वर्दी में भी 'नारी शक्ति' पीछे... मध्य प्रदेश पुलिस की फील्ड कमान अब भी पुरुषों के भरोसे

मध्य प्रदेश पुलिस के जेंडर ऑडिट में फील्ड नेतृत्व में महिलाओं की सीमित भागीदारी सामने आई। पुलिस कमिश्नर, आईजी, डीआईजी और एसपी जैसे प्रमुख पदों पर महिला अधिकारियों की संख्या बेहद कम है। The Expose Live की विशेष रिपोर्ट में जानिए आंकड़े क्या कहते हैं।

वर्दी में भी 'नारी शक्ति' पीछे... मध्य प्रदेश पुलिस की फील्ड कमान अब भी पुरुषों के भरोसे

महिला सुरक्षा, नारी सम्मान और 33% भागीदारी के दावे अपनी जगह... लेकिन कानून-व्यवस्था संभालने वाली सबसे ताकतवर कुर्सियों पर महिलाओं की मौजूदगी आज भी बेहद सीमित

भोपाल। 

मंचों पर महिला सशक्तिकरण की बातें होती हैं। सरकारें महिलाओं को नेतृत्व देने, निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने और उन्हें बराबरी का अधिकार देने की प्रतिबद्धता दोहराती हैं। लेकिन जब मध्य प्रदेश पुलिस की फील्ड पोस्टिंग का डेटा सामने रखा जाता है, तो तस्वीर कुछ और ही कहानी कहती है।

The Expose Live ने पुलिस कमिश्नरेट, आईजी, डीआईजी और जिला पुलिस अधीक्षकों (SP) की वर्तमान फील्ड पोस्टिंग का जेंडर ऑडिट किया। नतीजा चौंकाने वाला है।

भोपाल और इंदौर के दोनों पुलिस कमिश्नरेट से लेकर प्रदेश की 8 आईजी रेंज/जोन, 16 डीआईजी रेंज और 49 जिला पुलिस अधीक्षकों तक, महिलाओं की मौजूदगी गिनी-चुनी है। यानी जिस विभाग से महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जुड़ी है, उसी विभाग की फील्ड कमान अब भी लगभग पूरी तरह पुरुष अधिकारियों के हाथ में है।

STORY BOX | मध्य प्रदेश पुलिस का जेंडर ऑडिट

पुलिस कमिश्नरेट

कुल कमिश्नरेट : 2 (भोपाल, इंदौर)

पद

कुल

महिला

Police Commissioner

2

0

Additional Commissioner

4

1

DCP

8

1

महिला अधिकारी

  • मोनिका शुक्ला — Additional Commissioner, भोपाल
  • श्रद्धा तिवारी — DCP Headquarters, भोपाल

कुल फील्ड नेतृत्व : 14 | महिला : 2 | पुरुष : 12

IG (Zone/Range)

कुल IG Zone/Range : 8

महिला अधिकारी

  • रुचि वर्धन मिश्रा — IG, भोपाल (रूरल)
  • चैत्रा एन — IG, शहडोल

महिला : 2 | पुरुष : 6

DIG (Range)

कुल DIG Range : 16

महिला अधिकारी

  • सिमाला प्रसाद — DIG, खरगोन रेंज

महिला : 1 | पुरुष : 15

जिला पुलिस अधीक्षक (SP)

कुल जिला SP : 49

महिला अधिकारी

  • यांगचेन डोलकर भूटिया — शिवपुरी
  • निवेदिता नायडू — पन्ना
  • हितिका वासल — गुना
  • सोनाक्षी सक्सेना — सीहोर

महिला : 4 | पुरुष : 45

आंकड़े जो सवाल खड़े करते हैं

यदि केवल फील्ड नेतृत्व की बात करें तो तस्वीर और स्पष्ट हो जाती है।

  • Police Commissioner : 0% महिला
  • Additional Commissioner : 25% महिला
  • DCP : 12.5% महिला
  • IG Zone/Range : 25% महिला
  • DIG Range : 6.25% महिला
  • District SP : 8.16% महिला

