इंदौर को स्वच्छ वायु में देश में नंबर-2 का तमगा, पर हकीकत में 'डेटा का खेल': सबसे प्रदूषित इलाकों के मीटर बंद, फिर कैसे मिला अवॉर्ड?

इंदौर को स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में देश की दूसरी सबसे साफ हवा का अवॉर्ड मिला, लेकिन कहानी में बड़ा ट्विस्ट है! MPPCB के आंकड़ों के मुताबिक 92 दिनों में विजय नगर और रीजनल पार्क के AQI मीटर 100% बंद रहे, जबकि ₹250 करोड़ खर्च करने के बाद भी PM10 सुरक्षित मानक से 35% ऊपर दर्ज है। आखिर नंबर-2 की रैंकिंग कैसे मिली—साफ हवा या सिर्फ कागजी नंबर्स का खेल? जानिए अवॉर्ड के पीछे का पूरा डेटा सच।

इंदौर को स्वच्छ वायु में देश में नंबर-2 का तमगा, पर हकीकत में 'डेटा का खेल': सबसे प्रदूषित इलाकों के मीटर बंद, फिर कैसे मिला अवॉर्ड?
AI Generated

MPPCB के 8 में से 3 प्रमुख स्टेशन महीनों से ठप, ₹250 करोड़ फूंकने के बाद भी PM10 मानक से 35% ज्यादा; क्या केवल अधूरी स्टडी और कागजी एक्शन प्लान के दम पर बटोरा गया राष्ट्रीय पुरस्कार?

इंदौर। डेटा इन्वेस्टिगेशन

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की झोली में एक और राष्ट्रीय उपलब्धि आई है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में इंदौर ने देश में दूसरा स्थान हासिल कर राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सराहना पुरस्कार अपने नाम किया है। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और स्वच्छता प्रभारी अश्विनी शुक्ला ने यह सम्मान ग्रहण किया। स्वच्छता के बाद स्वच्छ आबोहवा के मंच पर शहर का परचम लहराना निःसंदेह इंदौरवासियों के लिए गर्व का क्षण है और नगर निगम व प्रशासन के इन प्रयासों की सराहना की जानी चाहिए।

लेकिन, जश्न और पीठ थपथपाने के इस दौर में उस जमीनी हकीकत पर नजर डालना भी बेहद जरूरी है जिसे सरकारी फाइलों के नीचे दबा दिया गया है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के दैनिक रिकॉर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के 'प्राणा' (PRANA) पोर्टल के आधिकारिक वित्तीय व वैज्ञानिक डेटा की पड़ताल करें, तो पेश किए गए दावों और धरातल की सच्चाई में ज़मीन-आसमान का अंतर साफ नजर आता है।

1. बोर्ड के 8 में से 3 स्टेशन ठप: प्रदूषण का स्तर और चालू रहने का औसत

MPPCB के आधिकारिक रिकॉर्ड में इंदौर शहर के कुल 8 मॉनिटरिंग स्टेशन दर्ज हैं। 01 जून से 06 सितंबर 2026 तक के 92 दिनों के दैनिक आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि जिन स्टेशनों के दम पर वायु गुणवत्ता का दावा किया गया, उनमें से 3 सबसे महत्वपूर्ण केंद्र रडार से ही गायब थे:

क्र.

स्टेशन का नाम

सक्रिय दिन (डेटा मिला)

बंद दिन (NA)

चालू रहने के दौरान औसत AQI

न्यूनतम - अधिकतम रेंज (AQI)

CPCB मानक श्रेणी (जब चालू थे)

1

Indore, Pologround

22

70

160.3

148 – 174

मध्यम (Moderate) — 22 जून के बाद से बंद

2

Indore, Chhoti Gwaltoli

84

8

81.1

32 – 142

संतोषजनक (Satisfactory)

3

Indore, Regional Park N Nigam

75

17

67.6

18 – 101

संतोषजनक (Satisfactory)

4

Indore, Airport Area

77

15

52.5

35 – 91

संतोषजनक (Satisfactory)

