91 हजार सरकारी स्कूल... फिर भी 27 हजार निजी स्कूलों में 47% बच्चे, आखिर भरोसा किस पर?

मध्य प्रदेश विधानसभा में सरकारी स्कूलों पर सरकार के जवाब और UDISE+ 2025-26 के आंकड़ों का बड़ा विश्लेषण। प्रदेश में 91,199 सरकारी स्कूल और लगभग 4 लाख शिक्षक होने के बावजूद 71.67 लाख छात्र निजी स्कूलों में क्यों पढ़ रहे हैं? पढ़िए EXPOSE EDUCATION की पहली पड़ताल।

91 हजार सरकारी स्कूल... फिर भी 27 हजार निजी स्कूलों में 47% बच्चे, आखिर भरोसा किस पर?

विधानसभा में सरकार बोली- "स्कूल बंद नहीं हुए, सिर्फ मर्ज हुए"... लेकिन UDISE के आंकड़े बता रहे हैं कि चुनौती इमारतों की नहीं, भरोसे की है

भोपाल।

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों की कमी नहीं है। कमी अगर कहीं दिखाई देती है, तो भरोसे की।

मध्य प्रदेश विधानसभा में जब सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने का सवाल उठा तो सरकार का जवाब साफ था—प्रदेश में कोई स्कूल बंद नहीं किया गया। 'एक परिसर-एक शाला' योजना और सांदीपनी विद्यालय योजना के तहत केवल स्कूलों का विलय (मर्ज) किया गया है। शून्य नामांकन वाले स्कूल असंचालित रहते हैं और उन्हें स्कूल चलें हम अभियान, चाइल्ड ट्रैकिंग तथा अन्य प्रयासों के जरिए दोबारा संचालित करने की कोशिश की जाती है।

सरकार का जवाब विधानसभा के रिकॉर्ड में दर्ज हो गया।

लेकिन इसी बीच UDISE+ 2025-26 के आधिकारिक आंकड़े एक ऐसा सवाल खड़ा कर रहे हैं, जो सिर्फ स्कूलों की संख्या का नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा पर लोगों के भरोसे का भी है।

प्रदेश में 76 प्रतिशत स्कूल सरकारी हैं, लेकिन उनमें पढ़ने वाले छात्रों की हिस्सेदारी करीब 52 प्रतिशत रह गई है। दूसरी ओर, सिर्फ 23 प्रतिशत निजी स्कूलों में प्रदेश के करीब 47 प्रतिशत छात्र पढ़ रहे हैं।

यानी सवाल अब यह नहीं है कि स्कूल कितने हैं… सवाल यह है कि बच्चे किस स्कूल को चुन रहे हैं।

DATA BOX-1 | किसके पास कितने छात्र?

प्रबंधन

छात्र

हिस्सेदारी

सरकारी

79,70,143

52.3%

सरकारी सहायता प्राप्त

84,463

0.6%

निजी

71,67,438

47.0%

अन्य

30,342

0.2%

कुल

1,52,52,386

100%

EXPOSE POINT

  • प्रदेश के हर 100 छात्रों में 52 सरकारी स्कूलों में, जबकि 47 निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं।
  • स्कूलों की संख्या में भारी अंतर है...
  • लेकिन छात्रों की संख्या लगभग बराबरी पर पहुंच चुकी है।

76% सरकारी स्कूल... लेकिन तस्वीर बदल जाती है

अगर केवल स्कूलों की संख्या देखी जाए तो सरकारी शिक्षा व्यवस्था बेहद मजबूत दिखाई देती है।

DATA BOX-2 | मध्य प्रदेश का स्कूल नेटवर्क

प्रबंधन

स्कूल

हिस्सेदारी

सरकारी

91,199

76.2%

सरकारी सहायता प्राप्त

490

0.4%

निजी

27,214

22.7%

अन्य

791

0.7%

कुल

1,19,694

100%

EXPOSE POINT

सरकारी स्कूल निजी स्कूलों से करीब साढ़े तीन गुना अधिक हैं।

लेकिन छात्र संख्या में अंतर केवल 8.02 लाख का है।

यही आंकड़ा सरकारी शिक्षा व्यवस्था के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौती की ओर इशारा करता है।

सबसे बड़ा सवाल वहीं, जहां शिक्षा शुरू होती है

अगर यह माना जाए कि सरकारी स्कूलों की सबसे मजबूत पकड़ शुरुआती कक्षाओं में होगी, तो आंकड़े इसके उलट तस्वीर दिखाते हैं।

