सैटेलाइट की नजर में होगा इंदौर, सवाल— क्या तकनीक के साथ तय होगी जवाबदेही भी?

इंदौर नगर निगम ने PIMS पोर्टल लॉन्च कर सैटेलाइट इमेज और GIS तकनीक से अवैध निर्माण की निगरानी शुरू करने का दावा किया है। लेकिन क्या इससे सिर्फ नए निर्माणों पर नजर रहेगी या पुराने अवैध निर्माणों और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी? पढ़िए Expose Live का विश्लेषण।

सैटेलाइट की नजर में होगा इंदौर, सवाल— क्या तकनीक के साथ तय होगी जवाबदेही भी?

नगर निगम ने लॉन्च किया PIMS पोर्टल, दावा GIS और सैटेलाइट इमेज से होगी नए निर्माणों की निगरानी, अवैध निर्माण ही नहीं, इसकी अनदेखी भी छिप नहीं सकेगी

इंदौर। 

इंदौर नगर निगम ने अवैध निर्माणों की निगरानी और बिना अनुमति विकास पर रोक के लिए Property Information Management System (PIMS) पोर्टल लॉन्च किया है। नगर निगम का दावा है कि अब सैटेलाइट इमेज और GIS (Geographic Information System) तकनीक की मदद से शहर में होने वाले बड़े निर्माण कार्यों की निगरानी की जाएगी और बिना अनुमति निर्माण की शुरुआती स्तर पर ही पहचान कर वैधानिक कार्रवाई की जा सकेगी।

नगर निगम के अनुसार पोर्टल में जनवरी 2023 के बाद नगर क्षेत्र में हुए निर्माण कार्यों का डेटा और सैटेलाइट इमेज शामिल की गई हैं। अधिकारी किसी भी क्षेत्र में नए निर्माण की तुलना पुरानी सैटेलाइट तस्वीरों से कर सकेंगे। यदि निर्माण स्वीकृत मानकों के विपरीत पाया जाता है या बिना अनुमति किया जाता है, तो उसकी पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

PIMS पोर्टल में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) विभाग द्वारा स्वीकृत ले-आउट भी एकीकृत किए गए हैं। नगर निगम का कहना है कि इससे अवैध कॉलोनियों की पहचान आसान होगी। वहीं नागरिक भी संपत्ति खरीदने से पहले किसी कॉलोनी की वैधता की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

नगर निगम की रणनीति का नया चरण

अवैध निर्माण के खिलाफ यह नगर निगम की पहली तकनीकी पहल नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल नोटिस प्रणाली लागू की गई, कई बड़े बुलडोजर अभियान चलाए गए और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की गई। अब PIMS के जरिए निगरानी को तकनीक आधारित बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि शिकायत या निरीक्षण का इंतजार किए बिना निर्माण गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।

लेकिन यहीं से उठते हैं बड़े सवाल

PIMS की सबसे अहम जानकारी यह है कि इसमें फिलहाल जनवरी 2023 के बाद के निर्माण और सैटेलाइट डेटा को शामिल किया गया है। ऐसे में पहला सवाल यह है कि 2023 से पहले बने उन निर्माणों का क्या होगा, जो स्वीकृत मानचित्र के विपरीत हैं या जिन पर कभी कार्रवाई नहीं हुई? क्या उन्हें भी चरणबद्ध तरीके से इस सिस्टम में जोड़ा जाएगा या PIMS का फोकस केवल नए निर्माणों पर रहेगा?

दूसरा सवाल नगर निगम के मौजूदा डेटा तंत्र से जुड़ा है। शहर में हर वर्ष लाखों संपत्तियों से प्रॉपर्टी टैक्स वसूला जाता है और संपत्तियों का रिकॉर्ड नगर निगम के पास उपलब्ध रहता है। ऐसे में यह जानना भी महत्वपूर्ण होगा कि क्या नगर निगम के पास आज तक स्वीकृत भवन अनुज्ञा और वास्तविक निर्माण के बीच अंतर का कोई समेकित डिजिटल डेटाबेस नहीं था? यदि ऐसा है, तो PIMS पहली ऐसी व्यवस्था होगी जो प्रॉपर्टी रिकॉर्ड, भवन अनुज्ञा, GIS मैपिंग और सैटेलाइट डेटा को एक साथ जोड़कर निगरानी करेगी। 

असली परीक्षा कार्रवाई की है

नई व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत केवल सैटेलाइट निगरानी नहीं, बल्कि डिजिटल ट्रैकिंग है। यदि किसी इलाके में बिना अनुमति निर्माण शुरू होता है और सिस्टम उसे शुरुआती स्तर पर चिन्हित कर देता है, तो भविष्य में यह सवाल भी उठेगा कि कार्रवाई कितनी जल्दी हुई और यदि नहीं हुई, तब सवाल केवल अवैध निर्माण करने वाले पर नहीं, बल्कि उसकी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई में देरी करने वाले अधिकारियों पर भी उठेंगे। 

यानी PIMS सिर्फ अवैध निर्माण की पहचान करने वाला पोर्टल नहीं, बल्कि नगर निगम की निगरानी व्यवस्था की भी परीक्षा बनेगा।

Expose Live Lens

इंदौर नगर निगम ने अवैध निर्माण रोकने के लिए अब तक नोटिस, बुलडोजर और प्रशासनिक कार्रवाई जैसे कई उपाय अपनाए हैं। PIMS उन प्रयासों का अगला तकनीकी चरण है। लेकिन इसकी सफलता पोर्टल लॉन्च होने से नहीं, बल्कि तीन सवालों के जवाब से तय होगी—

  • क्या 2023 से पहले के संदिग्ध या अवैध निर्माणों को भी इस डिजिटल सिस्टम का हिस्सा बनाया जाएगा?
  • क्या सैटेलाइट से मिले अलर्ट पर समयबद्ध कार्रवाई होगी?
  • और सबसे महत्वपूर्ण, क्या अब अवैध निर्माण के साथ-साथ उसे नजरअंदाज करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी?

क्योंकि तकनीक अवैध निर्माण पकड़ सकती है, लेकिन अवैध निर्माण रोकने के लिए तकनीक से ज्यादा जरूरी है समय पर कार्रवाई। PIMS की असली सफलता सैटेलाइट इमेज से नहीं, बल्कि इस बात से मापी जाएगी कि उसके अलर्ट के बाद कितनी जल्दी कार्रवाई होती है और क्या उस कार्रवाई की जवाबदेही भी तय होती है। 

यदि इन सवालों का जवाब "हां" में मिलता है, तो PIMS इंदौर में शहरी निगरानी का नया मॉडल बन सकता है। यदि नहीं, तो यह भी कई डिजिटल परियोजनाओं की तरह केवल एक और पोर्टल बनकर रह जाने का जोखिम उठाएगा।

क्या बोले निगमायुक्त?

PIMS पोर्टल के माध्यम से नगर निगम अब सैटेलाइट इमेज और GIS तकनीक की मदद से नए निर्माण कार्यों की प्रभावी निगरानी कर सकेगा। इससे बिना अनुमति निर्माण और स्वीकृत मानकों के विपरीत विकास की समय रहते पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करना आसान होगा। साथ ही नागरिकों को भी स्वीकृत कॉलोनियों और संपत्तियों की जानकारी अधिक पारदर्शी तरीके से उपलब्ध होगी।

— क्षितिज सिंघल, कमिश्नर, नगर पालिका निगम इंदौर