5

Indore, Residency Area

79

13

37.4

10 – 65

अच्छा (Good)

6

Indore, Maguda Nagar

77

15

35.5

24 – 57

अच्छा (Good)

7

Indore, Vijay Nagar

0

92

N/A

N/A

N/A (पूरे 92 दिन बंद रहा)

8

Indore, Regional Park

0

92

N/A

N/A

N/A (पूरे 92 दिन बंद रहा)

  • सक्रिय स्टेशनों के औसतों का सीधा माध्य: 72.4 (संतोषजनक श्रेणी)
  • दैनिक शहर औसत का समग्र माध्य (92 दिन): 63.8 (संतोषजनक श्रेणी)

(नोट: न्यूनतम-अधिकतम रेंज उस स्टेशन पर दर्ज सबसे स्वच्छ और सबसे प्रदूषित दिन के AQI को दर्शाती है।)

2. स्टेशनों की टाइमलाइन: कब से कब तक चालू और कब से बंद रहे?

एक्सेल शीट के दैनिक टाइमलाइन विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि कौन-सा स्टेशन किस तारीख से किस तारीख तक सक्रिय रहा और कब तकनीकी खराबी या लापरवाही के कारण बंद पड़ा रहा:

स्टेशन का नाम

सक्रिय दिन

बंद दिन (NA)

कब से कब तक चालू रहा (Active Period)

कब से कब तक बंद रहा (Offline / Breakdown Period)

वर्तमान स्थिति

Indore, Vijay Nagar

0

92

कभी चालू नहीं रहा

01 जून से 06 सितंबर (पूरे 92 दिन लगातार बंद)

100% ठप (शून्य डेटा)

Indore, Regional Park

0

92

कभी चालू नहीं रहा

01 जून से 06 सितंबर (पूरे 92 दिन लगातार बंद)

100% ठप (शून्य डेटा)

Indore, Pologround

22

70

• 02 जून (1 दिन)• 11 से 19 जून (9 दिन)• 21 जून, 25-28 जून (5 दिन)• 30 जून (1 दिन)

• 04 से 09 जून (6 दिन)• जून में भी 01, 03, 10, 20, 22-23 और 29 जून को बंद रहा• 01 जुलाई से 06 सितंबर (लगातार 68 दिन से पूरी तरह बंद)

लंबे समय से ऑफलाइन

Indore, Airport Area

77

15

• 01 जून, 10-14 जून, 17-23 जून, 26-29 जून• 01 जुलाई से 18 अगस्त (लगातार 49 दिन सक्रिय)• 27 अगस्त से 06 सितंबर

02 से 09 जून (लगातार 8 दिन बंद)• 15-16 जून, 25 जून, 30 जून• 19 से 26 अगस्त (8 दिन का ब्रेक)

सक्रिय

Indore, Residency Area

79

13

• 01 से 13 जून, 17-23 जून, 26-29 जून• 01 से 06 जुलाई, 14-21 जुलाई• 23 जुलाई से 06 सितंबर (लगातार 45 दिन सक्रिय)

• 14 से 16 जून (3 दिन)• 25 जून, 30 जून• 07 से 13 जुलाई (लगातार 7 दिन बंद)• 22 जुलाई

सक्रिय

Indore, Maguda Nagar

77

15

• जून में रुक-रुक कर सक्रिय• 01-09 जुलाई, 11-23 जुलाई• 25 जुलाई से 18 अगस्त (लगातार 25 दिन सक्रिय)• 27 अगस्त से 06 सितंबर

• 08 से 10 जून (3 दिन)• 15-16 जून, 25 जून, 27 जून, 30 जून• 10 जुलाई, 24 जुलाई, 19-26 अगस्त

सक्रिय

Indore, Regional Park N Nigam

75

17

• 02-14 जून, 17-20 जून• 11 अगस्त से 06 सितंबर (लगातार 27 दिन सक्रिय)

• 01 जून, 15-16 जून, 21-22 जून, 25 जून, 30 जून-01 जुलाई• 04 से 22 जुलाई (लगातार 19 दिन)• 23-24 जुलाई, 27-28 जुलाई, 01-02 अगस्त, 09-10 अगस्त