यानी प्रदेश की पुलिस व्यवस्था में निर्णय लेने वाली सबसे अहम फील्ड पोस्टिंग पर महिलाओं की हिस्सेदारी अधिकांश स्तरों पर 10 प्रतिशत के आसपास या उससे भी कम है।

डाटा और आंकड़े एमपी पुलिस पोर्टल से

IAS से भी ज्यादा असंतुलित तस्वीर

The Expose Live के पहले भाग में सामने आया था कि मध्य प्रदेश के 55 जिलों में केवल 14 महिला कलेक्टर हैं और 10 संभागों में सिर्फ एक महिला संभागायुक्त

लेकिन पुलिस विभाग का डेटा उससे भी ज्यादा असंतुलित तस्वीर पेश करता है।

यहां दो पुलिस कमिश्नरों में एक भी महिला नहीं है।

16 डीआईजी रेंज में सिर्फ एक महिला अधिकारी है।

49 जिलों में केवल चार महिला एसपी फील्ड कमान संभाल रही हैं।

यानी प्रशासन की तुलना में पुलिस नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी और भी कम दिखाई देती है।

क्या महिलाओं पर फील्ड कमांड का भरोसा अब भी कम?

जिला एसपी, डीआईजी, आईजी और पुलिस कमिश्नर केवल प्रशासनिक पद नहीं हैं।

यहीं से कानून-व्यवस्था संभाली जाती है।

दंगों की रणनीति तय होती है।

बड़े अपराधों की निगरानी होती है।

संवेदनशील जिलों की कमान संभाली जाती है।

यानी यही वे पद हैं जहां सबसे अधिक निर्णय क्षमता, नेतृत्व और फील्ड कमांड की जरूरत होती है।

ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या महिलाओं को इन पदों तक पर्याप्त अवसर मिल रहे हैं, या फिर फील्ड पोस्टिंग में आज भी पुरुष अधिकारियों को प्राथमिकता दी जाती है?

भर्ती बढ़ी... लेकिन नेतृत्व क्यों नहीं?

पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश पुलिस में महिला आरक्षकों और महिला अधिकारियों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

महिला हेल्प डेस्क, महिला सुरक्षा अभियान, महिला बीट और महिला अपराधों पर विशेष फोकस भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

लेकिन जब नेतृत्व की सबसे महत्वपूर्ण कुर्सियों की सूची सामने आती है, तो महिलाओं की संख्या अचानक बेहद कम दिखाई देती है।

यही विरोधाभास इस डेटा ऑडिट का सबसे बड़ा निष्कर्ष है।

Expose Live Lens

महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा पैमाना भाषण नहीं, निर्णय लेने वाली कुर्सियां होती हैं।

यदि फील्ड प्रशासन और पुलिस नेतृत्व की तस्वीर देखें तो दोनों ही जगह पुरुषों का वर्चस्व साफ दिखाई देता है।

पहले भाग में प्रशासनिक व्यवस्था का जेंडर ऑडिट सामने आया।

दूसरे भाग में पुलिस व्यवस्था का।

दोनों डेटा मिलकर एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं—

क्या मध्य प्रदेश में महिलाओं को जिम्मेदारी तो दी जा रही है, लेकिन सबसे ताकतवर फील्ड पोस्टिंग अब भी पुरुष अधिकारियों के लिए सुरक्षित मानी जाती हैं?

यह सवाल किसी व्यक्ति या सरकार पर आरोप नहीं, बल्कि उपलब्ध आधिकारिक पोस्टिंग डेटा से उभरता हुआ एक प्रशासनिक प्रश्न है।

EXPOSE EXCLUSIVE | PART-3

मंत्रालय, विभाग और सत्ता के असली पावर सेंटर में महिलाओं की कितनी हिस्सेदारी है?

IAS Gender Audit का तीसरा और अंतिम भाग जल्द।

IAS जेंडर ऑडिटः Read Here-