MSP तय, फिर भी सड़क पर किसान... आखिर मूंग खरीदी मॉडल में कहां फेल हुई सरकार?

हरदा में 100% मूंग खरीदी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन मध्यप्रदेश की खरीदी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। मूंग का MSP ₹8,768 प्रति क्विंटल तय होने के बावजूद किसान पूरी उपज की सरकारी खरीदी की मांग कर रहे हैं। Expose Live की इस रिपोर्ट में जानिए MSP, सरकारी खरीदी, मध्यप्रदेश के आंकड़े और आंदोलन के पीछे की पूरी कहानी।

MSP तय, फिर भी सड़क पर किसान... आखिर मूंग खरीदी मॉडल में कहां फेल हुई सरकार?

अगर सरकार समर्थन मूल्य तय कर चुकी है, तो किसान 100% खरीदी की मांग को लेकर क्यों हैं सड़क पर 

हरदा का आंदोलन सिर्फ एक जिले की खबर नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की खरीदी नीति पर बन गया है बड़ा सवाल

हरदा।

मध्यप्रदेश के हरदा में मूंग उत्पादक किसानों का आंदोलन अब सिर्फ स्थानीय विरोध नहीं रहा। भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसानों ने बाजार बंद कराया, हाईवे जाम किया और कलेक्ट्रेट पहुंचकर 100 प्रतिशत मूंग खरीदी की मांग उठाई। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई और किसानों से बातचीत की, लेकिन इस आंदोलन ने सरकार की खरीदी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

किसानों का कहना है कि सरकार ने मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹8,768 प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन यदि पूरी फसल की खरीदी ही नहीं होगी तो MSP का लाभ किसानों तक कैसे पहुंचेगा?

MSP की घोषणा और किसान की कमाई के बीच जो फासला है, हरदा का आंदोलन उसी सवाल को सामने ला रहा है।

आखिर विवाद क्या है?

मध्यप्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की सरकारी खरीदी 1 जुलाई से 10 अगस्त 2026 तक की जा रही है। इसके लिए 25 मई से 15 जून तक किसानों का पंजीयन कराया गया था।

केंद्र सरकार ने इस वर्ष मध्यप्रदेश में 4,54,580 मीट्रिक टन मूंग और 2,55,450 मीट्रिक टन उड़द की MSP पर खरीदी को मंजूरी दी है।

लेकिन किसानों का आरोप है कि खरीदी की मौजूदा व्यवस्था में पंजीकृत उत्पादन का केवल 25 प्रतिशत ही MSP पर खरीदा जा रहा है। यदि ऐसा है तो शेष उपज किसानों को खुले बाजार में बेचनी पड़ेगी, जहां कई जगह MSP से कम कीमत मिल रही है। यही इस आंदोलन की सबसे बड़ी वजह है।

किसान क्या मांग रहे हैं?

भारतीय किसान संघ और प्रदर्शन कर रहे किसानों की प्रमुख मांगें हैं—

  • मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी।
  • हर पंजीकृत किसान की पूरी उपज MSP पर खरीदी जाए।
  • खरीदी की मात्रा पर किसी प्रकार की सीमा न हो।
  • भुगतान समय पर किया जाए।
  • पंजीयन और खरीदी प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।

किसानों का कहना है कि यदि सरकार समर्थन मूल्य घोषित करती है, तो पूरी उपज खरीदने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।

हरदा में क्या हुआ?

आंदोलन के दौरान—

  • बाजार बंद कराया गया।
  • हाईवे पर चक्काजाम किया गया।
  • बड़ी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे।
  • प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया।
  • अधिकारियों ने किसानों से ज्ञापन लेकर बातचीत की।

फिलहाल प्रशासन ने किसानों की मांग सरकार तक पहुंचाने का भरोसा दिया है, लेकिन 100 प्रतिशत खरीदी को लेकर कोई नई घोषणा नहीं हुई है।

मध्यप्रदेश की तस्वीर क्या कहती है?

