिल पाया।

उद्घाटन पूरा... या सिर्फ शुरुआत?

23 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिर्फ एक कैरिज-वे का उद्घाटन किया। यानी बाणगंगा से सांवेर तरफ की।

यानी चार साल इंतजार करने के बाद भी इंदौरवासियों को पूरा डबल डेकर ब्रिज नहीं मिला। दूसरी भुजा अब भी निर्माणाधीन है।

आईडीए का कहना है कि दूसरी कैरिज-वे को सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। लेकिन इसे कब खोला जाएगा, इसकी कोई निश्चित तारीख आज भी घोषित नहीं की गई है।

एक नजर में

  • भूमिपूजन: 2 सितंबर 2022
  • घोषित लागत: ₹56.67 करोड़
  • निर्धारित समयसीमा: 18 महीने
  • वर्तमान लागत: लगभग ₹176 करोड़
  • निर्माण अवधि: लगभग 4 वर्ष
  • 23 जुलाई 2026: केवल एक कैरिज-वे का उद्घाटन
  • दूसरी भुजा: सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य, लेकिन उद्घाटन की तारीख तय नहीं

EXPOSE LIVE Lens | सवाल सिर्फ पुल का नहीं, सिस्टम का है

आज की पीढ़ी ऐसे भारत में जी रही है जहां हर बड़े प्रोजेक्ट के साथ डेडलाइन, बजट और विकास की बातें होती हैं।

लेकिन जब 18 महीने का वादा चार साल में बदल जाए, ₹56 करोड़ का प्रोजेक्ट ₹176 करोड़ तक पहुंच जाए और उसके बाद भी जनता को पूरा नहीं, आधा ब्रिज मिले, तो सवाल सिर्फ निर्माण पर नहीं उठते... जवाबदेही पर भी उठते हैं।

इंदौर को आखिरकार एक नई ट्रैफिक सुविधा मिली है, लेकिन इसके साथ कई ऐसे सवाल भी खड़े हो गए हैं जिनका जवाब सिर्फ उद्घाटन समारोह नहीं दे सकता।

EXPOSE LIVE पूछता है— क्योंकि ये आपके सवाल हैं...

अगर लक्ष्य 18 महीने का था, लागत ₹56 करोड़ थी और दावा तेज विकास का था, तो चार साल और ₹176 करोड़ खर्च होने के बाद भी इंदौरवासियों को पूरा डबल डेकर ब्रिज क्यों नहीं मिला? 

यह सिर्फ देरी है... या सरकारी परियोजनाओं की निगरानी और जवाबदेही की सबसे बड़ी परीक्षा?

  • अगर लक्ष्य 18 महीने का था… तो काम चार साल तक क्यों खिंचा?
  • अगर लागत ₹56 करोड़ थी… तो वह ₹176 करोड़ कैसे पहुंच गई?
  • अगर परियोजना पूरी नहीं हुई थी… तो सिर्फ एक भुजा का उद्घाटन क्यों?
  • अगर दूसरी भुजा तैयार नहीं है… तो उसकी तारीख कौन बताएगा?