मंच पर 'नारी शक्ति'... मैदान में 'पुरुष शक्ति'? मध्य प्रदेश के 55 जिलों में सिर्फ 14 महिला कलेक्टर, 10 संभागों में सिर्फ एक महिला कमिश्नर

मध्य प्रदेश की ताजा IAS ट्रांसफर सूची के बाद The Expose Live का डेटा विश्लेषण। 55 जिलों में सिर्फ 14 महिला कलेक्टर और 10 संभागों में केवल एक महिला संभागायुक्त। जानिए फील्ड एडमिनिस्ट्रेशन में महिलाओं की वास्तविक हिस्सेदारी कैसी है।

मंच पर 'नारी शक्ति'... मैदान में 'पुरुष शक्ति'? मध्य प्रदेश के 55 जिलों में सिर्फ 14 महिला कलेक्टर, 10 संभागों में सिर्फ एक महिला कमिश्नर

क्या महिला नेतृत्व सिर्फ राजनीतिक विमर्श तक सीमित है या प्रशासनिक ढांचे में भी उसकी बराबर भागीदारी दिखती है? 

The Expose Live की इस एक्सक्लूसिव सीरीज़ की पहली रिपोर्ट मध्य प्रदेश के फील्ड एडमिनिस्ट्रेशन का डेटा ऑडिट पेश करती है

भोपाल।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव... महिला नेतृत्व और नारी सशक्तिकरण की बातें राजनीतिक भाषणों का अहम हिस्सा हैं। लेकिन जब The Expose Live ने मध्य प्रदेश की 24 जुलाई की IAS ट्रांसफर सूची के बाद सरकार के सबसे अहम फील्ड एडमिनिस्ट्रेशन का डेटा खंगाला, तो तस्वीर कुछ अलग नजर आई। 55 जिलों में सिर्फ 14 महिला कलेक्टर हैं और 10 संभागों में सिर्फ एक महिला संभागायुक्त। सवाल यह नहीं कि महिलाएं सक्षम हैं या नहीं, सवाल यह है कि सरकार का फील्ड चेहरा आज भी इतना पुरुष-प्रधान क्यों है?

MP FIELD ADMINISTRATION AUDIT

जिला प्रशासन

  • कुल जिले: 55
  • महिला कलेक्टर: 14
  • पुरुष कलेक्टर: 41
  • महिला हिस्सेदारी: 25.45%
  • पुरुष हिस्सेदारी: 74.55%

संभाग प्रशासन

  • कुल संभाग: 10
  • महिला संभागायुक्त: 1
  • पुरुष संभागायुक्त: 9
  • महिला हिस्सेदारी: 10%

महिला संभागायुक्त

शहडोल में सुरभि गुप्ता।

जिलों की कमान... लेकिन महिलाओं के हाथ कम

भारत में जिला कलेक्टर सिर्फ एक प्रशासनिक पद नहीं, बल्कि सरकार का सबसे मजबूत फील्ड फेस होता है। कानून-व्यवस्था, विकास योजनाएं, चुनाव, आपदा प्रबंधन, निवेश, राजस्व—हर बड़ा फैसला आखिरकार कलेक्टर के सिस्टम से होकर गुजरता है।

यानी अगर किसी सरकार का असली प्रशासनिक चेहरा देखना हो तो शुरुआत जिलों से होती है।

और यहीं सबसे बड़ा डेटा सामने आता है।

प्रदेश के 55 जिलों में सिर्फ 14 जिलों की कमान महिला IAS अधिकारियों के पास है, जबकि 41 जिलों का नेतृत्व पुरुष अधिकारियों के हाथ में है।

यानी हर चार जिलों में सिर्फ एक महिला कलेक्टर।

IAS ट्रांसफर ने तस्वीर और बदली

24 जुलाई की IAS ट्रांसफर सूची में तीन महिला अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदलीं।

  • मिशा सिंह रतलाम से शहडोल पहुंचीं।
  • अदिति गर्ग को मंदसौर से मंत्रालय भेज दिया गया।
  • प्रीति यादव को आगर मालवा से MPIDC इंदौर भेजा गया।

इसके बाद—

  • रतलाम में पुरुष कलेक्टर आए।
  • मंदसौर में पुरुष कलेक्टर आए।
  • आगर मालवा में भी पुरुष अधिकारी की नियुक्ति हुई।

यानी तीन महिला IAS फील्ड पोस्टिंग से बाहर हो गईं, जबकि सिर्फ एक महिला दूसरे जिले में पहुंचीं।

डाटा एमपी इंफो की अधकारिक वेबसाइट के अनुसार

संभाग की तस्वीर और भी चौंकाती है

अगर जिला सरकार का चेहरा है, तो संभाग उस चेहरे का कंट्रोल रूम।

मध्य प्रदेश के 10 संभागों में सिर्फ एक महिला संभागायुक्त हैं—सुरभि गुप्ता, शहडोल।

बाकी नौ संभागों की कमान पुरुष अधिकारियों के पास है।

यानी जिला स्तर पर जहां महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 25% है, वहीं संभाग स्तर पर यह घटकर सिर्फ 10% रह जाती है।

सवाल सिर्फ संख्या का नहीं, संदेश का भी है

देश में महिला नेतृत्व को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।

'नारी शक्ति' सरकार की प्रमुख राजनीतिक थीम रही है।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक कई मंचों से कर चुके हैं।

लेकिन मध्य प्रदेश के फील्ड एडमिनिस्ट्रेशन का डेटा एक अलग सवाल खड़ा करता है—

अगर सरकार का सबसे अहम प्रशासनिक चेहरा जिला और संभाग हैं, तो वहां महिलाओं की हिस्सेदारी अभी भी इतनी सीमित क्यों है?

इसका जवाब सरकार के पास हो सकता है—वरिष्ठता, उपलब्धता, प्रशासनिक जरूरतें या अन्य कारण। लेकिन सार्वजनिक रूप से ऐसी कोई नीति सामने नहीं है जो इस तस्वीर को स्पष्ट करे।

DATA CHECK

तीन तथ्य जो ध्यान खींचते हैं

  • 55 में सिर्फ 14 महिला कलेक्टर
  • 10 में सिर्फ 1 महिला संभागायुक्त
  • ताजा ट्रांसफर में तीन महिला कलेक्टर फील्ड पोस्टिंग से बाहर हुईं

Expose Live Lens

यह रिपोर्ट किसी अधिकारी की क्षमता पर सवाल नहीं उठाती।

यह किसी सरकार पर आरोप भी नहीं लगाती।

लेकिन आंकड़े एक सवाल जरूर उठाते हैं।

जब महिला नेतृत्व राजनीतिक विमर्श का प्रमुख हिस्सा है, तब क्या प्रशासनिक नेतृत्व में भी वही प्राथमिकता दिखाई देती है?

या फिर फील्ड पोस्टिंग का समीकरण अभी भी पुरुष अधिकारियों के पक्ष में ज्यादा झुका हुआ है?

यही सवाल इस सीरीज़ की शुरुआत है।

NEXT IN EXPOSE EXCLUSIVE

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जिलों में प्रशासनिक कमान की तस्वीर आपने देखी। अब बारी कानून-व्यवस्था संभालने वाले पुलिस नेतृत्व की। मध्य प्रदेश में कितनी महिला IPS अधिकारी फील्ड में हैं? कितनी जिलों की कमान महिला पुलिस अधीक्षकों (SP) के हाथ में है? क्या पुलिस महकमे की तस्वीर प्रशासन से अलग है या यहां भी नेतृत्व पुरुष अधिकारियों के पास ज्यादा है?