मध्यप्रदेश देश के प्रमुख मूंग उत्पादक राज्यों में शामिल है। हरदा, नर्मदापुरम, सीहोर, देवास, विदिशा, उज्जैन, खंडवा और खरगोन जैसे जिले ग्रीष्मकालीन मूंग उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं।

पिछले वर्ष यानी 2025 में राज्य में लगभग 2.94 लाख किसानों ने मूंग की MSP खरीदी के लिए पंजीयन कराया था। ऐसे में खरीदी नीति में किसी भी बदलाव का असर लाखों किसानों पर पड़ सकता है।

MSP है, फिर किसान सड़क पर क्यों?

यही इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।

MSP घोषित होना और पूरी फसल का MSP पर बिक जाना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।

सरकारी खरीदी के लिए पंजीयन, गुणवत्ता मानक, खरीद केंद्रों की क्षमता, समय-सीमा और स्वीकृत मात्रा जैसी शर्तें लागू होती हैं। यदि इन कारणों से किसान की पूरी उपज सरकारी खरीदी में शामिल नहीं हो पाती, तो उसे शेष फसल खुले बाजार में बेचनी पड़ती है।

यहीं से किसानों और सरकार के बीच विवाद शुरू होता है।

सरकार का पक्ष

सरकार की ओर से फिलहाल यह कहा गया है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत खरीदी की जा रही है। हरदा में हुए आंदोलन के बाद प्रशासन ने किसानों से चर्चा की है, लेकिन 100 प्रतिशत खरीदी की मांग पर अभी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।

Expose Live Lens

हरदा का आंदोलन सिर्फ मूंग खरीद का विवाद नहीं है। यह MSP की घोषणा और MSP के वास्तविक लाभ के बीच मौजूद अंतर की कहानी है।

यदि किसानों का यह दावा सही है कि पंजीकृत उत्पादन का केवल 25 प्रतिशत ही MSP पर खरीदा जा रहा है, तो सवाल सिर्फ समर्थन मूल्य का नहीं, बल्कि पूरी खरीद नीति का भी है। सरकार का कहना है कि खरीदी तय प्रक्रिया के अनुसार हो रही है, जबकि किसान पूरी उपज खरीदने की मांग कर रहे हैं।

यहीं से यह मामला एक जिले के आंदोलन से आगे बढ़कर राज्य की कृषि नीति पर बहस का विषय बन जाता है।

बड़ा सवाल

जब MSP किसान को न्यूनतम कीमत की गारंटी देने के लिए तय किया जाता है, तो क्या खरीद व्यवस्था भी ऐसी नहीं होनी चाहिए कि अधिकतम किसानों को उसका वास्तविक लाभ मिल सके? या फिर MSP और सरकारी खरीदी के बीच का यह अंतर हर साल किसानों को सड़क पर लाता रहेगा?

प्रमुख घटनाक्रम | हरदा किसान आंदोलन

  • किसानों ने 100% MSP पर मूंग खरीदी, खरीदी केंद्र बढ़ाने और लंबित फसल बीमा राशि की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया।
  • भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसानों ने इंदौर-नागपुर हाईवे पर चक्काजाम और बाजार बंद का आह्वान किया।
  • आंदोलन के दौरान टेंट लगाने को लेकर प्रशासन और किसानों के बीच कुछ देर विवाद हुआ, जिसे अधिकारियों ने समझाइश देकर शांत कराया।
  • सुरक्षा के लिए करीब 500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए और कई जिलों से अतिरिक्त बल बुलाया गया।
  • प्रशासन ने यातायात डायवर्ट किया, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
  • आंदोलन में करीब 5,000 किसानों की मौजूदगी रही, जबकि किसान संगठन ने 20,000 से अधिक किसानों के जुटने का दावा किया।
  • किसानों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।