DATA BOX-3 | स्तरवार नामांकन (सरकारी बनाम निजी)

स्तर

सरकारी

निजी

फाउंडेशनल

11,73,340

26,22,848

प्रिपरेटरी

23,20,100

16,38,644

मिडिल

22,25,887

15,46,350

सेकेंडरी

22,50,816

13,59,596

EXPOSE POINT

सबसे बड़ा अंतर फाउंडेशनल स्टेज में है।

जहां बच्चे पहली बार स्कूल में प्रवेश लेते हैं… वहीं निजी स्कूलों में सरकारी स्कूलों की तुलना में दोगुने से अधिक बच्चे नामांकित हैं।

यानी सरकारी शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती हाईस्कूल नहीं… पहली क्लास है।

चार लाख शिक्षक... फिर भी मुकाबला बराबरी का

विधानसभा में सरकार ने स्पष्ट कहा कि सरकारी स्कूलों में नामांकन घटने का कारण शिक्षकों या बुनियादी सुविधाओं की कमी नहीं है।

आंकड़े भी बताते हैं कि सरकारी व्यवस्था में शिक्षकों की संख्या कहीं अधिक है।

DATA BOX-4 | किसके पास कितने शिक्षक?

प्रबंधन

शिक्षक

सरकारी

3,99,970

सरकारी सहायता प्राप्त

3,823

निजी

3,22,423

अन्य

2,841

कुल

7,29,057

EXPOSE POINT

सरकारी स्कूलों में करीब 4 लाख शिक्षक

निजी स्कूलों में 3.22 लाख शिक्षक

सरकारी स्कूल भी ज्यादा...

शिक्षक भी ज्यादा… 

फिर भी निजी स्कूल लगभग बराबर छात्रों को पढ़ा रहे हैं।

आंकड़े कहते हैं—तस्वीर सिर्फ संख्या की नहीं है

जब स्कूलों और शिक्षकों की संख्या को छात्रों से जोड़कर देखा जाता है, तो एक अलग तस्वीर सामने आती है।

DATA BOX-5 | औसत तस्वीर

सूचकांक

सरकारी

निजी

स्कूल

91,199

27,214

छात्र

79.70 लाख

71.67 लाख

शिक्षक

3.99 लाख

3.22 लाख

औसत छात्र प्रति स्कूल

87

263

औसत शिक्षक प्रति स्कूल

4.4

11.8

औसत छात्र प्रति शिक्षक

20

22

EXPOSE POINT

एक निजी स्कूल में औसतन सरकारी स्कूल की तुलना में तीन गुना अधिक छात्र पढ़ रहे हैं।

यानी मुकाबला स्कूलों की संख्या का नहीं… अभिभावकों की पसंद का बन चुका है।

विधानसभा का जवाब बनाम आंकड़ों का सवाल

सरकार का पक्ष—

  • स्कूल बंद नहीं हुए
  • केवल मर्ज हुए
  • शून्य नामांकन वाले स्कूल असंचालित रहते हैं
  • स्कूल चलें हम अभियान और चाइल्ड ट्रैकिंग से नामांकन बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

यह सरकार का आधिकारिक पक्ष है।

लेकिन UDISE के आंकड़े एक दूसरा सवाल भी छोड़ जाते हैं।

  • अगर प्रदेश में तीन-चौथाई स्कूल सरकारी हैं...
  • अगर सबसे ज्यादा शिक्षक सरकारी स्कूलों में हैं...
  • अगर सरकारी शिक्षा व्यवस्था सबसे बड़ा नेटवर्क है...

तो फिर निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की हिस्सेदारी सरकारी स्कूलों के लगभग बराबर कैसे पहुंच गई?

यही वह सवाल है जिसका जवाब केवल स्कूलों की संख्या से नहीं मिलेगा।

इसका जवाब शिक्षा की गुणवत्ता, सीखने के परिणाम, बुनियादी सुविधाओं, अभिभावकों के भरोसे और सरकारी नीतियों के प्रभाव में तलाशना होगा।

EXPOSE EDUCATION

"यह सिर्फ खबर नहीं, मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की डेटा-आधारित पड़ताल है।"

Episode-02 में पढ़िए...

"पहली क्लास से ही सरकारी स्कूल क्यों हार रहे हैं?"

फाउंडेशनल स्टेज के आंकड़े खोलेंगे सरकारी शिक्षा का सबसे बड़ा सच।