सक्रिय

Indore, Chhoti Gwaltoli

84

8

• 01-14 जून, 17-23 जून• 08-22 जुलाई• 24 जुलाई से 06 सितंबर (लगातार 45 दिन सक्रिय)

• 15-16 जून, 25 जून, 30 जून• 05 से 07 जुलाई (3 दिन)• 23 जुलाई

सबसे नियमित

(स्क्रीनशॉट 7 सितंबर 2026 का है। पीसीबी एमपी के पोर्टल से)

ग्रीन पॉकेट्स के दम पर कागजी 'गुलाबी तस्वीर'

जब सबसे ज्यादा धुएं और धूल वाले इलाके—विजयनगर और पोलोग्राउंड—सिस्टम से बाहर कर दिए गए, तो इंदौर का शहर-स्तरीय औसत खुद-ब-खुद नीचे आ गया। शहर का तथाकथित 'स्वच्छ' औसत केवल रेसीडेंसी एरिया (37.4) और मगुदा नगर (35.5) जैसे पेड़ों से घिरे वीआईपी इलाकों के आंकड़ों पर टिका रहा।

सवाल उठता है कि क्या केवल चंद हरे-भरे कोनों की हवा को 35 लाख आबादी वाले पूरे इंदौर की हवा मान लेना जनता के स्वास्थ्य के साथ सीधा छलावा नहीं है? वहीं, जून में शहर का अधिकतम AQI 173 तक पहुंचा था; जुलाई, अगस्त और सितंबर में जो सुधार दिखा, उसमें बड़ा योगदान प्रदूषण नियंत्रण तंत्र का नहीं, बल्कि मॉनसून की बारिश (Washout Effect) का रहा।

'प्राणा' पोर्टल का सच: जमीनी सुधार या फाइलों और ऐप की औपचारिकता?

CPCB के 'प्राणा' (PRANA) पोर्टल पर शहरों के मूल्यांकन के जो मुख्य स्तंभ (Components) दर्ज हैं, वे साबित करते हैं कि यह अवॉर्ड असल हवा से ज्यादा कागजी चेकलॅप्स पर टिका है:

  • Source Apportionment Study अब भी अधूरी: पोर्टल पर शहर का 'प्रदूषण स्रोत अध्ययन' (Source Apportionment / Emission Inventory Studies) आज भी "Work Under Process" दर्ज है। यानी जिस शहर को देश में दूसरा स्थान मिला, प्रशासन के पास आज तक आधिकारिक तौर पर यह वैज्ञानिक आंकड़ा ही नहीं है कि शहर में वाहनों, फैक्ट्रियों, कचरे या निर्माण से कितने-कितने प्रतिशत प्रदूषण हो रहा है। जब बीमारी की सटीक पहचान ही नहीं, तो हवा स्वच्छ करने का दावा कितना प्रामाणिक है?
  • हवा की गुणवत्ता नहीं, फाइलों के नंबर: 'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण' की रैंकिंग का ढांचा ही ऐसा है जिसमें अधिकांश अंक प्रक्रियाओं (Process Compliance)—जैसे सिटी एक्शन प्लान अपलोड होना, GRAP की नीतियां बनना, शिकायत ऐप (PGRS) तैयार करना और सड़कें स्वीपिंग मशीन से साफ करना—पर मिलते हैं। वास्तविक हवा की गुणवत्ता (Ambient Air Quality) का वेटेज बेहद सीमित रहता है।

250 करोड़ खर्च करने के बाद भी हवा में जहर: सुरक्षित मानक से 35% ऊपर PM₁₀

'प्राणा' पोर्टल पर दर्ज वित्तीय और दीर्घकालिक वैज्ञानिक आंकड़ों ने इस अवॉर्ड के पीछे का सबसे बड़ा विरोधाभास उजागर कर दिया है:

  • ₹312.59 करोड़ का आवंटन, ₹250.19 करोड़ खर्च: 15वें वित्त आयोग (XV-FC) और NCAP के तहत इंदौर को कुल ₹312.59 करोड़ जारी किए गए, जिसमें से नगर निगम व संबंधित एजेंसियों ने ₹250.19 करोड़ (80.04%) खर्च कर दिए, जबकि ₹62.40 करोड़ (19.96%) फंड अब भी अप्रयुक्त पड़ा है। FY 2024-25 में जारी लगभग ₹55 करोड़ का यूटिलाइजेशन पोर्टल पर शून्य दिखता है।
  • 2018 से आज तक कभी सुरक्षित नहीं रही हवा: पोर्टल पर दर्ज Annual data of PM₁₀ since 2018 का ग्राफ दिखाता है कि इंदौर की हवा कभी राष्ट्रीय सुरक्षा मानक (वार्षिक सुरक्षित स्तर अधिकतम 60 μg/m³) के दायरे में आई ही नहीं:
  • 2017 से 2020 तक यह 80–90 μg/m³ के बीच रही।
  • 2022 से 2024 के बीच यह बढ़कर 105 से 110 μg/m³ तक पहुंच गई (मानक से लगभग दोगुनी)।
  • वर्ष 2025-26 में थोड़ी गिरावट के बावजूद यह लगभग 81 μg/m³ पर दर्ज है—यानी सुरक्षित राष्ट्रीय मानक (60) से अब भी लगभग 35% अधिक प्रदूषित

(स्क्रीनशॉट PRANA पोर्टल से)

सिस्टम से सीधे और चुभते सवाल:

1. 8 में से 3 स्टेशन ठप, तो अवॉर्ड कैसा?

जब विजय नगर का मीटर पूरे 92 दिन बंद रहा और पोलोग्राउंड 1 जुलाई से लगातार 68 दिनों तक ऑफलाइन रहा, तो किस वैज्ञानिक आधार पर इंदौर को देश में नंबर-2 घोषित कर दिया गया?

2. सेंसर बंद कर रैंकिंग सुधारने का फॉर्मूला?

अगर पोलोग्राउंड (जहां AQI 160 के पार था) और विजय नगर का डेटा लगातार सिस्टम में जुड़ता रहता, तो क्या इंदौर टॉप-3 में भी टिक पाता?

3. ढाई सौ करोड़ का हिसाब कहाँ?

वायु सुधार के नाम पर जनता के ₹250 करोड़ खर्च होने के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास विजय नगर और पोलोग्राउंड के सेंसर चालू रखने का तकनीकी अमला या बजट क्यों नहीं है?

4. असली सुधार या केवल 'सापेक्ष गिरावट'?

क्या मानक से 35% अधिक PM₁₀ होने के बावजूद केवल पिछले वर्षों (110 μg/m³) की तुलना में थोड़ी गिरावट दिखने और फंड खपाने पर ही राष्ट्रीय पुरस्कार दे दिया गया?

Expose Live Take

इंदौर की सफाई व्यवस्था और म्युनिसिपल अमले का समर्पण निसंदेह प्रशंसनीय है। शहर को मिला यह सम्मान भी हर इंदौरवासी के लिए गर्व की बात है और हमारा मकसद किसी अवॉर्ड या उपलब्धि का विरोध करना बिल्कुल नहीं है। लेकिन शहर की सरकार से हमारी सिर्फ एक दरख्वास्त है कि सम्मान के साथ जमीनी स्तर पर काम भी नजर आना चाहिए।

'स्वच्छ भारत' की सफलता की आड़ में बंद पड़े मॉनिटरिंग स्टेशनों, अधूरी स्टडीज और सुरक्षित मानकों से 35% अधिक प्रदूषण पर पर्दा डालना शहर की 35 लाख जनता की सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़ है। क्योंकि शहर की जनता क्या भुगत रही है, यह सरकार भी अच्छे से जानती है।

अवॉर्ड का जश्न जरूर मनाइए, क्योंकि यह शहर का गौरव है। लेकिन जश्न तब और सच्चा होगा, जब कागजी फाइलों के साथ जमीनी हकीकत भी बदले। वरना ये अवॉर्ड सिर्फ रैक में सजाने के काम ही आएंगे।